10.24

संस्कृत

पुरोधसां च मुख्यं मां विद्धि पार्थ बृहस्पतिम् । सेनानीनामहं स्कन्दः सरसामस्मि सागरः ॥ २४ ॥

purodhasāṃ ca mukhyaṃ māṃ viddhi pārtha bṛhaspatim senānīnām ahaṃ skandaḥ sarasām asmi sāgaraḥ

अनुवाद

हे पार्थ, पुरोहितों में मुख्य बृहस्पति मुझे ही जानो। सेनापतियों में मैं स्कन्द हूँ और जलाशयों में मैं सागर हूँ।

संस्कृत से AI अनुवाद, ए. बेसेंट (सार्वजनिक डोमेन) की सहायता से। मातृभाषी पाठक द्वारा समीक्षित।

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व्याख्या

संस्थागत अधिकार: पुरोहितों में प्रधान बृहस्पति और सेनापतियों में प्रधान स्कन्द। पुरोहिती और सैन्य नेतृत्व का नाम एक ही साँस में लिया गया है, दोनों को विभूति के उदाहरण के लिए समान रूप से मान्य क्षेत्र माना गया है — यह ध्यान देने योग्य है, क्योंकि यह उपदेश पाने वाले अर्जुन स्वयं एक योद्धा हैं। पुरोहित और सेनापति — पुरोधस् और सेनानी — बिना किसी ऊँच-नीच के साथ-साथ रखे गए हैं। यह उन अनेक स्थलों में से एक है जहाँ यह सूची आध्यात्मिक और सैन्य श्रेष्ठता को समान रूप से उपयुक्त माध्यम मानती है।

AI अनुवाद। मातृभाषी पाठक द्वारा समीक्षित।

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गहराई से अध्ययन करें

शब्द-दर-शब्द

purodhasāṃ ca mukhyaṃ māṃपुरोधसां च मुख्यं मां
और पुरोहितों में मुझे मुख्य (purodhasām + ca + mukhyam + mām)
viddhi pārtha bṛhaspatimविद्धि पार्थ बृहस्पतिं
हे पार्थ, बृहस्पति जानो (viddhi + pārtha + bṛhaspatim)
senānīnām ahaṃ skandaḥसेनानीनां अहं स्कन्दः
सेनापतियों में मैं स्कन्द हूँ (senānīnām + aham + skandaḥ)
sarasām asmi sāgaraḥसरसां अस्मि सागरः
जलाशयों में मैं सागर हूँ (sarasām + asmi + sāgaraḥ)

संस्कृत और अंग्रेज़ी शब्द-दर-शब्द अर्थों से AI अनुवाद। मातृभाषी पाठक द्वारा समीक्षित।

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टीका

Site Commentary

Krishna doesn’t stop at naming the best of priests broadly — purodhasām names the household priest specifically, a narrower guild within the larger priestly class. The list’s precision is doing quiet work here: even a fairly narrow, specific role turns out to have its own singular best example, which means the principle scales down as easily as it scales up, from the whole of scripture to one household’s officiant.

Original commentary written for this site · © Amit Singh — original commentary

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पाठ

व्यक्तिगत

  • किसी काम को सचमुच अच्छी तरह करने की लगन आपकी सबसे छोटी और सबसे साधारण ज़िम्मेदारियों पर भी उतनी ही लागू होती है, जितनी उन बड़ी आकांक्षाओं पर जिन पर आपको गर्व है। सच्चा प्रयास केवल उन्हीं भूमिकाओं के लिए बचाकर न रखें जिन्हें आप इतना बड़ा मानते हैं कि वे मायने रखें।

व्यावसायिक

  • आपकी टीम में कोई छोटा, विशेष काम भी सच्ची उत्कृष्टता की उसी लगन का हकदार है जिसका हकदार कोई दिखने वाला, बड़ा पद है। 'किसी को इस काम में सचमुच निपुण होना चाहिए' — यह सिद्धांत सबसे छोटे काम तक लागू होता है, केवल चमक-दमक वाले कामों तक नहीं।

परिवार और समाज

  • पारिवारिक जीवन की सबसे छोटी, बार-बार आने वाली भूमिका — बिलों का हिसाब कौन रखता है, घर के कार्यक्रमों का ध्यान कौन रखता है — भी सचमुच अच्छी तरह निभाए जाने की हकदार है, न कि केवल एक झंझट मानकर सह लेने की। उत्कृष्टता के लिए उस मंच से बड़े मंच की ज़रूरत नहीं जो पहले से आपके सामने है।

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