संस्कृत
बृहत्साम तथा साम्नां गायत्री छन्दसामहम् । मासानां मार्गशीर्षोऽहमृतूनां कुसुमाकरः ॥ ३५ ॥
bṛhatsāma tathā sāmnāṃ gāyatrī chandasām aham māsānāṃ mārgaśīrṣo'ham ṛtūnāṃ kusumākaraḥ
अनुवाद
साम के गीतों में मैं बृहत्साम हूँ, और छन्दों में गायत्री हूँ। महीनों में मैं मार्गशीर्ष हूँ और ऋतुओं में फूलों से भरा वसन्त हूँ।
संस्कृत से AI अनुवाद, ए. बेसेंट (सार्वजनिक डोमेन) की सहायता से। मातृभाषी पाठक द्वारा समीक्षित।
व्याख्या
स्तोत्रों में बृहत्साम, छन्दों में गायत्री, महीनों में मार्गशीर्ष, ऋतुओं में वसन्त — सौन्दर्य और पंचांग से जुड़ी “श्रेष्ठ” वस्तुओं का यह श्लोक स्थापित क्रम का पालन करता है और इस पर अलग से अधिक टिप्पणी की आवश्यकता नहीं है; यह सूची की सबसे सीधी-सादी प्रविष्टियों में से एक है। पंचांग और छन्द से जुड़ी “सर्वोपरि” वस्तुओं का श्लोक — सूची अपनी स्थापित लय में आगे बढ़ती हुई। गायत्री को विशेष रूप से इसलिए चुना गया है कि वह सबसे पवित्र वैदिक ऋचा का छन्द है।
AI अनुवाद। मातृभाषी पाठक द्वारा समीक्षित।
गहराई से अध्ययन करें
शब्द-दर-शब्द
- bṛhatsāma tathā sāmnāṃबृहत्साम तथा सांनां
- तथा सामों में बृहत्साम (bṛhat-sāma + tathā + sāmnām)
- gāyatrī chandasām ahamगायत्री छन्दसां अहं
- छन्दों में मैं गायत्री हूँ (gāyatrī + chandasām + aham)
- māsānāṃ mārgaśīrṣo'hamमासानां मार्गशीर्षोऽहं
- महीनों में मैं मार्गशीर्ष हूँ (māsānām + mārga-śīrṣaḥ + aham)
- ṛtūnāṃ kusumākaraḥऋतूनां कुसुमाकरः
- ऋतुओं में फूलों से भरा वसन्त (ṛtūnām + kusuma-ākaraḥ)
संस्कृत और अंग्रेज़ी शब्द-दर-शब्द अर्थों से AI अनुवाद। मातृभाषी पाठक द्वारा समीक्षित।
टीका
Site Commentary
This verse pairs a hymn and a meter — both instruments of sacred recitation — with a month and a season, categories anyone marks whether or not they ever chant a Veda. The same two-line unit that names Gāyatrī, the meter underlying the most famous mantra in the tradition, closes by naming which month feels best and which season looks best; sacred practice and ordinary calendar sense sit in the same breath, unranked against each other.
Original commentary written for this site · © Amit Singh — original commentary
अवधारणाएँ
इस श्लोक को अपनाएँ
पाठ
व्यक्तिगत
- सार्थक, सोच-समझकर किए जाने वाले अभ्यास और रोज़मर्रा के कैलेंडर वाले जीवन को एक-दूसरे के साथ रहने दें, किसी एक को दूसरे से ऊँचा न मानें — किसी पवित्र दिनचर्या और ऋतु के किसी साधारण आनंद, दोनों पर सच्चा ध्यान दिया जा सकता है, और इनमें से कोई भी दूसरे की जगह नहीं छीनता।
व्यावसायिक
- 'रणनीतिक' काम को रोज़ के परिचालन वाले काम से अपने-आप अधिक मूल्यवान न मानें — दोनों सच्चे ध्यान के योग्य हैं, और जो टीम केवल रणनीतिक आधे हिस्से को पुरस्कृत करती है, वह उस परिचालन अनुशासन को कमज़ोर कर देती है जो वास्तव में काम को चलाए रखता है।
परिवार और समाज
- परिवार के विशेष अनुष्ठानों और कैलेंडर की साधारण दिनचर्या, जैसे कि आप किस महीने रिश्तेदारों से मिलने जाते हैं, दोनों को बराबर सच्ची परवाह दें — समय तय करने के साधारण निर्णय भी किसी रिश्ते को उतना ही आकार देते हैं जितना कभी-कभार आने वाला कोई बड़ा अवसर।
AI अनुवाद। मातृभाषी पाठक द्वारा समीक्षित।
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