6.10

संस्कृत

योगी युञ्जीत सततमात्मानं रहसि स्थितः । एकाकी यतचित्तात्मा निराशीरपरिग्रहः ॥

yogī yuñjīta satatam ātmānaṃ rahasi sthitaḥ ekākī yatacittātmā nirāśīr aparigrahaḥ

अनुवाद

योगी एकान्त स्थान में अकेला रहकर, मन और आत्मा को वश में करके, कामनाओं से रहित और परिग्रह से मुक्त होकर, निरन्तर अपने को योग में लगाए।

संस्कृत से AI अनुवाद, ए. बेसेंट (सार्वजनिक डोमेन) की सहायता से। मातृभाषी पाठक द्वारा समीक्षित।

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व्याख्या

यह श्लोक अध्याय के लंबे व्यावहारिक भाग का आरंभ करता है, जो श्लोक 32 तक चलता है — गीता में ध्यान की नियमावली के सबसे निकट यही है। श्लोक 11–14 के शारीरिक निर्देश शुरू होने से पहले ही एकांत, आत्मसंयम, अपेक्षा से मुक्ति (निराशीः) और स्वामित्व-भाव से मुक्ति (अपरिग्रहः) को पूर्व-तैयारी के रूप में बताया गया है। आसन से पहले पूर्व-शर्तें आती हैं: रहसि (एकांत में), एकाकी (अकेले), निराशीः (कुछ भी अपेक्षा न रखते हुए), अपरिग्रह (बहुत कम का स्वामी होना)। अध्याय पृष्ठ पर दिया गया चित्र विधि का आरंभ यहीं से करता है।

AI अनुवाद। मातृभाषी पाठक द्वारा समीक्षित।

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गहराई से अध्ययन करें

शब्द-दर-शब्द

yogī yuñjīta satatamयोगी युञ्जीत सततं
योगी निरन्तर योग में लगाए (yogī + yuñjīta + satatam)
ātmānaṃ rahasi sthitaḥआत्मानं रहसि स्थितः
अपने आप को, एकान्त में स्थित रहकर (ātmānam + rahasi + sthitaḥ)
ekākī yatacittātmāएकाकी यतचित्तात्मा
अकेला, मन और आत्मा को वश में किए हुए (ekākī + yata-citta-ātmā)
nirāśīr aparigrahaḥनिराशीः अपरिग्रहः
आशाओं से रहित, संग्रह से रहित (nir-āśīḥ + aparigrahaḥ)

संस्कृत और अंग्रेज़ी शब्द-दर-शब्द अर्थों से AI अनुवाद। मातृभाषी पाठक द्वारा समीक्षित।

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टीका

Site Commentary

For nine verses the chapter has been making claims about equanimity and self-mastery in the abstract; verse 10 is where it stops arguing and starts instructing. Solitude, restrained thought, freedom from expectation and possessiveness are the setup — Krishna gets the conditions right before he ever mentions posture, breath, or gaze.

Original commentary written for this site · © Amit Singh — original commentary

अवधारणाएँ

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पाठ

व्यक्तिगत

  • कोई नया अनुशासन शुरू करने से पहले — ध्यान, लेखन, व्यायाम — पहले परिस्थितियाँ ठीक कर लें: एक निश्चित समय, एक स्थान, और उस परिणाम से मुक्ति जिसकी आप उससे अपेक्षा कर रहे हैं। गलत परिस्थितियों के ऊपर सीधे तकनीक पर कूद पड़ना ही वह कारण है जिससे अधिकांश नई आदतें पहले सप्ताह से आगे नहीं टिक पातीं।

व्यावसायिक

  • अपनी टीम में कोई नई प्रक्रिया या उपकरण लागू करने से पहले, उसके लिए आवश्यक परिस्थितियाँ सुनिश्चित करें — सुरक्षित रखा गया समय, सही वातावरण, तुरंत परिणाम की अवास्तविक अपेक्षा से मुक्ति — बजाय इसके कि आप सीधे उसकी कार्यविधि के प्रशिक्षण पर कूद पड़ें।

परिवार और समाज

  • परिवार के किसी सदस्य के साथ कोई गंभीर बातचीत करने की कोशिश से पहले, पहले परिस्थितियाँ तैयार करें — सही समय, कोई व्यवधान नहीं, किसी विशेष परिणाम की कोई अपेक्षा नहीं — बजाय इसके कि जैसे ही बात आपके मन में आए, आप सीधे उसके विषय-वस्तु पर बोलना शुरू कर दें।

AI अनुवाद। मातृभाषी पाठक द्वारा समीक्षित।

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