संस्कृत
प्रकृतेः क्रियमाणानि गुणैः कर्माणि सर्वशः । अहङ्कारविमूढात्मा कर्ताहमिति मन्यते ॥
prakṛteḥ kriyamāṇāni guṇaiḥ karmāṇi sarvaśaḥ ahaṅkāravimūḍhātmā kartāham iti manyate
अनुवाद
सभी कर्म हर प्रकार से प्रकृति के गुणों द्वारा ही किए जाते हैं, परन्तु अहंकार से मोहित हुआ मनुष्य यह मानता है कि "मैं कर्ता हूँ"।
संस्कृत से AI अनुवाद, ए. बेसेंट (सार्वजनिक डोमेन) की सहायता से। मातृभाषी पाठक द्वारा समीक्षित।
व्याख्या
अध्याय श्लोक 5 के गुण-संबंधी तर्क पर लौटता है और उसे और पैना करके कर्तापन के भ्रम के बारे में एक दावे में बदल देता है: जो वास्तव में गुणों का कार्य है, उस पर “मैं कर्ता हूँ” का भाव विशेष रूप से अहंकार ही गढ़ता है। यह अकर्तापन का एक सिद्धांत है, जिस पर गीता बार-बार लौटती है — सबसे पूर्ण रूप में 13.29 और 14.19-20 में — और जिसे वह यहाँ सुलझा नहीं देती। श्लोक 28 सही दृष्टि देता है, इस प्रक्रिया का खंडन नहीं करता। अहंकार — शाब्दिक अर्थ में “मैं-को-रचने वाला” — यहाँ घमंड नहीं, बल्कि एक गलत आरोपण है: यह प्रकृति की क्रिया को आत्मा पर आरोपित कर देता है। इसके आर-पार देख लेना ही वह पूरा सुधार है जो गीता 3.28 प्रस्तुत करता है।
AI अनुवाद। मातृभाषी पाठक द्वारा समीक्षित।
गहराई से अध्ययन करें
शब्द-दर-शब्द
- prakṛteḥप्रकृतेः
- प्रकृति के
- kriyamāṇāniक्रियमाणानि
- किए जा रहे
- guṇaiḥगुणैः
- गुणों द्वारा
- karmāṇiकर्माणि
- कर्म
- sarvaśaḥसर्वशः
- सब प्रकार से
- ahaṅkāravimūḍhātmāअहङ्कारविमूढात्मा
- अहंकार से मोहित आत्मा (ahaṅkāra-vimūḍha-ātmā)
- kartāham iti manyateकर्ताहं इति मन्यते
- 'मैं कर्ता हूँ' ऐसा मानता है (kartā + aham + iti + manyate)
संस्कृत और अंग्रेज़ी शब्द-दर-शब्द अर्थों से AI अनुवाद। मातृभाषी पाठक द्वारा समीक्षित।
टीका
Site Commentary
The delusion described here doesn’t only inflate credit — “I am the doer” is exactly as available for blame as it is for pride. The same ahamkara that claims a success also claims a failure, which means the fix implied here, seeing the gunas act rather than a self, isn’t just humility’s cure for arrogance, it’s just as much a corrective for excessive self-blame.
Original commentary written for this site · © Amit Singh — original commentary
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पाठ
व्यक्तिगत
- जो मानसिक आदत आपको किसी जीत का ज़रूरत से ज़्यादा श्रेय लेने पर मजबूर करती है, वही आपको किसी हार का ज़रूरत से ज़्यादा दोष अपने सिर लेने पर भी मजबूर करती है — 'मैं कर्ता हूँ' की इस पकड़ को ढीला करना दोनों दिशाओं में असर करता है, केवल विनम्र बनाने वाली दिशा में नहीं।
व्यावसायिक
- जब कोई परियोजना असफल हो, तो उसी बढ़-चढ़कर दावा करने वाली प्रवृत्ति से बचें जिसने उसके सफल होने पर आपसे पूरा श्रेय लिवाया था — परिणाम प्रायः ऐसी अनेक सहायक परिस्थितियों से होकर निकलते हैं जो किसी एक व्यक्ति के नियंत्रण से बाहर होती हैं, और यह बात दोनों दिशाओं में लागू होती है।
परिवार और समाज
- यदि आप किसी पारिवारिक कलह या परिणाम को लेकर अनुपात से अधिक अपराध-बोध ढो रहे हैं, तो ध्यान दें कि यह अक्सर व्यक्तिगत नियंत्रण की उसी बढ़ी-चढ़ी भावना से उपजता है जो चीज़ें अच्छी होने पर आपसे ज़रूरत से ज़्यादा श्रेय का दावा करवाती है — इन दोनों में से कोई भी अति पूरी तरह सही नहीं है।
AI अनुवाद। मातृभाषी पाठक द्वारा समीक्षित।
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