संस्कृत
सक्ताः कर्मण्यविद्वांसो यथा कुर्वन्ति भारत । कुर्याद्विद्वांस्तथासक्तश्चिकीर्षुर्लोकसङ्ग्रहम् ॥
saktāḥ karmaṇy avidvāṃso yathā kurvanti bhārata kuryād vidvāṃs tathāsaktaś cikīrṣur lokasaṅgraham
अनुवाद
हे भारत, जिस प्रकार कर्म में आसक्त अज्ञानी लोग कर्म करते हैं, उसी प्रकार ज्ञानी को आसक्ति-रहित होकर लोकसंग्रह की इच्छा से कर्म करना चाहिए।
संस्कृत से AI अनुवाद, ए. बेसेंट (सार्वजनिक डोमेन) की सहायता से। मातृभाषी पाठक द्वारा समीक्षित।
व्याख्या
यह एक स्पष्ट सारांश-श्लोक है, जो श्लोक 20 से चले आ रहे पूरे तर्क को एक संतुलित वाक्य में फिर से कह देता है: कर्म वही, पर प्रेरणा उलटी — अज्ञानी के लिए आसक्ति, ज्ञानी के लिए लोकसंग्रह। यह एक कड़ी का काम करता है, जिसके बाद श्लोक 26 इस व्यावहारिक प्रश्न पर आता है कि ज्ञानी को उन अज्ञानियों के बीच कैसा आचरण करना चाहिए जिनसे यहाँ उसकी तुलना की जा रही है। यह समरूपता सटीक है और सोच-समझकर रखी गई है: बाहरी आचरण बिल्कुल एक जैसा, ताकि ज्ञानी आदर्श के रूप में पहचाने जा सकें, पर फल पर भीतर की पकड़ छूट चुकी हो। इसीलिए कर्मयोग तर्क से नहीं, बल्कि उदाहरण से सिखाया जा सकता है (गीता 3.26)।
AI अनुवाद। मातृभाषी पाठक द्वारा समीक्षित।
गहराई से अध्ययन करें
शब्द-दर-शब्द
- saktāḥ karmaṇy avidvāṃsoसक्ताः कर्मण्य् अविद्वांसो
- कर्म में आसक्त अज्ञानी लोग (saktāḥ + karmaṇi + avidvāṃsaḥ)
- yathā kurvanti bhārataयथा कुर्वन्ति भारत
- जिस प्रकार कर्म करते हैं, हे भारत (yathā + kurvanti + bhārata)
- kuryād vidvāṃs tathāsaktaśकुर्याद् विद्वांस् तथासक्तश्
- उसी प्रकार ज्ञानी अनासक्त रहकर कर्म करे (kuryāt + vidvān + tathā-asaktaḥ)
- cikīrṣur lokasaṅgrahamचिकीर्षुः लोकसङ्ग्रहं
- लोकसंग्रह, यानी लोक का कल्याण, चाहते हुए (cikīrṣuḥ + loka-saṅgraham)
संस्कृत और अंग्रेज़ी शब्द-दर-शब्द अर्थों से AI अनुवाद। मातृभाषी पाठक द्वारा समीक्षित।
टीका
Site Commentary
What’s easy to miss in a summary verse this clean is what it doesn’t ask for: a different action. The wise are told to perform the very same tasks the unlearned perform, driven by lokasangraha instead of attachment — meaning nothing about the wise person’s conduct would look different to an outside observer. The whole discipline this chapter has been building lives entirely on the inside, invisible from outside.
Original commentary written for this site · © Amit Singh — original commentary
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पाठ
व्यक्तिगत
- आपकी बाहरी दिनचर्या बिल्कुल वैसी ही रह सकती है, जबकि उसे करने का आपका कारण पूरी तरह बदल जाए — यह श्लोक जिस अनुशासन की ओर संकेत करता है, वह अलग काम करने के बारे में नहीं है, बल्कि वही काम ऐसे कारण से करने के बारे में है जो स्वार्थ से प्रेरित न हो।
व्यावसायिक
- दो लोग एक जैसा काम पूरा कर सकते हैं — एक श्रेय के पीछे भागते हुए, दूसरा सच्चे मन से टीम के परिणाम की सेवा करते हुए — और बाहर से दोनों में कोई अंतर दिखाई न दे; यह न मान लें कि एक जैसे व्यवहार का अर्थ एक जैसी मंशा है, न अपने बारे में, न किसी सहकर्मी के बारे में।
परिवार और समाज
- आप अपने जीवनसाथी या परिवार के किसी सदस्य के लिए वही घरेलू काम या वही सहायता करते रह सकते हैं, और चुपचाप उन्हें करने का कारण बदल सकते हैं — विवशता से हटकर सच्ची परवाह की ओर; संबंध बदल सके, इसके लिए दिखाई देने वाले काम का बदलना आवश्यक नहीं है।
AI अनुवाद। मातृभाषी पाठक द्वारा समीक्षित।
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