3.21

संस्कृत

यद्यदाचरति श्रेष्ठस्तत्तदेवेतरो जनः । स यत्प्रमाणं कुरुते लोकस्तदनुवर्तते ॥

yad yad ācarati śreṣṭhas tat tad evetaro janaḥ sa yat pramāṇaṃ kurute lokas tad anuvartate

अनुवाद

श्रेष्ठ पुरुष जो-जो आचरण करता है, अन्य लोग भी वैसा ही करते हैं। वह जो मानदंड स्थापित करता है, संसार उसी का अनुसरण करता है।

संस्कृत से AI अनुवाद, ए. बेसेंट (सार्वजनिक डोमेन) की सहायता से। मातृभाषी पाठक द्वारा समीक्षित।

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व्याख्या

यह एक सामान्य सामाजिक अवलोकन है, जो श्लोक 20 के लोकसंग्रह के पीछे की कार्य-प्रणाली स्पष्ट करता है: ज्ञानी लोग जैसा कर्म करते हैं, वैसा ठीक इसीलिए करते हैं कि दूसरे उनका अनुकरण करते हैं। यह उस बात का सीधा कथन है जो अगले चार श्लोकों में कृष्ण के अपने आचरण का औचित्य बन जाती है — वे यही सिद्धांत अब स्वयं पर लागू करने वाले हैं। शब्द प्रमाण — “माप, मानक, प्रमाण” — ही यहाँ सारा भार उठाता है: सम्मानित व्यक्ति का आचरण दूसरों को केवल प्रभावित नहीं करता, वह मानदंड तय करता है। इसीलिए गीता 3.22–गीता 3.26 किसी ज्ञानी व्यक्ति के कर्म से हट जाने को केवल निजी बात नहीं, बल्कि समाज के लिए विनाशकारी मानते हैं।

AI अनुवाद। मातृभाषी पाठक द्वारा समीक्षित।

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गहराई से अध्ययन करें

शब्द-दर-शब्द

yad yad ācarati śreṣṭhasयद् यद् आचरति श्रेष्ठस्
श्रेष्ठ व्यक्ति जो-जो आचरण करता है (yat + yat + ācarati + śreṣṭhaḥ)
tat tad evetaro janaḥतत् तद् एवेतरो जनः
अन्य लोग भी वही-वही करते हैं (tat + tat + eva + itaraḥ + janaḥ)
sa yat pramāṇaṃ kuruteस यत् प्रमाणं कुरुते
वह जो प्रमाण स्थापित करता है (saḥ + yat + pramāṇam + kurute)
lokas tad anuvartateलोकस् तद् अनुवर्तते
लोग उसी का अनुसरण करते हैं (lokaḥ + tat + anuvartate)

संस्कृत और अंग्रेज़ी शब्द-दर-शब्द अर्थों से AI अनुवाद। मातृभाषी पाठक द्वारा समीक्षित।

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टीका

Site Commentary

The verse makes no moral claim about whether this imitation dynamic is good — it’s pure description, people copy whoever sets the visible standard. It’s only in the verses immediately following, where Krishna applies this to his own conduct, that the description quietly turns into a prescription: because people imitate you, you are now obligated to act well.

Original commentary written for this site · © Amit Singh — original commentary

अवधारणाएँ

इस श्लोक को अपनाएँ

पाठ

व्यक्तिगत

  • इस बात को पहचानिए कि आपके आसपास के लोग आपके दिखाई देने वाले मानदंड की नकल करेंगे, चाहे आप कोई मानदंड स्थापित करने का इरादा रखें या नहीं — यह सीधा-सा तथ्य, एक बार ध्यान में आ जाने पर, अपने लिए उससे ऊँचा मानदंड रखने का कारण बन जाता है, जिसकी आप शायद वैसे परवाह न करते।

व्यावसायिक

  • इस बात को पहचानिए कि आपकी टीम अपनी मेहनत और अपने मानदंड उसी के अनुसार ढालेगी जो आप प्रत्यक्ष रूप से करते हैं, न कि जो आप कहते हैं — प्रभाव वास्तव में कैसे काम करता है, इसका यही अवलोकन आपको वह व्यवहार स्वयं करके दिखाने के लिए प्रेरित करे जो आप चाहते हैं, न कि केवल उसकी घोषणा करने के लिए।

परिवार और समाज

  • इस बात को पहचानिए कि बच्चे और परिवार के छोटे सदस्य आपको जो करते हुए देखते हैं, उसकी नकल उससे कहीं अधिक करते हैं जो आप उन्हें करने को कहते हैं — इस प्रवृत्ति को ईमानदारी से देखना ही 'मुझे अच्छा उदाहरण प्रस्तुत करना चाहिए' को एक घिसी-पिटी बात से वास्तविक दायित्व में बदल देता है।

AI अनुवाद। मातृभाषी पाठक द्वारा समीक्षित।

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