1.45

संस्कृत

अहो बत महत्पापं कर्तुं व्यवसिता वयम् । यद्राज्यसुखलोभेन हन्तुं स्वजनमुद्यताः ॥

aho bata mahat pāpaṃ kartuṃ vyavasitā vayam yad rājyasukhalobhena hantuṃ svajanam udyatāḥ

अनुवाद

अहो, कितने खेद की बात है कि हम महान पाप करने का निश्चय कर बैठे हैं, जो राज्य-सुख के लोभ से अपने ही स्वजनों को मारने के लिए उद्यत हो गए हैं।

संस्कृत से AI अनुवाद, ए. बेसेंट (सार्वजनिक डोमेन) की सहायता से। मातृभाषी पाठक द्वारा समीक्षित।

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व्याख्या

यह अर्जुन के कथन का भावनात्मक और आलंकारिक शिखर है। श्लोक 31 से अब तक दिए गए सारे तर्क इस एक पुकार में सिमट जाते हैं — और इस मोड़ पर ध्यान दें: अब वे “हम” पर, यानी अपने ही पक्ष पर, उसी लोभ से प्रेरित उद्देश्य का आरोप लगाते हैं जिसे उन्होंने श्लोक 38 में कौरवों पर डाला था। जो आरोप बाहर की ओर से शुरू हुआ था, वह यहाँ तक आते-आते पूरी तरह उन्हीं की ओर मुड़ गया है।

AI अनुवाद। मातृभाषी पाठक द्वारा समीक्षित।

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गहराई से अध्ययन करें

शब्द-दर-शब्द

aho bataअहो बत
हाय! खेद है
mahat pāpaṃमहत् पापं
महान पाप
kartuṃकर्तुं
करने के लिए
vyavasitā vayamव्यवसिता वयं
हम तत्पर हो गए हैं
yadयद्
कि
rājya-sukha-lobhenaराज्य-सुख-लोभेन
राज्य-सुख के लोभ से
hantuṃहन्तुं
मारने के लिए
svajanamस्वजनं
अपने ही स्वजनों को
udyatāḥउद्यताः
उद्यत हैं

संस्कृत और अंग्रेज़ी शब्द-दर-शब्द अर्थों से AI अनुवाद। मातृभाषी पाठक द्वारा समीक्षित।

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टीका

Site Commentary

After seven verses of careful argument-building — omens, cost-benefit, a formal “therefore,” a whole social-consequences chain — the speech suddenly breaks into pure exclamation, “aho bata,” alas. The logic doesn’t get abandoned so much as it arrives here; reasoning and lament turn out to be the same track, converging at exactly the point where the accusation turns fully on himself.

Original commentary written for this site · © Amit Singh — original commentary

अवधारणाएँ

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पाठ

व्यक्तिगत

  • जब किसी कठिन निर्णय पर सावधानी से किया गया विचार आख़िरकार किसी पीड़ादायक बिंदु पर पहुँचे, तो आश्चर्य न करें यदि वह किसी सुव्यवस्थित निष्कर्ष के बजाय एक कच्ची, तीखी भावना के रूप में सामने आए — तर्क और भावना वास्तव में अलग-अलग रास्तों पर नहीं चलते, और वह भावना तर्क का अपना काम पूरा करना भी हो सकती है।

व्यावसायिक

  • यदि आपने सावधानी से, आँकड़ों के आधार पर जो पक्ष तैयार किया है, वह आपकी अपनी टीम या आपके अपने निर्णय के बारे में किसी सचमुच असहज निष्कर्ष पर पहुँचता है, तो उस असहजता को सुव्यवस्थित सारांश के पक्ष में दबाने के बजाय उसे महसूस होने दें — वह प्रतिक्रिया अक्सर तर्क का स्वयं को पूरा करना होती है, उससे भटकाव नहीं।

परिवार और समाज

  • यदि किसी पारिवारिक मतभेद पर तार्किक ढंग से विचार करते-करते अंततः सच्चा दुःख या अपराध-बोध उभर आए, तो उसे तर्क से भटकाव न मानें — अक्सर तर्क हमेशा से ठीक उसी ओर बढ़ रहा होता है।

AI अनुवाद। मातृभाषी पाठक द्वारा समीक्षित।

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