1.39

संस्कृत

कथं न ज्ञेयमस्माभिः पापादस्मान्निवर्तितुम् । कुलक्षयकृतं दोषं प्रपश्यद्भिर्जनार्दन ॥

kathaṃ na jñeyam asmābhiḥ pāpād asmān nivartitum kulakṣayakṛtaṃ doṣaṃ prapaśyadbhir janārdana

अनुवाद

हे जनार्दन, कुल के नाश से होने वाले दोष को हम स्पष्ट देख रहे हैं, तो इस पाप से पीछे हटना हमें क्यों नहीं समझना चाहिए?

संस्कृत से AI अनुवाद, ए. बेसेंट (सार्वजनिक डोमेन) की सहायता से। मातृभाषी पाठक द्वारा समीक्षित।

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व्याख्या

यह श्लोक 38 में मानी गई बात पर एक मोड़ है। पाण्डव ठीक उसी अनुचित को देखते हैं जिसके प्रति कौरव अंधे हैं, और इसी कारण उनके पास पीछे हटने का कारण कम नहीं, बल्कि अधिक है। यह नैतिक उत्तरदायित्व का तर्क है: अधिक जागरूकता उसके अनुसार कर्म करने का अधिक दायित्व उत्पन्न करती है। यही तर्क सीधे उन परिणामों तक ले जाता है जिन्हें अर्जुन श्लोक 40 से गिनाना शुरू करते हैं।

AI अनुवाद। मातृभाषी पाठक द्वारा समीक्षित।

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गहराई से अध्ययन करें

शब्द-दर-शब्द

kathaṃ na jñeyamकथं न ज्ञेयं
यह क्यों न समझा जाए
asmābhiḥअस्माभिः
हमारे द्वारा
pāpād asmān nivartitumपापाद् अस्मान् निवर्तितुं
इस पाप से पीछे हटना
kula-kṣaya-kṛtaṃ doṣaṃकुल-क्षय-कृतं दोषं
कुल के विनाश से होने वाला दोष
prapaśyadbhirप्रपश्यद्भिः
स्पष्ट देखने वाले (हमारे द्वारा)
janārdanaजनार्दन
हे जनार्दन

संस्कृत और अंग्रेज़ी शब्द-दर-शब्द अर्थों से AI अनुवाद। मातृभाषी पाठक द्वारा समीक्षित।

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टीका

Site Commentary

Arjuna doesn’t assert this conclusion, he asks it as a rhetorical question — “why should not we…” — a form that assumes the answer is obvious to any listener. That’s the argument performing itself: posing the obligation as self-evident is exactly the kind of clear-sightedness he’s claiming the Kauravas lack.

Original commentary written for this site · © Amit Singh — original commentary

अवधारणाएँ

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पाठ

व्यक्तिगत

  • जब आप सही कदम के बारे में निश्चित हों, तो देखें कि क्या आप उसे बचाव में दिए गए दावे के बजाय एक स्वाभाविक प्रश्न की तरह कह सकते हैं — 'मैं ऐसा क्यों न करूँ' अक्सर इस बात का संकेत होता है कि तर्क सचमुच स्थिर हो चुका है, केवल उस पर बहस भर नहीं की गई है।

व्यावसायिक

  • कार्यस्थल पर किसी नैतिक पक्ष का समर्थन करते समय उसे एक स्वाभाविक प्रश्न के रूप में रखना — 'हम ऐसा क्यों न करें' — बचाव में दिए गए औचित्य से अधिक प्रभावी हो सकता है, क्योंकि यह साझा मानदंड को पहले से मानकर चलता है, न कि उसके पक्ष में शुरू से तर्क करता है।

परिवार और समाज

  • जब आप जानते हों कि परिवार के लिए सही काम क्या है, भले ही वह कठिन हो, तो आप ज़रूरत से ज़्यादा समझाने के बजाय उसे एक सरल, स्वाभाविक प्रश्न के रूप में कह सकते हैं — कभी-कभी बात को सीधे-सीधे कह देना उसे विस्तार से उचित ठहराने से अधिक प्रभावशाली होता है।

AI अनुवाद। मातृभाषी पाठक द्वारा समीक्षित।

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