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संस्कृत

एवमुक्तो हृषीकेशो गुडाकेशेन भारत । सेनयोरुभयोर्मध्ये स्थापयित्वा रथोत्तमम् ॥

evam ukto hṛṣīkeśo guḍākeśena bhārata senayor ubhayor madhye sthāpayitvā rathottamam

अनुवाद

संजय ने कहा: हे भारत, गुडाकेश (अर्जुन) के ऐसा कहने पर हृषीकेश (कृष्ण) ने उस उत्तम रथ को दोनों सेनाओं के बीच खड़ा करके,

संस्कृत से AI अनुवाद, ए. बेसेंट (सार्वजनिक डोमेन) की सहायता से। मातृभाषी पाठक द्वारा समीक्षित।

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व्याख्या

संजय का वर्णन फिर शुरू होता है और एक सीधी-सी बात बताता है: कृष्ण बिना कुछ कहे अर्जुन का अनुरोध मान लेते हैं। यहाँ दोनों के लिए जो नाम आए हैं — कृष्ण के लिए हृषीकेश (“इन्द्रियों के स्वामी”) और अर्जुन के लिए गुडाकेश (“निद्रा के स्वामी”, यह उपाधि उसकी है जिसने तंद्रा को जीत लिया हो) — उनमें एक मौन व्यंग्य छिपा है, यह देखते हुए कि आगे अर्जुन के अपने धैर्य का क्या होने वाला है।

AI अनुवाद। मातृभाषी पाठक द्वारा समीक्षित।

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गहराई से अध्ययन करें

शब्द-दर-शब्द

evam uktoएवं उक्तो
इस प्रकार कहे जाने पर
hṛṣīkeśoहृषीकेशो
हृषीकेश (कृष्ण)
guḍākeśenaगुडाकेशेन
गुडाकेश (अर्जुन) द्वारा
bhārataभारत
हे भरतवंशी
senayor ubhayor madhyeसेनयोः उभयोः मध्ये
दोनों सेनाओं के बीच
sthāpayitvāस्थापयित्वा
खड़ा करके
rathottamamरथोत्तमं
उत्तम रथ को

संस्कृत और अंग्रेज़ी शब्द-दर-शब्द अर्थों से AI अनुवाद। मातृभाषी पाठक द्वारा समीक्षित।

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टीका

Site Commentary

Krishna doesn’t question the request, doesn’t offer a counter-suggestion, doesn’t warn Arjuna about what he’s about to see — he simply does what was asked. That kind of unquestioning compliance, from someone the rest of the Gita shows sees exactly what’s coming, is itself a choice: sometimes the more respectful response is to let a person arrive at their own crisis rather than argue them out of the request that leads there.

Original commentary written for this site · © Amit Singh — original commentary

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पाठ

व्यक्तिगत

  • जब कोई आपसे ऐसी चीज़ माँगे जिसके बारे में आप समझ सकते हैं कि वह उसे किसी कठिन स्थिति में ले जाएगी, तो सोचिए कि अधिक सम्मानजनक क्या होगा — उसे इससे रोकने के लिए समझाना, या बस उसका अनुरोध मान लेना और बाद में उसके साथ बने रहना।

व्यावसायिक

  • जब टीम का कोई सदस्य कोई कड़वा सच माँगे — असली आँकड़े, ईमानदार प्रतिक्रिया — जिसके बारे में आप जानते हैं कि वह असहज करेगा, तो उसे बिना गोलमोल किए सीधे-सीधे बता देना अक्सर अनुरोध को ही नरम करने की कोशिश से अधिक उपयोगी होता है।

परिवार और समाज

  • जब आपका कोई क़रीबी ऐसा प्रश्न पूछे जिसका ईमानदार उत्तर आप जानते हैं कि पीड़ा देगा, तो उसके अनुरोध को टाल देने की इच्छा को रोकें — सीधा उत्तर देना और फिर आगे जो हो उसमें उसके साथ बने रहना, आमतौर पर उसके लिए अधिक हितकर होता है।

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