संस्कृत
येषामर्थे काङ्क्षितं नो राज्यं भोगाः सुखानि च । त इमेऽवस्थिता युद्धे प्राणांस्त्यक्त्वा धनानि च ॥
yeṣām arthe kāṅkṣitaṃ no rājyaṃ bhogāḥ sukhāni ca ta ime'vasthitā yuddhe prāṇāṃs tyaktvā dhanāni ca
अनुवाद
जिनके लिए हमने राज्य, भोग और सुख चाहे थे, वे ही ये लोग अपने प्राणों और धन का मोह छोड़कर यहाँ युद्ध में खड़े हैं।
संस्कृत से AI अनुवाद, ए. बेसेंट (सार्वजनिक डोमेन) की सहायता से। मातृभाषी पाठक द्वारा समीक्षित।
व्याख्या
यह श्लोक 32 की बात का और तीखा रूप है: राज्य और सुख कभी अपने लिए चाहे ही नहीं गए थे, केवल परिवार के लिए चाहे गए थे — और ठीक वही परिवार अब इसी युद्ध में मरने को तैयार खड़ा है। जीतने का उद्देश्य और जीतने की कीमत, दोनों एक ही लोग निकलते हैं।
AI अनुवाद। मातृभाषी पाठक द्वारा समीक्षित।
गहराई से अध्ययन करें
शब्द-दर-शब्द
- yeṣām artheयेषां अर्थे
- जिनके लिए
- kāṅkṣitaṃ noकाङ्क्षितं नो
- हमने चाहा था
- rājyaṃ bhogāḥ sukhāni caराज्यं भोगाः सुखानि च
- राज्य, भोग और सुख
- ta ime'vasthitāत इमेऽवस्थिता
- वे ही ये खड़े हैं
- yuddheयुद्धे
- युद्ध में
- prāṇāṃs tyaktvāप्राणांस् त्यक्त्वा
- प्राणों को त्यागकर
- dhanāni caधनानि च
- और धन को
संस्कृत और अंग्रेज़ी शब्द-दर-शब्द अर्थों से AI अनुवाद। मातृभाषी पाठक द्वारा समीक्षित।
टीका
Site Commentary
This verse performs something like an audit on verse 32’s renunciation: kingdom and pleasure weren’t wanted for their own sake to begin with, only ever “for the sake of” family — so this isn’t new detachment, it’s the discovery that the wanting was never really about the thing itself.
Original commentary written for this site · © Amit Singh — original commentary
अवधारणाएँ
इस श्लोक को अपनाएँ
पाठ
व्यक्तिगत
- जब आप किसी लंबे समय से संजोए लक्ष्य को छोड़ने का प्रयास कर रहे हों, तो ईमानदारी से पूछें कि आप वास्तव में उसे किसके लिए या किस चीज़ के लिए चाहते थे — हो सकता है आप पाएँ कि वह लक्ष्य स्वयं हमेशा किसी और चीज़ का साधन था, और वही दूसरी चीज़ है जिसकी वास्तव में जाँच करनी है।
व्यावसायिक
- जिस लक्ष्य या मापदंड के पीछे आप भागते रहे हैं, उसका बचाव करने से पहले यह खोजें कि वह वास्तव में किसके हित के लिए था — यदि इसका उत्तर बदल गया है या अब रहा ही नहीं, तो हो सकता है वह लक्ष्य अब उतने महत्त्व के योग्य न हो जितना आप उसे दे रहे हैं।
परिवार और समाज
- जब आप देखें कि परिवार के किसी सदस्य की ज़रूरतें बदल जाने के बाद भी आप उसके लिए किसी चीज़ के पीछे लगे हुए हैं, तो रुकें और पूछें कि क्या वह लक्ष्य अब भी अर्थ रखता है — हो सकता है मूल 'क्यों' चुपचाप लागू होना बंद हो गया हो।
AI अनुवाद। मातृभाषी पाठक द्वारा समीक्षित।
स्वयं से पूछें
इस श्लोक को पढ़ने से आगे ले जाने के कुछ तरीके। टिक और नोट इसी ब्राउज़र में रहते हैं।