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संस्कृत

आचार्याः पितरः पुत्रास्तथैव च पितामहाः । मातुलाः श्वशुराः पौत्राः श्यालाः सम्बन्धिनस्तथा ॥

ācāryāḥ pitaraḥ putrās tathaiva ca pitāmahāḥ mātulāḥ śvaśurāḥ pautrāḥ śyālāḥ sambandhinas tathā

अनुवाद

आचार्य, पिता, पुत्र और इसी प्रकार पितामह, मामा, ससुर, पौत्र, साले तथा अन्य सम्बन्धी भी।

संस्कृत से AI अनुवाद, ए. बेसेंट (सार्वजनिक डोमेन) की सहायता से। मातृभाषी पाठक द्वारा समीक्षित।

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व्याख्या

अर्जुन अब अपने तर्क भरे स्वर में वही गिनती दोहराता है, जो संजय ने पहले श्लोक 26–27 में सुनाई थी। असली बात यह दोहराव ही है: यह कोई नई जानकारी नहीं है, बल्कि अर्जुन ज़ोर देकर इसे खुलकर कह रहा है। जो उसने देखा, उसे वह उस तर्क का स्पष्ट आधार बना रहा है जिसे वह खड़ा कर रहा है।

AI अनुवाद। मातृभाषी पाठक द्वारा समीक्षित।

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शब्द-दर-शब्द

ācāryāḥआचार्याः
आचार्य
pitaraḥपितरः
पिता
putrāsपुत्रास्
पुत्र
tathaiva caतथैव च
और उसी प्रकार
pitāmahāḥपितामहाः
दादा
mātulāḥमातुलाः
मामा
śvaśurāḥश्वशुराः
ससुर
pautrāḥपौत्राः
पोते
śyālāḥश्यालाः
साले
sambandhinas tathāसंबन्धिनस् तथा
तथा अन्य सम्बन्धी

संस्कृत और अंग्रेज़ी शब्द-दर-शब्द अर्थों से AI अनुवाद। मातृभाषी पाठक द्वारा समीक्षित।

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टीका

Site Commentary

Read on its own, this verse is barely a sentence — just a list of relations with no independent verb, borrowing its grammar from what precedes it. Arjuna doesn’t construct a new clause here, he only enumerates; the syntax itself seems to run out of the capacity to argue and can only name.

Original commentary written for this site · © Amit Singh — original commentary

अवधारणाएँ

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पाठ

व्यक्तिगत

  • जब आप बहुत दबाव में हों, तो ध्यान दें कि कहीं आपकी सोच पूरे तर्क से हटकर बस तथ्यों को बार-बार गिनाने तक तो नहीं सिमट गई है। यह कमज़ोरी नहीं है, अक्सर असली तनाव में मन ऐसा ही करता है। इसे यही नाम देने से आपको फिर से सचमुच सोचने में मदद मिल सकती है।

व्यावसायिक

  • अगर आप देखें कि दबाव में कोई सहकर्मी तथ्यों पर तर्क करने के बजाय उन्हें केवल दोहरा रहा है, तो इसे ज़िद नहीं, बल्कि अत्यधिक बोझ का संकेत समझें। फिर से बहस कर पाने से पहले उसे संभलने के लिए समय और जगह की ज़रूरत हो सकती है, और विरोध की नहीं।

परिवार और समाज

  • अगर आपके परिवार में कोई समाधान की ओर बढ़ने के बजाय शिकायतों की वही सूची बार-बार दोहराता रहे, तो इस दोहराव को ही उसकी पीड़ा का संकेत समझें। हो सकता है वह अभी तर्क करने के लिए तैयार न हो, बस यह चाहता हो कि जो गलत है उसे कहते समय कोई उसकी बात सुने।

AI अनुवाद। मातृभाषी पाठक द्वारा समीक्षित।

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