संस्कृत
पाञ्चजन्यं हृषीकेशो देवदत्तं धनञ्जयः । पौण्ड्रं दध्मौ महाशङ्खं भीमकर्मा वृकोदरः ॥
pāñcajanyaṃ hṛṣīkeśo devadattaṃ dhanañjayaḥ pauṇḍraṃ dadhmau mahāśaṅkhaṃ bhīmakarmā vṛkodaraḥ
अनुवाद
हृषीकेश ने पाञ्चजन्य शंख बजाया और धनञ्जय ने देवदत्त। भयंकर कर्म करने वाले वृकोदर ने पौण्ड्र नामक महाशंख बजाया।
संस्कृत से AI अनुवाद, ए. बेसेंट (सार्वजनिक डोमेन) की सहायता से। मातृभाषी पाठक द्वारा समीक्षित।
व्याख्या
यहाँ हर शंख का अपना नाम है — कृष्ण का पाञ्चजन्य, जिसके बारे में कहा जाता है कि वह मारे गए एक दैत्य की हड्डियों से बना था, और अर्जुन का देवदत्त, यानी “ईश्वर का दिया हुआ”। इस दृश्य में वाद्य भी पौराणिक महत्त्व रखते हैं। इस क्षण में कुछ भी संयोग से नहीं है।
AI अनुवाद। मातृभाषी पाठक द्वारा समीक्षित।
गहराई से अध्ययन करें
शब्द-दर-शब्द
- pāñcajanyaṃपाञ्चजन्यं
- पाञ्चजन्य (शंख)
- hṛṣīkeśoहृषीकेशो
- हृषीकेश ने
- devadattaṃदेवदत्तं
- देवदत्त (शंख)
- dhanañjayaḥधनञ्जयः
- धनंजय ने
- pauṇḍraṃपौण्ड्रं
- पौण्ड्र नामक
- dadhmauदध्मौ
- बजाया
- mahā-śaṅkhaṃमहा-शङ्खं
- महाशंख
- bhīma-karmāभीम-कर्मा
- भयानक कर्म करने वाले
- vṛkodaraḥवृकोदरः
- वृकोदर ने
संस्कृत और अंग्रेज़ी शब्द-दर-शब्द अर्थों से AI अनुवाद। मातृभाषी पाठक द्वारा समीक्षित।
टीका
Site Commentary
The text doesn’t just say they blew their conches — it names each one, as though the instrument itself deserved its own small biography. Naming an object turns it from equipment into something with a history and a stake in the outcome, a move available to anyone, not just epic poets.
Original commentary written for this site · © Amit Singh — original commentary
इस श्लोक को अपनाएँ
पाठ
व्यक्तिगत
- कोई वस्तु जिसे आपने नाम दिया है या जिसके साथ कोई कहानी जोड़ दी है — कोई पुराना औज़ार, खूब घिसे हुए दौड़ने के जूते — किसी अनाम वैसी ही वस्तु की तुलना में प्रेरणा का कहीं अधिक बल रखती है; इसे भावुकता कहकर टाल देने के बजाय सोच-समझकर इसका उपयोग करें।
व्यावसायिक
- किसी प्रोजेक्ट या रिलीज़ को सामान्य-सा लेबल देकर छोड़ देने के बजाय टीम के भीतर उसे एक नाम देना सचमुच बदल सकता है कि टीम उससे कैसे जुड़ती है — यह केवल ब्रांडिंग नहीं है, यह वही कदम है जो यह श्लोक एक शंख के साथ उठाता है।
परिवार और समाज
- परिवार की वे वस्तुएँ जिनके नाम और इतिहास होते हैं — कोई पुश्तैनी धरोहर, पीढ़ियों से चली आ रही कोई रेसिपी — ठीक इसीलिए महत्त्व रखती हैं क्योंकि उन्हें नाम दिया गया और उनसे कहानियाँ जुड़ीं; इसे संयोग के भरोसे नहीं, जान-बूझकर सँजोकर रखना सार्थक है।
AI अनुवाद। मातृभाषी पाठक द्वारा समीक्षित।
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