1.14

संस्कृत

ततः श्वेतैर्हयैर्युक्ते महति स्यन्दने स्थितौ । माधवः पाण्डवश्चैव दिव्यौ शङ्खौ प्रदध्मतुः ॥

tataḥ śvetair hayair yukte mahati syandane sthitau mādhavaḥ pāṇḍavaś caiva divyau śaṅkhau pradadhmatuḥ

अनुवाद

तब सफ़ेद घोड़ों से जुते विशाल रथ पर बैठे माधव और पाण्डुपुत्र अर्जुन ने भी अपने दिव्य शंख बजाए।

संस्कृत से AI अनुवाद, ए. बेसेंट (सार्वजनिक डोमेन) की सहायता से। मातृभाषी पाठक द्वारा समीक्षित।

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व्याख्या

कृष्ण (“माधव”) और अर्जुन अपने रथ से उत्तर देते हैं, और “दिव्य” (दिव्यौ) शब्द उन्हें आम शोर से अलग कर देता है, क्योंकि यह शब्द विशेष रूप से उन्हीं के शंखों के लिए आया है। इस अध्याय में यह पहली बार है जब इन दोनों का नाम एक जोड़ी के रूप में साथ-साथ लिया गया है, एक ही रथ पर बैठे हुए। यही वह स्थान है जहाँ से आगे का सारा दृश्य, और आगे की पूरी गीता, सामने आती है।

AI अनुवाद। मातृभाषी पाठक द्वारा समीक्षित।

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गहराई से अध्ययन करें

शब्द-दर-शब्द

tataḥततः
तब
śvetair hayairश्वेतैः हयैः
सफ़ेद घोड़ों से
yukteयुक्ते
जुते हुए
mahati syandaneमहति स्यन्दने
विशाल रथ में
sthitauस्थितौ
बैठे हुए दोनों
mādhavaḥमाधवः
माधव (कृष्ण)
pāṇḍavaś caivaपाण्डवश् चैव
और पाण्डुपुत्र अर्जुन भी
divyau śaṅkhauदिव्यौ शङ्खौ
दो दिव्य शंख
pradadhmatuḥप्रदध्मतुः
दोनों ने बजाए

संस्कृत और अंग्रेज़ी शब्द-दर-शब्द अर्थों से AI अनुवाद। मातृभाषी पाठक द्वारा समीक्षित।

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टीका

Site Commentary

Of all the conches sounding across two armies, only this pair’s are called “divine” — and only here does the verse pause to note two people sharing a single chariot. Everything the Gita goes on to say happens from this one shared vantage point, and the fact that it’s shared, not solitary, matters as much as who occupies it.

Original commentary written for this site · © Amit Singh — original commentary

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पाठ

व्यक्तिगत

  • ध्यान दीजिए कि कोई कठिन अनुभव कितना अधिक सहने योग्य बन जाता है, केवल इसलिए कि आप उसे अकेले नहीं देख रहे — आप किसके साथ खड़े होकर देखते हैं, इससे बदल जाता है कि आप वास्तव में क्या देख और कह पाते हैं।

व्यावसायिक

  • किसी कठिन परियोजना में अपने साथ बैठने के लिए सही व्यक्ति चुनना — कोई सहकर्मी, कोई मार्गदर्शक — उस स्थान को बदल देता है जहाँ से आप अंततः निर्णय लेते हैं; यह स्थान सोच-समझकर चुनिए, यूँ ही नहीं।

परिवार और समाज

  • किसी के साथ एक ही भौतिक स्थान से चीज़ों को देखना — उनके पास बैठना, केवल दूर से समस्या पर बात करना नहीं — किसी कठिन बातचीत की गुणवत्ता को स्वयं शब्दों से भी अधिक बदल देता है।

AI अनुवाद। मातृभाषी पाठक द्वारा समीक्षित।

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