संस्कृत
सङ्करो नरकायैव कुलघ्नानां कुलस्य च । पतन्ति पितरो ह्येषां लुप्तपिण्डोदकक्रियाः ॥
saṅkaro narakāyaiva kulaghnānāṃ kulasya ca patanti pitaro hy eṣāṃ luptapiṇḍodakakriyāḥ
अनुवाद
कुल का नाश करने वालों को और स्वयं कुल को भी यह संकर नरक में ही ले जाता है, क्योंकि पिण्ड और जल-अर्पण की क्रियाओं से वंचित होकर इनके पितर गिर जाते हैं।
संस्कृत से AI अनुवाद, ए. बेसेंट (सार्वजनिक डोमेन) की सहायता से। मातृभाषी पाठक द्वारा समीक्षित।
व्याख्या
तर्क का अगला परिणाम सामाजिक नहीं, बल्कि कर्मकांड से जुड़ा है: श्राद्ध-कर्मों में पितरों को दिए जाने वाले पिंड और जल (पिंड और उदक) कुल की निरंतरता पर निर्भर करते हैं, इसलिए कुल के विनाश को अपने ही दिवंगतों को भूखा रखने के रूप में बताया गया है। यह दावा पूरी तरह एक विशेष कर्मकांडी विश्वदृष्टि में निहित है, और श्लोक 41 की सामाजिक परिणामों की शृंखला को एक कदम और आगे ले जाता है।
AI अनुवाद। मातृभाषी पाठक द्वारा समीक्षित।
गहराई से अध्ययन करें
शब्द-दर-शब्द
- saṅkaroसङ्करो
- यह वर्णसंकर
- narakāyaivaनरकायैव
- नरक का ही कारण बनता है
- kula-ghnānāṃकुल-घ्नानां
- कुल का नाश करने वालों के लिए
- kulasya caकुलस्य च
- और कुल के लिए भी
- patantiपतन्ति
- गिर जाते हैं
- pitaro hy eṣāṃपितरो ह्य् एषां
- इनके पितर
- lupta-piṇḍodaka-kriyāḥलुप्त-पिण्डोदक-क्रियाः
- पिण्ड और जल-तर्पण की क्रियाओं से वंचित
संस्कृत और अंग्रेज़ी शब्द-दर-शब्द अर्थों से AI अनुवाद। मातृभाषी पाठक द्वारा समीक्षित।
टीका
Site Commentary
Track the scope across this stretch of verses, not just the intensity: family customs (40), social order (41), and now — with this verse — the fate of ancestors already dead, who depend on rites the living owe them. Each step doesn’t just argue harder, it widens who’s harmed, reaching backward to people who can’t defend themselves in the argument at all.
Original commentary written for this site · © Amit Singh — original commentary
अवधारणाएँ
इस श्लोक को अपनाएँ
पाठ
व्यक्तिगत
- जब आप कोई कठिन निर्णय तौल रहे हों, तो जाँच लें कि क्या आपने उसकी पूरी पहुँच पर विचार किया है — केवल उन लोगों पर नहीं जो सीधे आपके सामने हैं, बल्कि उन पर भी जो दूर हैं और जिनका इसमें दाँव आसानी से अनदेखा रह जाता है। कौन प्रभावित होता है, इस बारे में अपनी दृष्टि को व्यापक करने से अक्सर निर्णय का वज़न बदल जाता है।
व्यावसायिक
- किसी निर्णय को अंतिम रूप देने से पहले, उसके प्रभाव को फैलते हुए घेरों में आँकें — पहले तुरंत जुड़ी टीम, फिर आगे की टीमें, फिर वे निर्भरताएँ जिनका कमरे में कोई प्रतिनिधि नहीं है। पूरी कीमत अक्सर तब तक दिखाई नहीं देती जब तक आप जान-बूझकर दायरा न बढ़ाएँ।
परिवार और समाज
- जब परिवार का कोई निर्णय तय-सा लगे, तो जाँच लें कि क्या आपने बाहरी किनारों पर उन सभी लोगों पर विचार किया है जिन्हें यह छूता है — कोई बुज़ुर्ग होता संबंधी, कोई ऐसा व्यक्ति जो वहाँ मौजूद नहीं है — न कि केवल उन लोगों पर जिन्हें यह सबसे स्पष्ट रूप से और तुरंत प्रभावित करता है।
AI अनुवाद। मातृभाषी पाठक द्वारा समीक्षित।
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