संस्कृत
तत्रापश्यत्स्थितान्पार्थः पितॄनथ पितामहान् । आचार्यान्मातुलान्भ्रातॄन्पुत्रान्पौत्रान्सखींस्तथा ॥
tatrāpaśyat sthitān pārthaḥ pitṝn atha pitāmahān ācāryān mātulān bhrātṝn putrān pautrān sakhīṃs tathā
अनुवाद
वहाँ पार्थ ने खड़े हुए पिताओं, पितामहों, आचार्यों, मामाओं, भाइयों, पुत्रों, पौत्रों और मित्रों को भी देखा।
संस्कृत से AI अनुवाद, ए. बेसेंट (सार्वजनिक डोमेन) की सहायता से। मातृभाषी पाठक द्वारा समीक्षित।
व्याख्या
यह वही रणभूमि है जिसका निरीक्षण दुर्योधन ने श्लोक 3–11 में किया था, पर यहाँ उसका वर्गीकरण पूरी तरह बदल गया है: जहाँ दुर्योधन ने योद्धाओं को उनके पद और युद्ध-कौशल के आधार पर गिनाया था, वहीं अर्जुन ठीक उन्हीं लोगों को देखकर केवल संबंध देखते हैं — चाचा-ताऊ, पितामह, गुरु, भाई, पुत्र। यही इस अध्याय का केंद्रीय मोड़ है, एक ही सूची को दूसरी तरह से फिर से कहना, और श्लोक 27 इसी दृष्टि को एक साथ दोनों सेनाओं तक फैला देगा।
AI अनुवाद। मातृभाषी पाठक द्वारा समीक्षित।
गहराई से अध्ययन करें
शब्द-दर-शब्द
- tatrāpaśyatतत्रापश्यत्
- वहाँ उसने देखा
- sthitānस्थितान्
- खड़े हुए
- pārthaḥपार्थः
- पार्थ — अर्जुन
- pitṝnपितॄन्
- पिताओं को
- athaअथ
- और
- pitāmahānपितामहान्
- पितामहों को
- ācāryānआचार्यान्
- आचार्यों को
- mātulānमातुलान्
- मामाओं को
- bhrātṝnभ्रातॄन्
- भाइयों को
- putrānपुत्रान्
- पुत्रों को
- pautrānपौत्रान्
- पौत्रों को
- sakhīṃsसखींस्
- मित्रों को
- tathāतथा
- तथा
संस्कृत और अंग्रेज़ी शब्द-दर-शब्द अर्थों से AI अनुवाद। मातृभाषी पाठक द्वारा समीक्षित।
टीका
Site Commentary
The list moves in a deliberate arc — elders first (uncles, grandfathers), then teachers, then peers and descendants (cousins, sons, grandsons) — tracing an entire generational structure rather than naming individuals at random. Arjuna isn’t seeing scattered relatives; he’s seeing a whole lineage, old and young at once, standing in a single line of battle.
Original commentary written for this site · © Amit Singh — original commentary
अवधारणाएँ
इस श्लोक को अपनाएँ
पाठ
व्यक्तिगत
- जब कोई कठोर सत्य आपके लिए वास्तविक बन जाए, तो ध्यान दें कि वह एक अकेले तथ्य के रूप में आता है या एक साथ पूरी संरचना के रूप में — जो कुछ दाँव पर है, उसका केवल एक टुकड़ा नहीं, बल्कि उसका पूरा स्वरूप पहचान लेना ही अक्सर वह चीज़ होती है जो सचमुच आपके कर्म करने का ढंग बदल देती है।
व्यावसायिक
- जब कोई निर्णय पूरी टीम को प्रभावित करे, तो उसे उसी तरह देखने का प्रयास करें जिस तरह यह श्लोक युद्धभूमि को प्रस्तुत करता है — नामों की एक सपाट सूची के रूप में नहीं, बल्कि विभिन्न स्तरों पर फैले संबंधों की एक संरचना के रूप में — ताकि आपसे ऊपर और नीचे जो लोग वास्तव में उसका प्रभाव झेलते हैं, वे आपकी दृष्टि से छूट न जाएँ।
परिवार और समाज
- जब कोई संघर्ष आपके विस्तृत परिवार तक पहुँचे, तो उसे केवल दो लोगों के बीच का विवाद मानने के बजाय उसमें शामिल पूरी पीढ़ीगत संरचना को देखने का प्रयास करें — बड़ों, बराबर वालों और अगली पीढ़ी, सबको एक साथ।
AI अनुवाद। मातृभाषी पाठक द्वारा समीक्षित।
स्वयं से पूछें
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