1.40

संस्कृत

कुलक्षये प्रणश्यन्ति कुलधर्माः सनातनाः । धर्मे नष्टे कुलं कृत्स्नमधर्मोऽभिभवत्युत ॥

kulakṣaye praṇaśyanti kuladharmāḥ sanātanāḥ dharme naṣṭe kulaṃ kṛtsnam adharmo'bhibhavaty uta

अनुवाद

कुल का नाश होने पर सनातन कुलधर्म नष्ट हो जाते हैं, और धर्म के नष्ट होने पर अधर्म पूरे कुल को दबा लेता है।

संस्कृत से AI अनुवाद, ए. बेसेंट (सार्वजनिक डोमेन) की सहायता से। मातृभाषी पाठक द्वारा समीक्षित।

अनुवाद की समस्या बताएँ

व्याख्या

अर्जुन यहाँ सामाजिक परिणामों पर आधारित एक तर्क आरम्भ करते हैं, जो पहले दिए जा चुके व्यक्तिगत और नैतिक तर्कों से अलग है: स्वयं मृत्युओं के अतिरिक्त, किसी कुल का विनाश उसके विरासत में मिले धर्म को भी नष्ट कर देता है — उसकी रीतियाँ, उसके संस्कार, वे संरचनाएँ जो उसे एक साथ बाँधे रखती हैं — और इससे बने रिक्त स्थान को अराजकता भर देती है। पहले के तर्कों के विपरीत, इस तर्क का उत्तर पूरी गीता में कहीं भी सीधे नहीं दिया गया है; अध्याय 2 में कृष्ण का उत्तर आत्मा के तत्त्वज्ञान और युद्ध करने के कर्तव्य को संबोधित करता है, परन्तु कुल और सामाजिक व्यवस्था के बारे में इस विशेष दावे पर दोबारा नहीं लौटता।

AI अनुवाद। मातृभाषी पाठक द्वारा समीक्षित।

अनुवाद की समस्या बताएँ

गहराई से अध्ययन करें

शब्द-दर-शब्द

kula-kṣayeकुल-क्षये
कुल का नाश होने पर
praṇaśyantiप्रणश्यन्ति
नष्ट हो जाते हैं
kula-dharmāḥकुल-धर्माः
कुल के परम्परागत धर्म
sanātanāḥसनातनाः
सनातन
dharme naṣṭeधर्मे नष्टे
धर्म के नष्ट होने पर
kulaṃ kṛtsnamकुलं कृत्स्नं
समस्त कुल को
adharmo'bhibhavaty utaअधर्मोऽभिभवत्य् उत
अधर्म भी दबा लेता है

संस्कृत और अंग्रेज़ी शब्द-दर-शब्द अर्थों से AI अनुवाद। मातृभाषी पाठक द्वारा समीक्षित।

अनुवाद की समस्या बताएँ

टीका

Site Commentary

Notice the specific theory of dharma this verse assumes: something structurally dependent on family continuity, which perishes when the family does. Later in the Gita, dharma gets relocated to something closer to an individual’s own inherent nature — svadharma — which doesn’t depend on lineage at all. The word carries two different senses across the text, and this verse is using the more fragile one.

Original commentary written for this site · © Amit Singh — original commentary

अवधारणाएँ

इस श्लोक को अपनाएँ

पाठ

व्यक्तिगत

  • जब कोई ढाँचा जिस पर आप स्थिरता के लिए निर्भर हैं — कोई पारिवारिक परंपरा, कोई दिनचर्या — खतरे में लगे, तो स्वयं से पूछिए कि जिस गहरे मूल्य की वह रक्षा करता है, क्या वह सचमुच उसी विशेष ढाँचे से बँधा है, या किसी दूसरे रूप में भी बचा रह सकता है। हर मूल्य उतना नाज़ुक नहीं होता जितना उसका वर्तमान पात्र।

व्यावसायिक

  • जब कोई प्रक्रिया या टीम-संरचना, जिसने हमेशा आपके मानकों को बनाए रखा है, खतरे में हो, तो मानक को उस विशेष संरचना से अलग करके देखें जो उसे वहन कर रही है — हो सकता है कि वर्तमान संरचना पुनर्गठन में न बचे, पर मानक फिर भी बचा रह सके।

परिवार और समाज

  • यदि लगे कि कोई पारिवारिक परंपरा समाप्त हो रही है, तो पूछिए कि वह वास्तव में किस मूल्य की रक्षा कर रही थी, और क्या उस मूल्य को बचे रहने के लिए ठीक उसी रूप की आवश्यकता है — जिन बातों की आपको परवाह है, उनमें से कुछ उस विशेष ढाँचे से भी अधिक समय तक टिकती हैं जिसने उन्हें पहली बार वहन किया था।

AI अनुवाद। मातृभाषी पाठक द्वारा समीक्षित।

अनुवाद की समस्या बताएँ

स्वयं से पूछें

इस श्लोक को पढ़ने से आगे ले जाने के कुछ तरीके। टिक और नोट इसी ब्राउज़र में रहते हैं।

इस श्लोक पर चिंतन करें

    ← 1.39अध्याय 1 · 47 में से 401.41 →