संस्कृत
काश्यश्च परमेष्वासः शिखण्डी च महारथः । धृष्टद्युम्नो विराटश्च सात्यकिश्चापराजितः ॥
kāśyaś ca parameṣvāsaḥ śikhaṇḍī ca mahārathaḥ dhṛṣṭadyumno virāṭaś ca sātyakiś cāparājitaḥ
अनुवाद
श्रेष्ठ धनुर्धर काशिराज, महारथी शिखण्डी, धृष्टद्युम्न, विराट और अपराजित सात्यकि।
संस्कृत से AI अनुवाद, ए. बेसेंट (सार्वजनिक डोमेन) की सहायता से। मातृभाषी पाठक द्वारा समीक्षित।
व्याख्या
पाण्डव पक्ष के सहयोगी सेनापति भी अपने-अपने शंख बजाते हैं। इनमें धृष्टद्युम्न भी है — द्रोण से शिक्षा पाया वही सेनापति, जिसकी ओर दुर्योधन ने श्लोक 3 में बेचैनी के साथ संकेत किया था। उसका शंख अब उसी तुमुल नाद का हिस्सा है, जिसके बारे में श्लोक 19 में कहा जाएगा कि उसने कौरव पक्ष के हृदय विदीर्ण कर दिए।
AI अनुवाद। मातृभाषी पाठक द्वारा समीक्षित।
गहराई से अध्ययन करें
शब्द-दर-शब्द
- kāśyaś caकाश्यश् च
- और काशीराज
- parameṣvāsaḥपरमेष्वासः
- श्रेष्ठ धनुर्धर
- śikhaṇḍī caशिखण्डी च
- और शिखण्डी
- mahārathaḥमहारथः
- महारथी
- dhṛṣṭadyumnoधृष्टद्युंनो
- धृष्टद्युम्न
- virāṭaś caविराटश् च
- और विराट
- sātyakiśसात्यकिश्
- सात्यकि
- cāparājitaḥचापराजितः
- और अपराजित
संस्कृत और अंग्रेज़ी शब्द-दर-शब्द अर्थों से AI अनुवाद। मातृभाषी पाठक द्वारा समीक्षित।
टीका
Site Commentary
What was a quiet, private unease in verse 3 — Duryodhana noting his own teacher’s former student now commanding the other side — is, three verses later, literally the loudest sound on the field. A worry once voiced only as a private aside doesn’t stay contained; eventually it shows up as fact, at full volume.
Original commentary written for this site · © Amit Singh — original commentary
इस श्लोक को अपनाएँ
पाठ
व्यक्तिगत
- जो हल्की-सी चिंता आपने शुरू में ही मन में पहचान ली थी, वह अक्सर बाद में एक कहीं अधिक ज़ोरदार और अकाट्य तथ्य के रूप में फिर सामने आती है — किसी चिंता के उस शुरुआती, शांत रूप को वहम समझकर टालें नहीं।
व्यावसायिक
- योजना-बैठक में धीमे स्वर में उठाया गया और टाल दिया गया जोखिम अक्सर बाद में एक बड़ी, अकाट्य घटना बनकर फिर उभरता है — जब वह पहली बार धीमे स्वर में उठाया जाए, तभी उसे गंभीरता से लें।
परिवार और समाज
- किसी रिश्ते में शुरुआत में धीरे से कहा गया छोटा-सा तनाव अक्सर बाद में कहीं बड़े टकराव के रूप में फिर उभरता है — जब तक वह शांत है, तभी उसे सुलझा लें।
AI अनुवाद। मातृभाषी पाठक द्वारा समीक्षित।
स्वयं से पूछें
इस श्लोक को पढ़ने से आगे ले जाने के कुछ तरीके। टिक और नोट इसी ब्राउज़र में रहते हैं।