1.43

संस्कृत

दोषैरेतैः कुलघ्नानां वर्णसङ्करकारकैः । उत्साद्यन्ते जातिधर्माः कुलधर्माश्च शाश्वताः ॥

doṣair etaiḥ kulaghnānāṃ varṇasaṅkarakārakaiḥ utsādyante jātidharmāḥ kuladharmāś ca śāśvatāḥ

अनुवाद

कुल का नाश करने वालों के इन दोषों से, जो वर्णसंकर उत्पन्न करते हैं, सनातन जातिधर्म और कुलधर्म नष्ट हो जाते हैं।

संस्कृत से AI अनुवाद, ए. बेसेंट (सार्वजनिक डोमेन) की सहायता से। मातृभाषी पाठक द्वारा समीक्षित।

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व्याख्या

यह सारांश-पंक्ति श्लोक 40–42 की शृंखला को एक ही कथन में फिर से रखती है: कुल का विनाश उन रीतियों को नष्ट कर देता है जिन्हें यहाँ सनातन कहा गया है। अर्जुन श्लोक 44 में अपना निष्कर्ष सीधे कहने से पहले उसे यथासंभव सबसे प्रबल रूप देने की ओर बढ़ रहे हैं।

AI अनुवाद। मातृभाषी पाठक द्वारा समीक्षित।

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शब्द-दर-शब्द

doṣair etaiḥदोषैः एतैः
इन दोषों से
kula-ghnānāṃकुल-घ्नानां
कुल का नाश करने वालों के
varṇa-saṅkara-kārakaiḥवर्ण-सङ्कर-कारकैः
वर्णसंकर उत्पन्न करने वाले
utsādyanteउत्साद्यन्ते
नष्ट हो जाते हैं
jāti-dharmāḥजाति-धर्माः
जाति-धर्म
kula-dharmāś caकुल-धर्माश् च
और कुल-धर्म
śāśvatāḥशाश्वताः
सनातन

संस्कृत और अंग्रेज़ी शब्द-दर-शब्द अर्थों से AI अनुवाद। मातृभाषी पाठक द्वारा समीक्षित।

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टीका

Site Commentary

This verse adds no new content at all — it exists purely to compress verses 40 through 42 into one restated premise, immediately before verse 44 delivers the verdict. It’s a structural device: real arguments often need a moment that summarizes rather than advances, a beat that consolidates before the conclusion lands.

Original commentary written for this site · © Amit Singh — original commentary

अवधारणाएँ

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पाठ

व्यक्तिगत

  • जब आप किसी कठिन निर्णय की ओर बढ़ रहे हों, तो उस पर अमल करने से पहले स्वयं को एक स्पष्ट क्षण दें, जिसमें आप अब तक की अपनी पूरी सोच-विचार का सार निकाल सकें। सब कुछ समेटने के लिए रुकना समय की बर्बादी नहीं है, यही रुकना अंतिम निष्कर्ष को ठोस बनाता है।

व्यावसायिक

  • अंतिम सिफ़ारिश प्रस्तुत करने से पहले एक स्पष्ट सारांश वाली स्लाइड या अनुच्छेद जोड़ें, जो आपकी पिछली सभी बातों को एक ही आधार-वाक्य के रूप में दोहराए। यह भराव नहीं है। इसी से आपके श्रोता बात का सिरा खोने के बजाय आपके साथ-साथ निष्कर्ष तक पहुँच पाते हैं।

परिवार और समाज

  • परिवार को कोई कठिन निर्णय सुनाने से पहले, एक बार अपने तर्क का सार एक ही साँस में ज़ोर से कहकर देखें। निष्कर्ष सामने आने से पहले उन्हें (और स्वयं को) सब कुछ समेटने का वह क्षण देने से निष्कर्ष को सचमुच सुन पाना आसान हो जाता है।

AI अनुवाद। मातृभाषी पाठक द्वारा समीक्षित।

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