1.27

संस्कृत

श्वशुरान्सुहृदश्चैव सेनयोरुभयोरपि । तान्समीक्ष्य स कौन्तेयः सर्वान्बन्धूनवस्थितान् ॥

śvaśurān suhṛdaś caiva senayor ubhayor api tān samīkṣya sa kaunteyaḥ sarvān bandhūn avasthitān

अनुवाद

दोनों ही सेनाओं में ससुरों और हितैषियों को भी देखा। वहाँ खड़े उन सब बन्धुओं को देखकर कुन्तीपुत्र अर्जुन…

संस्कृत से AI अनुवाद, ए. बेसेंट (सार्वजनिक डोमेन) की सहायता से। मातृभाषी पाठक द्वारा समीक्षित।

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व्याख्या

श्लोक 26 की सूची को समाप्त करने वाला निर्णायक विवरण यह है: ये संबंध “दोनों सेनाओं में” हैं — ऐसा नहीं है कि एक ओर अर्जुन का परिवार है और दूसरी ओर अजनबी; यह एक ही विस्तृत परिवार है जो एक ही मैदान में आमने-सामने खड़ा है। श्लोक 28 की प्रतिक्रिया इसी तथ्य का उत्तर है।

AI अनुवाद। मातृभाषी पाठक द्वारा समीक्षित।

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गहराई से अध्ययन करें

शब्द-दर-शब्द

śvaśurānश्वशुरान्
ससुरों को
suhṛdaś caivaसुहृदश् चैव
और मित्रों को भी
senayor ubhayor apiसेनयोः उभयोः अपि
दोनों ही सेनाओं में
tān samīkṣyaतान् समीक्ष्य
उन्हें देखकर
sa kaunteyaḥस कौन्तेयः
वह कुन्तीपुत्र
sarvān bandhūnसर्वान् बन्धून्
सभी बन्धुओं को
avasthitānअवस्थितान्
खड़े हुए

संस्कृत और अंग्रेज़ी शब्द-दर-शब्द अर्थों से AI अनुवाद। मातृभाषी पाठक द्वारा समीक्षित।

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टीका

Site Commentary

Three verses in, and Arjuna still hasn’t said a word — verses 26 and 27 are pure seeing, accumulating relatives with no reaction expressed yet. The poem holds him in silent recognition before verse 28 lets him speak, as if the weight has to fully register before language can even begin.

Original commentary written for this site · © Amit Singh — original commentary

अवधारणाएँ

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पाठ

व्यक्तिगत

  • जब कोई कठिन बात आपके सामने स्पष्ट होने लगे, तो प्रतिक्रिया देने से पहले स्वयं को पूरी तस्वीर ग्रहण करने दें — पहचान लेने का अर्थ यह नहीं कि तुरंत कोई प्रतिक्रिया हो, और उस अंतराल को जल्दबाज़ी में पार कर जाने का अर्थ हो सकता है कि आपने जो वास्तव में देखा, उसके केवल एक अंश पर प्रतिक्रिया दी।

व्यावसायिक

  • काम पर कोई बुरी खबर मिलने पर जवाब देने से पहले स्वयं को एक क्षण दें, ताकि आप उसके पूरे विस्तार को ठीक से समझ सकें — तुरंत प्रतिक्रिया देने की प्रवृत्ति का अर्थ अक्सर यह होता है कि आप पूरी तस्वीर पर नहीं, बल्कि अपनी पहली छाप पर प्रतिक्रिया दे रहे हैं।

परिवार और समाज

  • जब आपको एहसास हो कि कोई पारिवारिक विवाद आपकी पहली सोच से बड़ा है, तो तुरंत कुछ कह देने की इच्छा को रोकें — पहले एक क्षण उस पूरी पहचान के साथ ठहरें, जैसे यह श्लोक अर्जुन के बोलने से पहले उसे मौन में थामे रखता है।

AI अनुवाद। मातृभाषी पाठक द्वारा समीक्षित।

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