संस्कृत
सीदन्ति मम गात्राणि मुखं च परिशुष्यति । वेपथुश्च शरीरे मे रोमहर्षश्च जायते ॥
sīdanti mama gātrāṇi mukhaṃ ca pariśuṣyati vepathuś ca śarīre me romaharṣaś ca jāyate
अनुवाद
मेरे अंग शिथिल हो रहे हैं और मुख सूखा जा रहा है; मेरे शरीर में कँपकँपी हो रही है और रोंगटे खड़े हो रहे हैं।
संस्कृत से AI अनुवाद, ए. बेसेंट (सार्वजनिक डोमेन) की सहायता से। मातृभाषी पाठक द्वारा समीक्षित।
व्याख्या
गीता में अर्जुन की व्याकुलता का वर्णन अमूर्त नहीं, बल्कि आश्चर्यजनक रूप से शारीरिक है — शिथिल होते अंग, सूखता मुख, काँपता शरीर, खड़े होते रोंगटे। यह तीव्र शारीरिक आघात के एक सटीक विवरण जैसा लगता है, और उल्लेखनीय है कि यह कितनी चिकित्सकीय बारीकी से बताता है कि एक योद्धा का शरीर ठीक उसी क्षण उसका साथ छोड़ रहा है जब उससे युद्ध करने की अपेक्षा है।
AI अनुवाद। मातृभाषी पाठक द्वारा समीक्षित।
गहराई से अध्ययन करें
शब्द-दर-शब्द
- sīdantiसीदन्ति
- शिथिल हो रहे हैं
- mama gātrāṇiमम गात्राणि
- मेरे अंग
- mukhaṃ ca pariśuṣyatiमुखं च परिशुष्यति
- और मुख सूख रहा है
- vepathuś caवेपथुश् च
- और कंपन
- śarīre meशरीरे मे
- मेरे शरीर में
- roma-harṣaś caरोम-हर्षश् च
- और रोमांच
- jāyateजायते
- हो रहा है
संस्कृत और अंग्रेज़ी शब्द-दर-शब्द अर्थों से AI अनुवाद। मातृभाषी पाठक द्वारा समीक्षित।
टीका
Site Commentary
No word for fear or grief actually appears in this verse — only symptoms: failing limbs, a dry mouth, trembling, hair on end. The distress is rendered entirely as body, and the reader has to infer the feeling the same way a person often first meets their own — not as a named emotion but as a physical fact that shows up before its name does.
Original commentary written for this site · © Amit Singh — original commentary
अवधारणाएँ
इस श्लोक को अपनाएँ
पाठ
व्यक्तिगत
- जब आप देखें कि आप जो महसूस कर रहे हैं, उसे नाम दे पाने से पहले ही आपका शरीर प्रतिक्रिया करने लगा है — सीने में जकड़न, मुँह सूखना, बेचैनी — तो उस संकेत पर भरोसा करें, भले ही अभी आपके पास उसके लिए कोई शब्द न हो; भावना अक्सर तब भी सच्ची होती है जब आप उसे शब्दों में व्यक्त नहीं कर पाते।
व्यावसायिक
- यदि किसी कठिन बैठक या निर्णय से पहले आपको तनाव के शारीरिक लक्षण दिखें — तेज़ धड़कन, खिंचाव — तो उन्हें गंभीरता से लेने के लिए तब तक प्रतीक्षा न करें जब तक आप ठीक-ठीक भावना को नाम न दे सकें; शरीर अक्सर दाँव पर लगी बात को आपके सचेत विश्लेषण के पहुँचने से पहले ही जान लेता है।
परिवार और समाज
- यदि आपका कोई करीबी कुछ गड़बड़ होने की बात कहने से पहले ही शारीरिक रूप से ठीक न दिखे, तो जो आप देख रहे हैं उस पर भरोसा करें — व्यथा अक्सर शरीर में बहुत पहले दिख जाती है, इससे काफ़ी पहले कि व्यक्ति अपनी भावना को कोई नाम दे सके।
AI अनुवाद। मातृभाषी पाठक द्वारा समीक्षित।
स्वयं से पूछें
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