संस्कृत
शुभाशुभफलैरेवं मोक्ष्यसे कर्मबन्धनैः । संन्यासयोगयुक्तात्मा विमुक्तो मामुपैष्यसि ॥
śubhāśubhaphalair evaṃ mokṣyase karmabandhanaiḥ sannyāsayogayuktātmā vimukto mām upaiṣyasi
अनुवाद
इस प्रकार तुम शुभ और अशुभ फल देने वाले कर्म के बन्धनों से मुक्त हो जाओगे। संन्यास के योग से युक्त चित्त वाले होकर, मुक्त होकर तुम मुझे प्राप्त करोगे।
संस्कृत से AI अनुवाद, ए. बेसेंट (सार्वजनिक डोमेन) की सहायता से। मातृभाषी पाठक द्वारा समीक्षित।
व्याख्या
श्लोक 27 में अभी वर्णित संपूर्ण अर्पण का प्रतिज्ञात फल यह है: कर्म के बंधनों से मुक्ति, चाहे फल शुभ होता या अशुभ (शुभाशुभफलैः)। यह मुक्ति उसके द्वारा मिलती है जिसे यहाँ विशेष रूप से संन्यासयोग, यानी संन्यास का योग, कहा गया है। यहाँ ठीक-ठीक समझ लेना उचित है कि त्यागा क्या जाता है — कर्म नहीं, जिसे श्लोक 27 ने अभी संपूर्ण बना दिया है, बल्कि उसके परिणाम पर स्वामित्व का दावा। यह वही भेद है जो अध्याय 3 में किया गया है: एक ओर संन्यास, जो मात्र कर्म से विरत रहना है, और दूसरी ओर आसक्ति के बिना कर्म करने का कहीं कठिन अनुशासन। संन्यासयोग — संन्यास एक योग के रूप में, अर्थात् आंतरिक — ठीक-ठीक गीता 5.2–गीता 5.6 की पुनर्परिभाषा है: कर्म को छोड़ना नहीं (श्लोक 27 इसका निषेध करता है), बल्कि उसके फल पर अपना दावा छोड़ना।
AI अनुवाद। मातृभाषी पाठक द्वारा समीक्षित।
गहराई से अध्ययन करें
शब्द-दर-शब्द
- śubhāśubhaphalair evaṃशुभाशुभफलैः एवं
- शुभ और अशुभ फल देने वाले, इस प्रकार (śubha-aśubha-phalaiḥ + evam)
- mokṣyase karmabandhanaiḥमोक्ष्यसे कर्मबन्धनैः
- तुम कर्म के बन्धनों से मुक्त हो जाओगे (mokṣyase + karma-bandhanaiḥ)
- sannyāsayogayuktātmāसंन्यासयोगयुक्तात्मा
- संन्यासयोग से युक्त आत्मा वाले (saṃnyāsa-yoga-yukta-ātmā)
- vimukto mām upaiṣyasiविमुक्तो मां उपैष्यसि
- मुक्त होकर तुम मुझे प्राप्त करोगे (vimuktaḥ + mām + upaiṣyasi)
संस्कृत और अंग्रेज़ी शब्द-दर-शब्द अर्थों से AI अनुवाद। मातृभाषी पाठक द्वारा समीक्षित।
टीका
Site Commentary
The release named here is symmetrical — śubhāśubha-phalaiḥ, “from both good and evil fruits” — not a filter that keeps the pleasant outcomes and discards only the unwanted ones. That’s a harder ask than it first appears: most people would happily keep the reward of good results and only ask to be freed from the bad ones; this verse offers no such selective exit.
Original commentary written for this site · © Amit Singh — original commentary
अवधारणाएँ
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पाठ
व्यक्तिगत
- जब आप परिणामों के प्रति आसक्ति से मुक्ति चाहते हैं, तो ध्यान दें कि आम तौर पर आप केवल उन्हीं परिणामों से छुटकारा चाहते हैं जो आपको चोट पहुँचाते हैं — सच्ची मुक्ति का अर्थ है अच्छे परिणामों पर से भी अपनी पकड़ ढीली करना, न कि केवल बुरे परिणामों से स्वयं को बचाए रखना।
व्यावसायिक
- अपनी योग्यता को केवल उन परिणामों से न मापें जो आपको अच्छा दिखाते हैं, और जो परिणाम ऐसा नहीं करते, उन्हें नज़रअंदाज़ भी न करें — अपने मूल्य का स्थिर बोध दोनों से समान रूप से अनासक्त होना चाहिए, वरना वह स्थिर है ही नहीं।
परिवार और समाज
- जब आप अपने मन की शांति को इस बात से बाँध देते हैं कि कोई संबंध या घटना किस तरह सामने आती है, तो ध्यान दें कि संभवतः आप केवल बुरे मोड़ों से ही छुटकारा चाहते हैं — सच्ची समता अच्छे मोड़ों पर भी उतनी ही लागू होनी चाहिए।
AI अनुवाद। मातृभाषी पाठक द्वारा समीक्षित।
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