संस्कृत
न च मत्स्थानि भूतानि पश्य मे योगमैश्वरम् । भूतभृन्न च भूतस्थो ममात्मा भूतभावनः ॥
na ca matsthāni bhūtāni paśya me yogam aiśvaram bhūtabhṛn na ca bhūtastho mamātmā bhūtabhāvanaḥ
अनुवाद
प्राणी मुझमें स्थित नहीं हैं; मेरे ईश्वरीय योग को देखो। मेरी आत्मा प्राणियों का भरण-पोषण करती है और उन्हें उत्पन्न करती है, फिर भी वह प्राणियों में स्थित नहीं है।
संस्कृत से AI अनुवाद, ए. बेसेंट (सार्वजनिक डोमेन) की सहायता से। मातृभाषी पाठक द्वारा समीक्षित।
व्याख्या
श्लोक 4 से सीधे आगे बढ़ते हुए कृष्ण इस विरोधाभास को फिर से कहते हैं और फिर उसे एक नाम देते हैं: सबमें व्याप्त स्रोत और उससे व्याप्त वस्तुओं के बीच का यह पकड़ में न आने वाला संबंध स्वयं “ऐश्वर योग” (योगम् ऐश्वरम्) है — रहस्यमय प्रभुत्व। यह इस शब्द का एक अलग अर्थ है, उस अनुशासित कर्म वाले अर्थ से भिन्न जो अध्याय 2 के कर्मयोग में है। वे प्राणियों के आधार हैं और उनके निमित्त कारण भी, फिर भी वे उनमें समाए हुए नहीं हैं। यह साधारण कार्य-कारण संबंध की अपेक्षा अस्तित्व के वेदान्तिक आधार के अधिक निकट है। योग ऐश्वर — “प्रभुत्व का योग” — इस काव्य में योग का तीसरा अर्थ है: न अनुशासन और न समता, बल्कि अपनी ही अभिव्यक्ति की शर्तों पर सार्वभौम सामर्थ्य। इसी को गीता 11 प्रत्यक्ष देखना चाहता है।
AI अनुवाद। मातृभाषी पाठक द्वारा समीक्षित।
गहराई से अध्ययन करें
शब्द-दर-शब्द
- na ca matsthāni bhūtāniन च मत्स्थानि भूतानि
- और फिर भी प्राणी मुझमें स्थित नहीं हैं (na + ca + mat-sthāni + bhūtāni)
- paśya me yogam aiśvaramपश्य मे योगं ऐश्वरं
- मेरे ऐश्वर्यमय योग को देखो (paśya + me + yogam + aiśvaram)
- bhūtabhṛn na ca bhūtasthoभूतभृन् न च भूतस्थो
- प्राणियों का धारण-पोषण करने वाला, फिर भी उनमें स्थित नहीं (bhūta-bhṛt + na + ca + bhūta-sthaḥ)
- mamātmā bhūtabhāvanaḥममात्मा भूतभावनः
- मेरी आत्मा प्राणियों को उत्पन्न करने वाली है (mama + ātmā + bhūta-bhāvanaḥ)
संस्कृत और अंग्रेज़ी शब्द-दर-शब्द अर्थों से AI अनुवाद। मातृभाषी पाठक द्वारा समीक्षित।
टीका
Site Commentary
When the paradox from verse 4 doesn’t resolve on a second telling, Krishna doesn’t offer a third argument — he says “behold” (paśya), switching from explanation to direct pointing. That’s a tell: some contradictions aren’t puzzles waiting on the right argument, they’re descriptions of something that has to be seen rather than reasoned into consistency, and one more clever explanation would miss what the verse is actually asking of the listener.
Original commentary written for this site · © Amit Singh — original commentary
अवधारणाएँ
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पाठ
व्यक्तिगत
- जब आप किसी बात को स्वयं को तीन अलग-अलग तरीकों से समझा चुके हों और फिर भी वह किसी साफ़-सुथरे तार्किक रूप में न सुलझे, तो सोचिए कि शायद आप तर्क के सहारे उस चीज़ तक पहुँचने की कोशिश कर रहे हैं जो केवल प्रत्यक्ष अनुभव से ही स्पष्ट होती है — तर्क करना छोड़ें और इसके बजाय जाकर देखें।
व्यावसायिक
- जब कोई तकनीकी समझौता हितधारकों के सामने साफ़ ढंग से समझाए जाने में बार-बार अड़चन डालता रहे, तो कभी-कभी समाधान कोई बेहतर तर्क नहीं होता — समाधान यह होता है कि तर्क की एक और स्लाइड के बजाय आप उन्हें सिस्टम को काम करते हुए दिखाएँ, किसी डेमो या डैशबोर्ड के ज़रिए।
परिवार और समाज
- यदि आप किसी असहमति से समझा-बुझाकर निकलने की कोशिश करते रहते हैं और आपकी बात बार-बार असर नहीं करती, तो बहस करने के बजाय दिखाने का प्रयास करें — समझ कभी-कभी किसी चीज़ को साथ मिलकर देखने से आती है, मनाने की एक और कोशिश से नहीं।
AI अनुवाद। मातृभाषी पाठक द्वारा समीक्षित।
स्वयं से पूछें
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