9.6

संस्कृत

यथाऽऽकाशस्थितो नित्यं वायुः सर्वत्रगो महान् । तथा सर्वाणि भूतानि मत्स्थानीत्युपधारय ॥

yathākāśasthito nityaṃ vāyuḥ sarvatrago mahān tathā sarvāṇi bhūtāni matsthānīty upadhāraya

अनुवाद

जैसे सर्वत्र विचरने वाली महान वायु सदा आकाश में स्थित रहती है, वैसे ही सारे प्राणी मुझमें स्थित हैं — ऐसा जानो।

संस्कृत से AI अनुवाद, ए. बेसेंट (सार्वजनिक डोमेन) की सहायता से। मातृभाषी पाठक द्वारा समीक्षित।

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व्याख्या

आकाश में स्थित वायु की उपमा श्लोक 4-5 के अमूर्त कथन के लिए इस अध्याय का सबसे स्पष्ट दृष्टांत है। यह उस तीन श्लोकों की इकाई को पूरा करती है जो अध्याय के मूल तत्त्वदर्शन का आरंभ करती है, जिसके बाद श्लोक 7 पूरी तरह से एक अलग स्तर पर चला जाता है — स्थिर सत्ता से चक्रीय सृष्टि-विज्ञान की ओर। वायु आकाश के भीतर चलती है, उसे न हटाती है, न घटाती है — प्राणियों और कृष्ण का संबंध ठीक यही है। यह वही “विलय के बिना व्याप्ति” है जो गीता 7.7 में मोतियों के धागे की उपमा में है, अब एक अधिक सूक्ष्म, स्थान-संबंधी छवि के रूप में।

AI अनुवाद। मातृभाषी पाठक द्वारा समीक्षित।

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गहराई से अध्ययन करें

शब्द-दर-शब्द

yathākāśasthito nityaṃ vāyuḥयथाकाशस्थितो नित्यं वायुः
जैसे आकाश में सदा स्थित वायु (yathā + ākāśa-sthitaḥ + nityaṃ + vāyuḥ)
sarvatrago mahānसर्वत्रगो महान्
सर्वत्र विचरने वाला, महान (sarvatra-gaḥ + mahān)
tathā sarvāṇi bhūtāniतथा सर्वाणि भूतानि
वैसे ही सभी प्राणी (tathā + sarvāṇi + bhūtāni)
matsthānīty upadhārayaमत्स्थानीत्य् उपधारय
मुझमें स्थित हैं — ऐसा जानो (mat-sthāni + iti + upadhāraya)

संस्कृत और अंग्रेज़ी शब्द-दर-शब्द अर्थों से AI अनुवाद। मातृभाषी पाठक द्वारा समीक्षित।

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टीका

Site Commentary

For three verses running, Krishna has been making claims no one can check against direct experience — pervading unmanifestly, rooted-yet-not-rooted, sovereign yoga. Verse 6 is the first moment the teaching reaches for something everyone already knows firsthand: wind moving through open sky. The abstract claim doesn’t get simpler, but it finally gets a handle a listener can hold, which is a different kind of help than further precision would have been.

Original commentary written for this site · © Amit Singh — original commentary

अवधारणाएँ

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पाठ

व्यक्तिगत

  • जब आप किसी अमूर्त अंतर्दृष्टि को मन में उलटते-पलटते अटक जाएँ और बात आगे न बढ़े, तो कोई ऐसा साधारण अनुभव खोजें जिसे आप पहले से स्वयं जानते हों और जिसका स्वरूप वैसा ही हो — एक परिचित बिंब वह काम कर सकता है जो अधिक सटीक शब्द नहीं कर पाते।

व्यावसायिक

  • जब कोई हितधारक किसी अमूर्त आर्किटेक्चर-संबंधी दावे को ग्रहण न कर पा रहा हो, चाहे आप उसे कितनी ही सटीकता से दोहराएँ, तो किसी ऐसी चीज़ से भौतिक उपमा लें जिसे वह पहले से समझता हो — उलझन का समाधान कभी-कभी बेहतर परिभाषा नहीं, बल्कि बेहतर बिंब होता है।

परिवार और समाज

  • जब आप किसी ऐसे व्यक्ति को कोई आंतरिक अवस्था समझाने का प्रयास कर रहे हों जिसने उसे कभी अनुभव नहीं किया, तो और अधिक सटीक शब्दों की ओर जाने के बजाय कोई ऐसा साझा, साधारण अनुभव खोजें जिसका स्वरूप वैसा ही हो — सही बिंब वह बात पहुँचा सकता है जो अकेली सटीकता नहीं पहुँचा सकती।

AI अनुवाद। मातृभाषी पाठक द्वारा समीक्षित।

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