9.12

संस्कृत

मोघाशा मोघकर्माणो मोघज्ञाना विचेतसः । राक्षसीमासुरीं चैव प्रकृतिं मोहिनीं श्रिताः ॥

moghāśā moghakarmāṇo moghajñānā vicetasaḥ rākṣasīm āsurīṃ caiva prakṛtiṃ mohinīṃ śritāḥ

अनुवाद

उनकी आशाएँ व्यर्थ हैं, उनके कर्म व्यर्थ हैं और उनका ज्ञान भी व्यर्थ है। वे विवेकहीन लोग मोह में डालने वाली राक्षसी और आसुरी प्रकृति का ही आश्रय लिए रहते हैं।

संस्कृत से AI अनुवाद, ए. बेसेंट (सार्वजनिक डोमेन) की सहायता से। मातृभाषी पाठक द्वारा समीक्षित।

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व्याख्या

यह श्लोक तीन “व्यर्थ” (मोघ-) समासों को एक के बाद एक रखता है — व्यर्थ आशा, व्यर्थ कर्म, व्यर्थ ज्ञान — उन लोगों का वर्णन करने के लिए जो कृष्ण के मानवीय रूप को ही पूरा सत्य समझ बैठते हैं। यह दोहराव बात को तीव्र करने वाला एक अलंकारिक उपकरण है, जिसे अंग्रेज़ी अनुवाद केवल आंशिक रूप से ही बचा पाता है; संस्कृत में लगातार तीन शब्दों पर मोघ- की लयबद्ध चोट श्लोक के तर्क का हिस्सा है, सजावट नहीं। तीन मोघ- समास फ़ैसला सुना देते हैं: ऐसे लोग जो आशा करते हैं, जो करते हैं और जो जानते हैं, वह सब निष्फल हो जाता है, क्योंकि उन्होंने माया से बुने हुए उस आसुरी स्वभाव की शरण ले रखी है, जिसका वर्णन अध्याय 16 विस्तार से करेगा।

AI अनुवाद। मातृभाषी पाठक द्वारा समीक्षित।

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गहराई से अध्ययन करें

शब्द-दर-शब्द

moghāśā moghakarmāṇoमोघाशा मोघकर्माणो
व्यर्थ आशाओं वाले, व्यर्थ कर्मों वाले (mogha-āśāḥ + mogha-karmāṇaḥ)
moghajñānā vicetasaḥमोघज्ञाना विचेतसः
व्यर्थ ज्ञान वाले, विवेकहीन (mogha-jñānāḥ + vicetasaḥ)
rākṣasīm āsurīṃ caivaराक्षसीं आसुरीं चैव
राक्षसी और आसुरी ही (rākṣasīm + āsurīm + ca + eva)
prakṛtiṃ mohinīṃ śritāḥप्रकृतिं मोहिनीं श्रिताः
मोहित करने वाली प्रकृति का आश्रय लिए हुए (prakṛtim + mohinīm + śritāḥ)

संस्कृत और अंग्रेज़ी शब्द-दर-शब्द अर्थों से AI अनुवाद। मातृभाषी पाठक द्वारा समीक्षित।

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टीका

Site Commentary

Verse 12 characterizes its subject entirely by absence — three counts of “empty,” no single positive verb. It’s a portrait built from what’s missing, and the effect is that these people barely appear as agents at all in their own description. Three verses later, the mahātmānaḥ get the opposite treatment: a growing list of active verbs, glorifying, striving, prostrating. Failure gets named by what isn’t there; devotion gets named by what is being actively done.

Original commentary written for this site · © Amit Singh — original commentary

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पाठ

व्यक्तिगत

  • यदि आप किसी बुरी आदत को बदलने की कोशिश कर रहे हैं, तो देखें कि कहीं आप उसे केवल अभाव के रूप में तो परिभाषित नहीं कर रहे, जैसे ध्यान न लगा पाना या काम पूरा न करना, और ऐसा कोई ठोस कर्म नहीं बता रहे जिसके पक्ष में आप हैं। केवल नकारात्मक बातों से बना लक्ष्य शायद ही कभी अभ्यास बन पाता है; उसे केवल खाली जगह नहीं, क्रियाएँ दीजिए।

व्यावसायिक

  • किसी संघर्ष कर रही टीम की समस्या पहचानते समय ऐसी रिपोर्ट से बचें जो केवल यह गिनाए कि क्या कमी है, न ज़िम्मेदारी, न स्पष्टता, न काम को पूरा करना। हर कमी के साथ वह ठोस कदम जोड़िए जो उसे भरेगा, वरना यह निदान किसी योजना में नहीं बदलेगा।

परिवार और समाज

  • यदि आप किसी रिश्ते में यह बता रहे हैं कि क्या गलत है, तो किसी कमी की हर शिकायत के साथ वह विशेष कदम भी बताइए जो आप उसकी जगह सचमुच चाहते हैं, क्योंकि कोई व्यक्ति क्या नहीं कर रहा, इसकी सूची उसे शायद ही कभी यह बताती है कि उसे अलग ढंग से क्या करना चाहिए।

AI अनुवाद। मातृभाषी पाठक द्वारा समीक्षित।

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