संस्कृत
मयाऽध्यक्षेण प्रकृतिः सूयते सचराचरम् । हेतुनाऽनेन कौन्तेय जगद्विपरिवर्तते ॥
mayādhyakṣeṇa prakṛtiḥ sūyate sacarācaram hetunānena kaunteya jagad viparivartate
अनुवाद
हे कौन्तेय, मेरी अध्यक्षता में प्रकृति चर और अचर सहित सारे जगत को उत्पन्न करती है। इसी कारण यह जगत घूमता रहता है।
संस्कृत से AI अनुवाद, ए. बेसेंट (सार्वजनिक डोमेन) की सहायता से। मातृभाषी पाठक द्वारा समीक्षित।
व्याख्या
यह श्लोक 7 से आरम्भ हुई सृष्टि-विज्ञान की इकाई को पूरा करता है: अब प्रकृति के बारे में स्पष्ट रूप से कहा गया है कि वह “मेरी अध्यक्षता में” (मयाध्यक्षेण) कार्य करती है। कृष्ण के लिए ब्रह्माण्ड का घूमना बिना किसी प्रयास के होता है, क्योंकि करने का काम प्रकृति को सौंपा गया है और वे केवल उसकी देखरेख करते हैं। इससे श्लोक 4-6 में उठा अन्तर्यामिता और परात्परता का तनाव सुलझता नहीं, बल्कि और तीखा हो जाता है। मया अध्यक्षेण — “मेरी अध्यक्षता में” — सारा करना प्रकृति को सौंपता है और केवल अध्यक्षता कृष्ण को। यही विभाजन गीता 13.29 व्यक्ति के लिए करता है: प्रकृति कर्म करती है, आत्मा साक्षी रहता है।
AI अनुवाद। मातृभाषी पाठक द्वारा समीक्षित।
गहराई से अध्ययन करें
शब्द-दर-शब्द
- mayādhyakṣeṇa prakṛtiḥ sūyateमयाध्यक्षेण प्रकृतिः सूयते
- मेरी अध्यक्षता में प्रकृति उत्पन्न करती है (mayā + adhyakṣeṇa + prakṛtiḥ + sūyate)
- sacarācaramसचराचरं
- चर और अचर सहित सबको (sa-cara-acaram)
- hetunānena kaunteyaहेतुनानेन कौन्तेय
- इसी कारण से, हे कुन्तीपुत्र (hetunā + anena + kaunteya)
- jagad viparivartateजगद् विपरिवर्तते
- जगत् घूमता रहता है (jagat + viparivartate)
संस्कृत और अंग्रेज़ी शब्द-दर-शब्द अर्थों से AI अनुवाद। मातृभाषी पाठक द्वारा समीक्षित।
टीका
Site Commentary
Adhyakṣa — “supervisor,” “overseer” — is a governance word, not a craftsman’s word. Krishna doesn’t describe running the universe as making or shaping it directly; he describes it as delegated oversight, nature doing the actual work under his supervision. The largest possible system in the text is explicitly not built on hands-on control — it runs on delegation, with oversight sufficient to keep it turning.
Original commentary written for this site · © Amit Singh — original commentary
अवधारणाएँ
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पाठ
व्यक्तिगत
- जिस लक्ष्य की ज़िम्मेदारी आपकी है, उसके हर हिस्से को आपको स्वयं पूरा करना ज़रूरी नहीं है — अच्छी तरह देखरेख करना और असली काम करने के लिए सौंपी गई व्यवस्था पर भरोसा रखना, किसी परिणाम के प्रति ज़िम्मेदार होने का एक पूरा तरीक़ा हो सकता है।
व्यावसायिक
- आपके अधीन सबसे बड़ी व्यवस्थाएँ देखरेख और स्पष्ट रूप से काम सौंपने के आधार पर चलनी चाहिए, इस पर नहीं कि हर निर्णय में आपका हाथ लगे — यदि किसी व्यवस्था को बढ़ाने का अर्थ यह हो कि आपको स्वयं और अधिक करना पड़े, तो सुधार की ज़रूरत काम सौंपने के ढाँचे में है, काम के बोझ में नहीं।
परिवार और समाज
- आप परिवार की किसी स्थिति की सच्ची ज़िम्मेदारी उठा सकते हैं, बिना उसके हर ब्योरे को स्वयं सँभाले — इसमें जुड़े दूसरे लोगों पर अपना हिस्सा निभाने का भरोसा रखना, और साथ ही देखरेख के स्तर पर सजग बने रहना, फिर भी सच्ची परवाह है, उपेक्षा नहीं।
AI अनुवाद। मातृभाषी पाठक द्वारा समीक्षित।
स्वयं से पूछें
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