9.19

संस्कृत

तपाम्यहमहं वर्षं निगृह्णाम्युत्सृजामि च । अमृतं चैव मृत्युश्च सदसच्चाहमर्जुन ॥

tapāmy aham ahaṃ varṣaṃ nigṛhṇāmy utsṛjāmi ca amṛtaṃ caiva mṛtyuś ca sad asac cāham arjuna

अनुवाद

हे अर्जुन, मैं ताप देता हूँ; मैं वर्षा को रोकता हूँ और बरसाता भी हूँ। अमृत भी मैं हूँ और मृत्यु भी, सत्ता और असत्ता भी मैं ही हूँ।

संस्कृत से AI अनुवाद, ए. बेसेंट (सार्वजनिक डोमेन) की सहायता से। मातृभाषी पाठक द्वारा समीक्षित।

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व्याख्या

यह श्लोक पहचान के चार श्लोकों के क्रम को सबसे मूलभूत विपरीत युग्मों पर अपना दावा करते हुए समाप्त करता है — ताप और वर्षा, अमरता और मृत्यु, सत् और असत् (अस्तित्व और अनस्तित्व)। इस क्रम को “सत् और असत्” पर समाप्त करना एक सोचा-समझा चरम-उत्कर्ष है: श्लोक 16-18 में हर विशेष वस्तु पर दावा कर लेने के बाद, यह श्लोक उन श्रेणियों पर दावा करता है जो स्वयं विशिष्टता के मूल में हैं। सद् असच् च अहम् — “मैं सत् भी हूँ और असत् भी” — उस सत्/असत् भेद से आगे निकल जाता है जिसे गीता 2.16 ने इतनी स्पष्टता से खींचा था। पहचान का यह क्रम केवल सामग्री पर ही नहीं, बल्कि पूरे ढाँचे पर दावा करते हुए समाप्त होता है।

AI अनुवाद। मातृभाषी पाठक द्वारा समीक्षित।

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गहराई से अध्ययन करें

शब्द-दर-शब्द

tapāmy aham ahaṃ varṣaṃतपांय् अहं अहं वर्षं
मैं ताप देता हूँ; मैं ही वर्षा हूँ (tapāmi + aham + aham + varṣam)
nigṛhṇāmy utsṛjāmi caनिगृह्णांय् उत्सृजामि च
रोकता हूँ और बरसाता हूँ (nigṛhṇāmi + utsṛjāmi + ca)
amṛtaṃ caiva mṛtyuś caअमृतं चैव मृत्युश् च
अमृत भी और मृत्यु भी (amṛtam + ca + eva + mṛtyuḥ + ca)
sad asac cāham arjunaसद् असच् चाहं अर्जुन
सत् और असत् भी मैं हूँ, हे अर्जुन (sat + asat + ca + aham + arjuna)

संस्कृत और अंग्रेज़ी शब्द-दर-शब्द अर्थों से AI अनुवाद। मातृभाषी पाठक द्वारा समीक्षित।

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टीका

Site Commentary

Having claimed particular pairs — heat and rain, life and death — the verse doesn’t stop at more particulars; it reaches for the category that contains particularity itself, sat and asat, being and non-being. It’s the rhetorical equivalent of exhausting a list by naming the shelf it sits on, rather than adding one more item to it.

Original commentary written for this site · © Amit Singh — original commentary

अवधारणाएँ

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पाठ

व्यक्तिगत

  • जब आप स्वयं को किसी बात का विश्वास दिलाने की कोशिश कर रहे हों, तो बस समर्थन में और-और उदाहरण न जोड़ते रहें — वह एक मूल श्रेणी खोजें जिसमें वे सब आते हैं; उसका एक बार नाम ले लेना प्रश्न को किसी भी अगले उदाहरण से कहीं जल्दी सुलझा देता है।

व्यावसायिक

  • किसी प्रस्ताव या तर्क में, प्रमाण के रूप में अलग-अलग मामलों की अंतहीन सूची बनाने से बचें — इसके बजाय उनके पीछे के सामान्य सिद्धांत को पहचानें और उसका नाम लें; श्रेणी का नाम लेना उस बहस को समाप्त कर देता है जिसे और उदाहरण केवल लंबा खींचते।

परिवार और समाज

  • जब आप किसी प्रियजन को आश्वस्त कर रहे हों, तो एक के बाद एक विशिष्ट वादे गिनाते न रहें — स्वयं उस मूल प्रतिबद्धता का नाम लें; एक स्पष्ट श्रेणी दर्जन भर छोटे आश्वासनों से कहीं अधिक दृढ़ता से मन में उतरती है।

AI अनुवाद। मातृभाषी पाठक द्वारा समीक्षित।

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