संस्कृत
येऽप्यन्यदेवताभक्ता यजन्ते श्रद्धयाऽन्विताः । तेऽपि मामेव कौन्तेय यजन्त्यविधिपूर्वकम् ॥
ye 'py anyadevatābhaktā yajante śraddhayānvitāḥ te 'pi mām eva kaunteya yajanty avidhipūrvakam
अनुवाद
हे कौन्तेय, जो भक्त श्रद्धा से युक्त होकर अन्य देवताओं की पूजा करते हैं, वे भी मेरी ही पूजा करते हैं, किन्तु विधि के विपरीत।
संस्कृत से AI अनुवाद, ए. बेसेंट (सार्वजनिक डोमेन) की सहायता से। मातृभाषी पाठक द्वारा समीक्षित।
व्याख्या
यहाँ उस साधना के प्रति उल्लेखनीय उदारता दिखाई गई है जिसका ग्रंथ औपचारिक रूप से समर्थन नहीं करता: अन्य देवताओं के उपासक भी, बशर्ते उनकी श्रद्धा सच्ची हो (श्रद्धयान्विताः), कृष्ण तक पहुँचते हैं — बस “उचित विधि के बिना” (अविधिपूर्वकम्)। यह दावा केवल समन्वयवाद के लिए नहीं किया गया है; श्लोक 24 तुरंत इसका तात्त्विक कारण बताता है। उपासना वास्तव में कभी कृष्ण से चूकती नहीं; चूकती है तो केवल उपासक की अपनी यह समझ कि वह क्या कर रहा है। अविधिपूर्वकम् — “[सही] विधि से नहीं” — यह स्वीकार कर लेता है कि विधि ठीक नहीं है, और साथ ही पुष्टि करता है कि श्रद्धा फिर भी जोड़ती है, क्योंकि (गीता 9.24) किसी भी यज्ञ को ग्रहण करने वाला कोई और नहीं है। इसकी तुलना अधिक कठोर गीता 7.20–गीता 7.23 से करें।
AI अनुवाद। मातृभाषी पाठक द्वारा समीक्षित।
गहराई से अध्ययन करें
शब्द-दर-शब्द
- ye 'py anyadevatābhaktāये ऽप्य् अन्यदेवताभक्ता
- जो अन्य देवताओं के भक्त भी (ye + api + anya-devatā-bhaktāḥ)
- yajante śraddhayānvitāḥयजन्ते श्रद्धयान्विताः
- श्रद्धा से युक्त होकर पूजा करते हैं (yajante + śraddhayā-anvitāḥ)
- te 'pi mām eva kaunteyaते ऽपि मां एव कौन्तेय
- वे भी मुझे ही पूजते हैं, हे कौन्तेय (te + api + mām + eva + kaunteya)
- yajanty avidhipūrvakamयजन्त्य् अविधिपूर्वकं
- पर विधि के बिना पूजते हैं (yajanti + avidhi-pūrvakam)
संस्कृत और अंग्रेज़ी शब्द-दर-शब्द अर्थों से AI अनुवाद। मातृभाषी पाठक द्वारा समीक्षित।
टीका
Site Commentary
Notice the specific charge: not that these worshippers reach nothing, and not that their devotion is false, but that it proceeds avidhi-pūrvakam — without the proper method. That’s a procedural complaint, not a metaphysical one, and it quietly does more generous work than a flat inclusion would: it credits the faith while still preserving that a more direct path exists.
Original commentary written for this site · © Amit Singh — original commentary
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पाठ
व्यक्तिगत
- जब कोई व्यक्ति आपके किसी मूल्य तक आपसे बहुत भिन्न रास्ते से पहुँचता है, तो उसकी पद्धति की आलोचना करने से पहले उसके मार्ग की निष्ठा को स्वीकार करें — एक ही मंज़िल के लिए एक जैसी विधि ज़रूरी नहीं होती।
व्यावसायिक
- जब कोई सहकर्मी किसी साझा समस्या को ऐसे तरीके से हल करता है जिसे आप नहीं चुनते, तो उसे "सही तरीका नहीं" कहकर खारिज करने से पहले जाँच लें कि क्या उसका तरीका वास्तव में असली लक्ष्य तक पहुँचता है — प्रक्रिया पर आपत्ति गलत परिणाम के समान नहीं है।
परिवार और समाज
- यदि आपका कोई निकट व्यक्ति किसी अपरिचित ढंग से परवाह जताता है, तो सोचिए कि वह फिर भी आप तक पहुँच रही हो सकती है — एक अपरिचित रास्ते से, गलत रास्ते से नहीं।
AI अनुवाद। मातृभाषी पाठक द्वारा समीक्षित।
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