5.2

संस्कृत

संन्यासः कर्मयोगश्च निःश्रेयसकरावुभौ । तयोस्तु कर्मसंन्यासात्कर्मयोगो विशिष्यते ॥

saṃnyāsaḥ karmayogaś ca niḥśreyasakarāv ubhau tayos tu karmasaṃnyāsāt karmayogo viśiṣyate

अनुवाद

संन्यास और कर्मयोग, दोनों ही परम कल्याण देने वाले हैं। लेकिन उन दोनों में कर्म के संन्यास से कर्मयोग श्रेष्ठ है।

संस्कृत से AI अनुवाद, ए. बेसेंट (सार्वजनिक डोमेन) की सहायता से। मातृभाषी पाठक द्वारा समीक्षित।

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व्याख्या

श्लोक 1 का कृष्ण द्वारा दिया गया सीधा उत्तर: दोनों मार्ग एक ही परम कल्याण तक ले जाते हैं, परन्तु कर्मयोग को श्रेष्ठ घोषित किया गया है। अध्याय के शेष भाग को यह क्रम केवल घोषित नहीं करना है, बल्कि उसे सिद्ध करना है — श्लोक 6 बताएगा कि ऐसा क्यों है (योग के अनुशासन के बिना किया गया कोरा संन्यास निभाए रखना कठिन है), और श्लोक 4-5 इस क्रम को सापेक्ष बना देंगे, यह आग्रह करते हुए कि जो कोई भी किसी एक मार्ग में सचमुच स्थित है, वह दोनों का फल पहले ही पा लेता है। इसलिए यह श्लोक अध्याय की मूल स्थापना को सामने रखता है, अभी उसका पूरा तर्क नहीं। यह वरीयता व्यावहारिक है, तात्त्विक नहीं: लक्ष्य एक ही है, पर एक मार्ग पर चलना अधिक सुरक्षित है। गीता 5.6 साफ़-साफ़ कहता है कि योग के बिना संन्यास “प्राप्त करना कठिन” है।

AI अनुवाद। मातृभाषी पाठक द्वारा समीक्षित।

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गहराई से अध्ययन करें

शब्द-दर-शब्द

saṃnyāsaḥ karmayogaś caसंन्यासः कर्मयोगश् च
संन्यास और कर्मयोग (saṃnyāsaḥ + karma-yogaḥ + ca)
niḥśreyasakarāv ubhauनिःश्रेयसकराव् उभौ
दोनों ही परम कल्याण देने वाले हैं (niḥśreyasa-karau + ubhau)
tayos tu karmasaṃnyāsātतयोस् तु कर्मसंन्यासात्
किंतु उन दोनों में, कर्मसंन्यास की अपेक्षा (tayoḥ + tu + karma-saṃnyāsāt)
karmayogo viśiṣyateकर्मयोगो विशिष्यते
कर्मयोग श्रेष्ठ है (karma-yogaḥ + viśiṣyate)

संस्कृत और अंग्रेज़ी शब्द-दर-शब्द अर्थों से AI अनुवाद। मातृभाषी पाठक द्वारा समीक्षित।

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टीका

Site Commentary

Krishna does give Arjuna the ranking he explicitly asked for — karma yoga is stated as better. But three verses later he insists both paths reach the identical place, which quietly demotes this verse’s “better” from a claim about ultimate outcome to a claim about ease of practice. Reading verse 2 in isolation risks treating it as the chapter’s final metaphysical word, when it’s really a provisional, practical recommendation the chapter itself will go on to qualify.

Original commentary written for this site · © Amit Singh — original commentary

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पाठ

व्यक्तिगत

  • जब आप किसी को बताएँ कि दो अच्छे विकल्पों में से आप कौन-सा चुनेंगे, तो यह स्पष्ट कर दें कि आप सुविधा के बारे में एक व्यावहारिक सुझाव दे रहे हैं, न कि उस विकल्प पर कोई निर्णय सुना रहे हैं जिसे आपने नहीं चुना — ये दोनों अलग-अलग बातें हैं, और इन्हें एक कर देने से सलाह फ़ैसले की तरह सुनाई देने लगती है।

व्यावसायिक

  • जब आप एक तकनीकी तरीके को दूसरे से बेहतर बताएँ, तो स्पष्ट करें कि "बेहतर" का अर्थ है उसे भरोसेमंद ढंग से लागू करना आसान है, न कि यह कि दूसरा तरीका बेकार है — इन दोनों को मिला देने से एक चल सकने वाले दूसरे विकल्प को छोड़ देने की झूठी जल्दबाज़ी पैदा होती है।

परिवार और समाज

  • जब आप बताएँ कि किसी और की स्थिति में आप कौन-सा चुनाव करते, तो उसे अपनी व्यावहारिक समझ के रूप में रखें, न कि उनकी सहज प्रवृत्ति पर दिए गए किसी निर्णय के रूप में — यही भेद सलाह को चुपचाप किए गए फ़ैसले में बदलने से रोकता है।

AI अनुवाद। मातृभाषी पाठक द्वारा समीक्षित।

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