संस्कृत
साङ्ख्ययोगौ पृथग्बालाः प्रवदन्ति न पण्डिताः । एकमप्यास्थितः सम्यगुभयोर्विन्दते फलम् ॥
sāṅkhyayogau pṛthag bālāḥ pravadanti na paṇḍitāḥ ekam apy āsthitaḥ samyag ubhayor vindate phalam
अनुवाद
सांख्य और योग को अलग-अलग बालक बताते हैं, पण्डित नहीं। जो इनमें से एक में भी भली-भाँति स्थित हो जाता है, वह दोनों का फल पा लेता है।
संस्कृत से AI अनुवाद, ए. बेसेंट (सार्वजनिक डोमेन) की सहायता से। मातृभाषी पाठक द्वारा समीक्षित।
व्याख्या
श्लोक 3 में संन्यास को नए सिरे से परिभाषित करने के बाद, कृष्ण अध्याय की एकता वाली मूल स्थापना को सीधे-सीधे कह देते हैं: सांख्य (ज्ञान का मार्ग) और योग (कर्म का मार्ग) को अलग-अलग मानना अपरिपक्व लोगों का लक्षण है, ज्ञानियों का नहीं। जो कोई भी इनमें से किसी एक में सच्चे अर्थ में स्थित है, वह दोनों का फल पाता है — और यह अभी दी गई नई परिभाषा से सीधे निकलता है, क्योंकि सच्चे संन्यास में वह अनासक्ति पहले से ही समाई हुई है जिसकी सच्चे योग को भी आवश्यकता होती है। यह तर्क है, केवल कथन नहीं। मार्गों को अलग करने वालों के लिए शब्द है बाल, “बच्चा” — मूर्ख नहीं, बल्कि वह जो अभी बढ़कर उस दृष्टि तक नहीं पहुँचा है। अध्याय के पृष्ठ पर दिया गया चित्र दोनों स्तंभों को ठीक इसीलिए अगल-बगल रखता है, ताकि दिखाया जा सके कि वे एक ही स्थान पर जाकर समाप्त होते हैं (गीता 5.5)।
AI अनुवाद। मातृभाषी पाठक द्वारा समीक्षित।
गहराई से अध्ययन करें
शब्द-दर-शब्द
- sāṅkhyayogau pṛthag bālāḥसाङ्ख्ययोगौ पृथग् बालाः
- नासमझ लोग सांख्य और योग को अलग-अलग बताते हैं (sāṅkhya-yogau + pṛthak + bālāḥ)
- pravadanti na paṇḍitāḥप्रवदन्ति न पण्डिताः
- ज्ञानी नहीं (pravadanti + na + paṇḍitāḥ)
- ekam apy āsthitaḥ samyagएकं अप्य् आस्थितः संयग्
- किसी एक में भी भली-भाँति स्थित व्यक्ति (ekam + api + āsthitaḥ + samyak)
- ubhayor vindate phalamउभयोः विन्दते फलं
- दोनों का फल पाता है (ubhayoḥ + vindate + phalam)
संस्कृत और अंग्रेज़ी शब्द-दर-शब्द अर्थों से AI अनुवाद। मातृभाषी पाठक द्वारा समीक्षित।
टीका
Site Commentary
Krishna’s chosen contrast for anyone who treats Sankhya and Yoga as different paths isn’t “some scholars disagree” — it’s bālāḥ against paṇḍitāḥ, children against the wise. That’s an unusually blunt way to characterize a position he disagrees with, framing the error as immaturity rather than a defensible alternate reading. The bluntness is doing rhetorical work: it forecloses the possibility that this is a reasonable difference of opinion before the argument for unity has even been given.
Original commentary written for this site · © Amit Singh — original commentary
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पाठ
व्यक्तिगत
- जब आप पाएँ कि आप एक ही लक्ष्य की ओर ले जाने वाले दो मार्गों को मूल रूप से एक-दूसरे का विरोधी मान रहे हैं, तो सोचिए कि यह टकराव का भाव शायद इस बात से अधिक जुड़ा हो कि आपने चुनाव को किस रूप में रखा है, न कि उन दोनों के बीच किसी वास्तविक असंगति से।
व्यावसायिक
- जब इंजीनियरों के दो खेमे इस बात पर अड़े हों कि उनके तरीके एक-दूसरे से मेल नहीं खा सकते, तो जाँचें कि असहमति वास्तविक है या किसी ऐसे ढाँचे का लक्षण है जिसे ठीक से परखा नहीं गया — कभी-कभी दोनों खेमे पहले से ही वही परिणाम दे रहे होते हैं जिसके लिए वे लड़ रहे हैं।
परिवार और समाज
- यदि आप और परिवार का कोई सदस्य इस बात पर अड़े हों कि एक साझा लक्ष्य तक पहुँचने के आपके बिल्कुल अलग तरीकों में से दोनों सही नहीं हो सकते, तो सोचिए कि यह दिखने वाला टकराव सार से अधिक ढाँचे का मामला हो सकता है — वास्तविक असहमति मान लेने से पहले इसे जाँच लें।
AI अनुवाद। मातृभाषी पाठक द्वारा समीक्षित।
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