5.8

संस्कृत

नैव किञ्चित्करोमीति युक्तो मन्येत तत्त्ववित् । पश्यन्शृण्वन्स्पृशञ्जिघ्रन्नश्नन्गच्छन्स्वपन्श्वसन् ॥

naiva kiñcit karomīti yukto manyeta tattvavit paśyan śṛṇvan spṛśañ jighrann aśnan gacchan svapan śvasan

अनुवाद

योग में युक्त और तत्त्व को जानने वाला पुरुष देखते, सुनते, छूते, सूँघते, खाते, चलते, सोते और साँस लेते हुए भी यही माने कि "मैं कुछ भी नहीं करता।"

संस्कृत से AI अनुवाद, ए. बेसेंट (सार्वजनिक डोमेन) की सहायता से। मातृभाषी पाठक द्वारा समीक्षित।

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व्याख्या

वस्तुओं के तत्त्व को जानने वाला व्यक्ति शरीर का हर साधारण काम करते हुए भी यह दृढ़ धारणा रखता है कि “मैं कुछ नहीं करता”। इस दावे का अर्थ तभी बनता है जब हम श्लोक 14 के आगे आने वाले इस कथन को ध्यान में रखें कि आत्मा वास्तव में कभी कर्ता होती ही नहीं; इन्द्रियाँ और शरीर अपने विषयों के बीच स्वयं क्रिया करते हैं (श्लोक 9 इसे स्पष्ट रूप से कहता है), आत्मा नहीं। रोज़मर्रा के आठ कामों की यह सूची जान-बूझकर साधारण रखी गई है: यह किसी असाधारण अवस्था के बारे में दावा नहीं है, बल्कि इस बारे में है कि पूरी तरह साधारण देहधारी जीवन को किस दृष्टि से देखा जाए। ये आठों क्रियाएँ वर्तमान कृदंत हैं — देखते हुए, खाते हुए — इसलिए “मैं कुछ नहीं करता” की धारणा क्रिया के दौरान रखी जाती है, उसके स्थान पर नहीं। यह गीता 4.18 का “कर्म में अकर्म” ही है, जो उत्तम पुरुष में कहा गया है।

AI अनुवाद। मातृभाषी पाठक द्वारा समीक्षित।

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गहराई से अध्ययन करें

शब्द-दर-शब्द

naiva kiñcit karomītiनैव किञ्चित् करोमीति
'मैं कुछ भी नहीं करता' (na + eva + kiñcit + karomi + iti)
yukto manyeta tattvavitयुक्तो मन्येत तत्त्ववित्
योगयुक्त तत्त्ववेत्ता ऐसा माने (yuktaḥ + manyeta + tattva-vit)
paśyan śṛṇvan spṛśañ jighrannपश्यन् शृण्वन् स्पृशञ् जिघ्रन्न्
देखते, सुनते, छूते, सूँघते हुए (paśyan + śṛṇvan + spṛśan + jighran)
aśnan gacchan svapan śvasanअश्नन् गच्छन् स्वपन् श्वसन्
खाते, चलते, सोते, साँस लेते हुए (aśnan + gacchan + svapan + śvasan)

संस्कृत और अंग्रेज़ी शब्द-दर-शब्द अर्थों से AI अनुवाद। मातृभाषी पाठक द्वारा समीक्षित।

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टीका

Site Commentary

The list Krishna picks — seeing, hearing, touching, smelling, eating, moving, sleeping, breathing — is aggressively unglamorous, almost daring the reader to find a dramatic exception. The point isn’t demonstrated with heroic renunciation or a hard moral choice; it’s demonstrated with breathing. Whatever this teaching is, it has to be practicable at the most banal, involuntary-feeling moments of an ordinary day, or it isn’t the teaching being described here.

Original commentary written for this site · © Amit Singh — original commentary

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पाठ

व्यक्तिगत

  • आप जो भी अभ्यास विकसित कर रहे हैं — वर्तमान में बने रहना, परिणामों से अनासक्त रहना — उसे केवल अपने बड़े निर्णयों पर ही नहीं, बल्कि अपने सबसे नीरस, यंत्रवत क्षणों पर भी परखें। जो अभ्यास केवल नाटकीय क्षणों में ही काम करता है, वह अभी सचमुच भार उठाने योग्य नहीं हुआ है।

व्यावसायिक

  • जब आप अहंकार के बिना प्रतिक्रिया देने या परिणामों से अनासक्त रहने जैसी आदत विकसित कर रहे हों, तो असली दबाव में उस पर भरोसा करने से पहले रोज़ की छोटी-मोटी बातचीत में — किसी सामान्य प्रगति-सूचना में, किसी मामूली टिप्पणी में — उसका पूर्वाभ्यास करें।

परिवार और समाज

  • ध्यान दें कि परिवार के साथ बिताए सबसे साधारण क्षणों में — किसी कार यात्रा में, रात के भोजन के बाद बर्तन धोते समय — आप कैसे उपस्थित रहते हैं, क्योंकि किसी संबंध की वास्तविक गुणवत्ता बड़े अवसरों में नहीं, बल्कि इसी साधारण ताने-बाने में बसती है।

AI अनुवाद। मातृभाषी पाठक द्वारा समीक्षित।

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