संस्कृत
शक्नोतीहैव यः सोढुं प्राक् शरीरविमोक्षणात् । कामक्रोधोद्भवं वेगं स युक्तः स सुखी नरः ॥
śaknotīhaiva yaḥ soḍhuṃ prāk śarīravimokṣaṇāt kāmakrodhodbhavaṃ vegaṃ sa yuktaḥ sa sukhī naraḥ
अनुवाद
जो मनुष्य शरीर छूटने से पहले यहीं इस लोक में काम और क्रोध से उत्पन्न होने वाले वेग को सहन कर पाता है, वही योगयुक्त है और वही सुखी है।
संस्कृत से AI अनुवाद, ए. बेसेंट (सार्वजनिक डोमेन) की सहायता से। मातृभाषी पाठक द्वारा समीक्षित।
व्याख्या
यह परीक्षा स्पष्ट रूप से समय से बँधी है — शरीर छूटने से पहले, अर्थात् जीते-जी, मृत्युशय्या पर पाई जाने वाली कोई उपलब्धि नहीं — और इसका लक्ष्य वेग है, यानी काम और क्रोध का उफान या बल, जिसे दो अलग-अलग भावनाओं के बजाय एक ही शारीरिक घटना माना गया है। उस उफान को सह पाने वाले को एक ही साँस में दोनों विशेषण मिलते हैं, युक्त और सुखी, जिससे वह दूरी मिट जाती है जो पाठक अनुशासन और आनंद के बीच मान सकता है। यह एक व्यावहारिक, लगभग चिकित्सकीय दृष्टि है — एक विशेष प्रकार के भीतरी दबाव में टिके रहना — जिसे अध्याय 6 वास्तविक विधि में बदल देगा। वेग — “उफान, आवेग” — काम और क्रोध के खिंचाव को एक लहर मानता है जिसे पार करना है, कोई पाप नहीं जिसे स्वीकार करना हो। कथन यह है कि जो उस लहर से अधिक देर टिक सकता है, वह इसी तथ्य से युक्त भी है और सुखी भी — अनुशासन और सुख एक ही उपलब्धि हैं।
AI अनुवाद। मातृभाषी पाठक द्वारा समीक्षित।
गहराई से अध्ययन करें
शब्द-दर-शब्द
- śaknotīhaiva yaḥ soḍhuṃशक्नोतीहैव यः सोढुं
- जो यहीं सहन करने में समर्थ है (śaknoti + iha + eva + yaḥ + soḍhum)
- prāk śarīravimokṣaṇātप्राक् शरीरविमोक्षणात्
- शरीर छूटने से पहले (prāk + śarīra-vimokṣaṇāt)
- kāmakrodhodbhavaṃ vegaṃकामक्रोधोद्भवं वेगं
- काम और क्रोध से उत्पन्न वेग को (kāma-krodha-udbhavam + vegam)
- sa yuktaḥ sa sukhī naraḥस युक्तः स सुखी नरः
- वही योगयुक्त है, वही सुखी मनुष्य है (saḥ + yuktaḥ + saḥ + sukhī + naraḥ)
संस्कृत और अंग्रेज़ी शब्द-दर-शब्द अर्थों से AI अनुवाद। मातृभाषी पाठक द्वारा समीक्षित।
टीका
Site Commentary
It’s worth noticing what this verse asks for and what it doesn’t: not the elimination of desire and anger’s force, but the capacity to endure (soḍhum) it while it’s happening. That’s a meaningfully different bar than the “freed from desire and anger” language the chapter reaches for a few verses later, in 26 and 28 — this verse describes the harder, earlier-stage discipline of staying steady while the surge is actually present, before it’s been dissolved altogether.
Original commentary written for this site · © Amit Singh — original commentary
अवधारणाएँ
इस श्लोक को अपनाएँ
पाठ
व्यक्तिगत
- स्वयं को अनुशासित मानने के लिए इस बात की प्रतीक्षा न करें कि आपको क्रोध या कामना का आवेग महसूस होना ही बंद हो जाए — यह श्लोक कसौटी यह रखता है कि आप उस आवेग को सह लें और उसमें बह न जाएँ। यह एक वास्तविक और पाने योग्य पड़ाव है, जो उस भावना के उठना पूरी तरह बंद होने से बहुत पहले आ जाता है।
व्यावसायिक
- भारी दबाव वाली किसी बैठक में सफलता शांत महसूस करना नहीं है — सफलता है झुंझलाहट या जल्दबाज़ी का वास्तविक उछाल महसूस करते हुए भी स्थिर बने रहना। अपनी प्रगति को इस बात से मापें कि क्या आप उस उछाल को सह सकते हैं और उसके वश में आकर कोई कदम नहीं उठाते, इस बात से नहीं कि वह उछाल आना बंद हो गया या नहीं।
परिवार और समाज
- जब किसी प्रियजन के साथ टकराव से आपके भीतर क्रोध का वास्तविक आवेग उठता है, तो तात्कालिक लक्ष्य उसे महसूस न करना नहीं है — लक्ष्य है उसे सह लेना, और उसके वश में आकर न कुछ बोलना, न कुछ करना। यह उस भावना को पूरी तरह मिटा देने से सचमुच अलग, और कहीं अधिक पहुँच में आने वाला कौशल है।
AI अनुवाद। मातृभाषी पाठक द्वारा समीक्षित।
स्वयं से पूछें
इस श्लोक को पढ़ने से आगे ले जाने के कुछ तरीके। टिक और नोट इसी ब्राउज़र में रहते हैं।