5.7

संस्कृत

योगयुक्तो विशुद्धात्मा विजितात्मा जितेन्द्रियः । सर्वभूतात्मभूतात्मा कुर्वन्नपि न लिप्यते ॥

yogayukto viśuddhātmā vijitātmā jitendriyaḥ sarvabhūtātmabhūtātmā kurvann api na lipyate

अनुवाद

जो योग से युक्त है, जिसका अन्तःकरण शुद्ध है, जिसने अपने आप को जीत लिया है और इन्द्रियों को वश में कर लिया है, और जिसकी आत्मा सब प्राणियों की आत्मा बन गई है, वह कर्म करते हुए भी उनसे लिप्त नहीं होता।

संस्कृत से AI अनुवाद, ए. बेसेंट (सार्वजनिक डोमेन) की सहायता से। मातृभाषी पाठक द्वारा समीक्षित।

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व्याख्या

संन्यास बनाम योग के प्रश्न का निपटारा करने के बाद, पाठ अब चित्रण की ओर मुड़ता है: सिद्ध कर्मयोगी वास्तव में कैसा दिखता है। यह श्लोक एक के बाद एक विशेषताएँ गिनाता है — शुद्ध हुआ आत्म, आत्म-संयम, वश में की हुई इन्द्रियाँ, सब प्राणियों की आत्मा से एकरूप हुई आत्मा — और फिर उस दावे पर पहुँचता है जो अध्याय के तर्क के लिए मायने रखता है: ऐसा व्यक्ति कर्म करता रहता है, और फिर भी उससे अछूता रहता है। अपनी आत्मा को “सब प्राणियों की” आत्मा से एक मानना यहाँ वास्तविक तात्त्विक भूमिका निभा रहा है; यह वही अद्वैत कदम है जिसे अध्याय 2 आत्मा के विषय में स्पष्ट रूप से उठाता है, और यहाँ इसे यह समझाने के लिए लागू किया गया है कि योगी के कर्म उसे क्यों नहीं बाँधते। सर्व-भूत-आत्म-भूत-आत्मा — “जिसकी आत्मा सब प्राणियों की आत्मा बन गई है” — यही कारण है कि कर्म उससे चिपकते नहीं: कोई अलग आत्मा है ही नहीं जिस पर वे जमा हो सकें। यह अध्याय 2 की आत्मा संबंधी शिक्षा है, जो यहाँ न बाँधने वाले कर्म की कार्य-प्रणाली बन गई है।

AI अनुवाद। मातृभाषी पाठक द्वारा समीक्षित।

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गहराई से अध्ययन करें

शब्द-दर-शब्द

yogayuktoयोगयुक्तो
योग से युक्त
viśuddhātmāविशुद्धात्मा
जिसका अन्तःकरण शुद्ध है
vijitātmāविजितात्मा
जिसने अपने मन को जीत लिया है
jitendriyaḥजितेन्द्रियः
जिसने इन्द्रियों को जीत लिया है
sarvabhūtātmabhūtātmāसर्वभूतात्मभूतात्मा
जिसकी आत्मा सब प्राणियों की आत्मा बन गई है
kurvann api na lipyateकुर्वन्न् अपि न लिप्यते
कर्म करते हुए भी लिप्त नहीं होता (kurvan + api + na + lipyate)

संस्कृत और अंग्रेज़ी शब्द-दर-शब्द अर्थों से AI अनुवाद। मातृभाषी पाठक द्वारा समीक्षित।

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टीका

Site Commentary

Grammatically, this verse makes you wait: five qualifications pile up — purified, self-ruled, senses controlled, identified with all beings — before the sentence finally delivers its real claim, that such a person acts and remains untouched. The syntax enacts the content. Untouched action isn’t a switch flipped by one insight; it’s a state built from several disciplines stacked on top of each other, and the sentence won’t let a reader skip ahead to the payoff without passing through all of them.

Original commentary written for this site · © Amit Singh — original commentary

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पाठ

व्यक्तिगत

  • जब आप परिणामों में डूबे बिना कर्म करने का गुण पाना चाहें, तो किसी एक युक्ति की तलाश करने से बचें — आमतौर पर यह कई अनुशासनों के साथ मिलकर काम करने से आता है (आत्म-संयम, स्वयं को परिणामों से न जोड़ना, स्थिरता), न कि किसी एक अंतर्दृष्टि से जो सब कुछ एक साथ खोल दे।

व्यावसायिक

  • जब कोई वरिष्ठ सहकर्मी किसी असफल लॉन्च या अस्वीकृत प्रस्ताव से असामान्य रूप से अविचलित दिखे, तो समझिए कि ऐसा संयम आमतौर पर किसी एक गुण से नहीं, बल्कि एक के ऊपर एक जमी कई आदतों से बनता है — इसे किसी एक तकनीक से अपना लेने की अपेक्षा न करें।

परिवार और समाज

  • यदि आपके जीवन में कोई व्यक्ति, चाहे कुछ भी हो जाए, उल्लेखनीय रूप से स्थिर दिखता है, तो यह मान लेने से बचें कि यह केवल उसका स्वभाव है — ऐसी स्थिरता आमतौर पर अभ्यास से साधी गई कई आदतों का मेल होती है, और उन आदतों को अपने मन में पहचानकर नाम देना केवल परिणाम से ईर्ष्या करने से अधिक उपयोगी है।

AI अनुवाद। मातृभाषी पाठक द्वारा समीक्षित।

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