5.14

संस्कृत

न कर्तृत्वं न कर्माणि लोकस्य सृजति प्रभुः । न कर्मफलसंयोगं स्वभावस्तु प्रवर्तते ॥

na kartṛtvaṃ na karmāṇi lokasya sṛjati prabhuḥ na karmaphalasaṃyogaṃ svabhāvas tu pravartate

अनुवाद

प्रभु संसार के लिए न कर्तापन रचते हैं, न कर्म, और न ही कर्म और फल का संयोग; यह सब तो स्वभाव ही करता है।

संस्कृत से AI अनुवाद, ए. बेसेंट (सार्वजनिक डोमेन) की सहायता से। मातृभाषी पाठक द्वारा समीक्षित।

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व्याख्या

यहाँ प्रभु शब्द अंतर्यामी प्रभु के लिए आया है, यानी प्रत्येक प्राणी के भीतर स्थित आत्मा के लिए। यह कथन तत्त्व के स्तर पर एक साफ़ विभाजन करता है: वह न कर्तापन का भाव उत्पन्न करता है, न स्वयं कर्मों को, और न ही कर्म और फल के बीच का संबंध बनाता है। यह सारा काम स्वभाव, अर्थात् व्यक्ति की अपनी अंतर्निहित प्रकृति, करता है। इस अध्याय में जहाँ भी कहा गया है कि “आप कर्ता नहीं हैं”, उन सब कथनों का दार्शनिक आधार यही है। यह मन को सांत्वना देने वाला कोई रूपक नहीं, बल्कि कार्य-कारण के बारे में एक निश्चित दावा है। यह दावा कर्तापन पूरी तरह प्रकृति के तंत्र को सौंप देता है और आत्मा को साक्षी के रूप में रहने देता है। इसी से अगले श्लोक का कठिन प्रश्न सामने आता है: यदि आत्मा कर्म नहीं करती, तो वह पाप या पुण्य से किसी भी रूप में जुड़ी हुई क्यों प्रतीत होती है। स्वभाव यहाँ वही काम करता है जो गीता 3.27 में प्रकृति के गुण करते हैं: कारण का सारा तंत्र प्रकृति के हिस्से में है, साक्षी के हिस्से में उसका कोई भी अंश नहीं। अध्याय 13 का गीता 13.29 ठीक यही बात दोहराता है।

AI अनुवाद। मातृभाषी पाठक द्वारा समीक्षित।

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गहराई से अध्ययन करें

शब्द-दर-शब्द

na kartṛtvaṃ na karmāṇiन कर्तृत्वं न कर्माणि
न कर्तापन, न कर्म (na + kartṛtvam + na + karmāṇi)
lokasya sṛjati prabhuḥलोकस्य सृजति प्रभुः
प्रभु लोक के लिए रचते हैं (lokasya + sṛjati + prabhuḥ)
na karmaphalasaṃyogaṃन कर्मफलसंयोगं
न कर्म और फल का संयोग (na + karma-phala-saṃyogam)
svabhāvas tu pravartateस्वभावस् तु प्रवर्तते
किन्तु स्वभाव ही प्रवृत्त होता है (svabhāvaḥ + tu + pravartate)

संस्कृत और अंग्रेज़ी शब्द-दर-शब्द अर्थों से AI अनुवाद। मातृभाषी पाठक द्वारा समीक्षित।

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टीका

Site Commentary

Notice the specificity of the denial: not a vague claim that “the self does nothing,” but three distinct things itemized and withheld one by one — the very idea of agency, the actions themselves, and the linking of action to its fruit. That precision matters, because it means the claim can be checked against experience piece by piece rather than accepted as a single unfalsifiable mystical assertion, and each piece maps onto something the surrounding verses individually build on.

Original commentary written for this site · © Amit Singh — original commentary

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पाठ

व्यक्तिगत

  • जब आप अपने बारे में किसी ऐसी मान्यता को जाँचने का प्रयास कर रहे हों जो परखने के लिए बहुत अमूर्त लगती है — मैं अपने विचार नहीं हूँ, मैं अपना काम नहीं हूँ — तो उसे एक अविभाज्य पूरे के रूप में स्वीकार या अस्वीकार करने के बजाय, इस श्लोक की तरह उसे विशिष्ट और अलग-अलग किए जा सकने वाले दावों में बाँटें।

व्यावसायिक

  • जब कोई डिज़ाइन-सिद्धांत लागू करने के लिए बहुत अमूर्त लगे — प्रणाली लचीली होनी चाहिए — तो उसे एक अस्पष्ट गुण मानने के बजाय, उसे विफलता को अलग रखने और उबरने में लगने वाले समय जैसे बिंदुवार, जाँचे जा सकने वाले गुणों में बाँटें, ठीक वैसे ही जैसे यह श्लोक कर्तापन, कर्म और फल को अलग-अलग गिनाता है।

परिवार और समाज

  • जब आप किसी के द्वारा आपके बारे में किए गए किसी व्यापक दावे को परख रहे हों — तुम कभी सुनते ही नहीं — तो पूरे अस्पष्ट आरोप को एक साथ स्वीकार या अस्वीकार करने के बजाय, उनसे कहें कि वे उसे विशिष्ट, जाँचे जा सकने वाले उदाहरणों में बाँटें।

AI अनुवाद। मातृभाषी पाठक द्वारा समीक्षित।

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