5.24

संस्कृत

योऽन्तःसुखोऽन्तरारामस्तथान्तर्ज्योतिरेव यः । स योगी ब्रह्मनिर्वाणं ब्रह्मभूतोऽधिगच्छति ॥

yo 'ntaḥsukho 'ntarārāmas tathāntarjyotir eva yaḥ sa yogī brahmanirvāṇaṃ brahmabhūto 'dhigacchati

अनुवाद

जो अपने भीतर ही सुखी है, भीतर ही रमण करता है और जिसके भीतर ही प्रकाश है, वह योगी ब्रह्मरूप होकर ब्रह्मनिर्वाण को प्राप्त होता है।

संस्कृत से AI अनुवाद, ए. बेसेंट (सार्वजनिक डोमेन) की सहायता से। मातृभाषी पाठक द्वारा समीक्षित।

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व्याख्या

भीतर की ओर उन्मुख तीन समास एक के बाद एक आते हैं — भीतर सुखी, भीतर रमण करने वाला, भीतर प्रकाशित — और ये मिलकर आत्मनिर्भरता का ऐसा पूर्ण चित्र गढ़ते हैं कि बाहरी संसार संदर्भ-बिंदु के रूप में काम करना ही बंद कर देता है। ब्रह्मभूत, “ब्रह्म हो चुका”, निकटता या समानता का नहीं, बल्कि तादात्म्य का एक चौंकाने वाला दावा है, और ब्रह्मनिर्वाण उस शान्ति का नाम है जो इसके साथ आती है — निर्वाण शब्द यहाँ अपने अधिक प्रसिद्ध बौद्ध प्रयोग से सदियों पहले प्रकट होता है, और इसका अर्थ विनाश की अपेक्षा पृथकता के बोध के बुझ जाने के अधिक निकट है। यह श्लोक दोहरी भूमिका निभा रहा है: यह सिद्ध अवस्था का वर्णन भी है और उस बात की पूर्व-झलक भी, जिस तक पहुँचना अध्याय 6 अपने बीच के श्लोकों में किसी को सिखाएगा। ब्रह्मभूत — “ब्रह्म हो चुका” — तादात्म्य है, सादृश्य नहीं; यह गीता 6.27 और गीता 18.54 में उस अवस्था के रूप में फिर आता है जिससे भक्ति संभव होती है। ब्रह्मनिर्वाण वही अध्याय 2 का ब्रह्मनिर्वाण है जो गीता 2.72 में आया था, और अब उसे एक साधना करने वाला कर्ता मिल गया है।

AI अनुवाद। मातृभाषी पाठक द्वारा समीक्षित।

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गहराई से अध्ययन करें

शब्द-दर-शब्द

yo 'ntaḥsukho 'ntarārāmasयो ऽन्तःसुखो ऽन्तरारामस्
जो भीतर सुखी है, भीतर ही रमण करता है (yaḥ + antaḥ-sukhaḥ + antaḥ-ārāmaḥ)
tathāntarjyotir eva yaḥतथान्तर्ज्योतिः एव यः
और इसी प्रकार जो भीतर ही प्रकाशित है (tathā + antaḥ-jyotiḥ + eva + yaḥ)
sa yogī brahmanirvāṇaṃस योगी ब्रह्मनिर्वाणं
वह योगी ब्रह्मनिर्वाण को (saḥ + yogī + brahma-nirvāṇam)
brahmabhūto 'dhigacchatiब्रह्मभूतो ऽधिगच्छति
ब्रह्मरूप होकर प्राप्त करता है (brahma-bhūtaḥ + adhigacchati)

संस्कृत और अंग्रेज़ी शब्द-दर-शब्द अर्थों से AI अनुवाद। मातृभाषी पाठक द्वारा समीक्षित।

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टीका

Site Commentary

The three compounds aren’t simple repetition — they escalate. “Happy within” names a feeling state; “delighting within” adds an active, ongoing engagement rather than a passive condition; “illuminated within” moves further still, into something closer to perception. The verse isn’t just saying inward three times for emphasis — it traces a progression from feeling to activity to seeing, three different faculties all relocated to the same interior address.

Original commentary written for this site · © Amit Singh — original commentary

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पाठ

व्यक्तिगत

  • जब आप भीतर की ओर उन्मुख कोई अभ्यास बना रहे हों, तो यह अपेक्षा रखें कि वह एक से अधिक क्षमताओं से होकर आगे बढ़ेगा — केवल स्थिर महसूस करना ही नहीं, बल्कि वहाँ सक्रिय रूप से जुड़ाव पाना, और अंततः उसी स्थान से अधिक स्पष्ट रूप से देख पाना; पहली और सबसे आसान परत पर ही रुक न जाएँ।

व्यावसायिक

  • जब आप गहन कार्य को टिकाऊ बनाने का प्रयास कर रहे हों, तो केवल अधिक शांत महसूस करने पर न रुकें — कार्य में ही सच्चा जुड़ाव पाने की ओर बढ़ें, और अंततः उस अधिक शांत अवस्था से अधिक स्पष्ट निर्णय-क्षमता की ओर; हर परत अगली परत को सहारा देती है।

परिवार और समाज

  • यदि आप ऐसा संतोष विकसित कर रहे हैं जो आपके परिवार के उतार-चढ़ाव पर निर्भर न हो, तो जान लें कि अधिक शांत महसूस करना केवल पहली परत है — सच्ची स्थिरता का अर्थ प्रायः उसी स्थिर स्थान से सक्रिय जुड़ाव और अधिक स्पष्ट दृष्टि पाना भी होता है।

AI अनुवाद। मातृभाषी पाठक द्वारा समीक्षित।

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