1.37

संस्कृत

तस्मान्नार्हा वयं हन्तुं धार्तराष्ट्रान्स्वबान्धवान् । स्वजनं हि कथं हत्वा सुखिनः स्याम माधव ॥

tasmān nārhā vayaṃ hantuṃ dhārtarāṣṭrān svabāndhavān svajanaṃ hi kathaṃ hatvā sukhinaḥ syāma mādhava

अनुवाद

इसलिए हमें अपने ही बान्धव धृतराष्ट्र के पुत्रों को मारना उचित नहीं है। हे माधव, अपने ही स्वजनों को मारकर हम भला कैसे सुखी हो सकेंगे?

संस्कृत से AI अनुवाद, ए. बेसेंट (सार्वजनिक डोमेन) की सहायता से। मातृभाषी पाठक द्वारा समीक्षित।

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व्याख्या

एक स्पष्ट “इसलिए”, जो श्लोक 31–36 में बनाए गए तर्क को पूरा करता है: कोई भी विजय, राज्य या आत्मरक्षा इसे उचित नहीं ठहराती, जिन लोगों की बात हो रही है वे दोनों ओर के स्वजन हैं, और वैसे भी उन्हें मारकर सुख नहीं मिल सकता। श्लोक 38–39 तुरंत इसी के ऊपर एक दूसरा, इससे जुड़ा तर्क शुरू करते हैं।

AI अनुवाद। मातृभाषी पाठक द्वारा समीक्षित।

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गहराई से अध्ययन करें

शब्द-दर-शब्द

tasmānतस्मान्
इसलिए
nārhā vayaṃनार्हा वयं
हम योग्य नहीं हैं
hantuṃहन्तुं
मारने के
dhārtarāṣṭrānधार्तराष्ट्रान्
धृतराष्ट्र के पुत्रों को
sva-bāndhavānस्व-बान्धवान्
अपने ही बन्धुओं को
svajanaṃ hi kathaṃ hatvāस्वजनं हि कथं हत्वा
क्योंकि अपने ही स्वजनों को मारकर कैसे
sukhinaḥ syāmaसुखिनः स्याम
हम सुखी होंगे
mādhavaमाधव
हे माधव

संस्कृत और अंग्रेज़ी शब्द-दर-शब्द अर्थों से AI अनुवाद। मातृभाषी पाठक द्वारा समीक्षित।

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टीका

Site Commentary

“Therefore” is a strange word to find inside a lament — it marks this as the close of a formal argument, not an outburst. Verses 31 through 37 have actually been built like a proof: premises about victory, motive, and consequence, stacked toward this explicit conclusion. What looks like one continuous speech is really argument one closing right before argument two opens in verse 38.

Original commentary written for this site · © Amit Singh — original commentary

अवधारणाएँ

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पाठ

व्यक्तिगत

  • जब आप किसी कठिन निर्णय पर विचार कर रहे हों, तो ध्यान दें कि आपका तर्क सचमुच किसी 'इसलिए' तक — किसी वास्तविक निष्कर्ष तक — पहुँचा है, या आप अब भी केवल आधार-वाक्य जोड़ते जा रहे हैं; आप इनमें से किस स्थिति में हैं, यह जानकर आपको पता चलता है कि अब कदम उठाने का समय है या अभी और सोचने का।

व्यावसायिक

  • कोई सिफ़ारिश प्रस्तुत करने से पहले जाँच लें कि आपके तर्क में सचमुच कोई 'इसलिए' वाला क्षण है — एक स्पष्ट बिंदु जहाँ आधार-वाक्य एक घोषित निष्कर्ष में बदल जाते हैं — न कि वह औपचारिक रूप से कभी समाप्त हुए बिना बस और अधिक संदर्भ में भटकता चला जाता है।

परिवार और समाज

  • जब आप परिवार को कोई कठिन निर्णय समझा रहे हों, तो उस क्षण को स्पष्ट रूप से चिह्नित करना सहायक हो सकता है जब आप अपने निष्कर्ष पर पहुँचते हैं — 'तो, इसलिए' — बजाय इसके कि आपके कारण बस आगे खिंचते जाएँ और कभी किसी निश्चित बिंदु पर न पहुँचें।

AI अनुवाद। मातृभाषी पाठक द्वारा समीक्षित।

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