संस्कृत
निमित्तानि च पश्यामि विपरीतानि केशव । न च श्रेयोऽनुपश्यामि हत्वा स्वजनमाहवे ॥
nimittāni ca paśyāmi viparītāni keśava na ca śreyo'nupaśyāmi hatvā svajanam āhave
अनुवाद
हे केशव, मुझे विपरीत लक्षण भी दिखाई दे रहे हैं, और युद्ध में अपने ही स्वजनों को मारकर मुझे कोई कल्याण भी नहीं दिखता।
संस्कृत से AI अनुवाद, ए. बेसेंट (सार्वजनिक डोमेन) की सहायता से। मातृभाषी पाठक द्वारा समीक्षित।
व्याख्या
श्लोक 29–30 में जो शारीरिक रूप से टूट जाना था, वह यहाँ आकर एक वास्तविक तर्क की शुरुआत बन जाता है: अपशकुन दिख रहे हैं, और स्वजनों को मारने से कोई भलाई होती नहीं दिखती। यह अर्जुन का पहला स्पष्ट दावा है। इसी से वह अपना पक्ष रखना शुरू करता है, जिसे वह पूरे अध्याय में आगे बढ़ाएगा, और जिसका उत्तर देने में कृष्ण पूरा अध्याय 2 लगा देंगे।
AI अनुवाद। मातृभाषी पाठक द्वारा समीक्षित।
गहराई से अध्ययन करें
शब्द-दर-शब्द
- nimittāniनिमित्तानि
- शकुन, लक्षण
- ca paśyāmiच पश्यामि
- और मैं देखता हूँ
- viparītāniविपरीतानि
- विपरीत, उलटे
- keśavaकेशव
- हे केशव
- na ca śreyo'nupaśyāmiन च श्रेयोऽनुपश्यामि
- और न ही मुझे कोई कल्याण दिखता है
- hatvāहत्वा
- मारकर
- svajanamस्वजनं
- अपने ही लोगों को
- āhaveआहवे
- युद्ध में
संस्कृत और अंग्रेज़ी शब्द-दर-शब्द अर्थों से AI अनुवाद। मातृभाषी पाठक द्वारा समीक्षित।
टीका
Site Commentary
Notice the two claims share a single breath without being distinguished: an omen (a supernatural signal) and a cost-benefit judgment (no foreseeable good) are offered as equally valid support for the same conclusion. It’s a common move under pressure — reaching for whatever evidence is at hand rather than sorting which evidence is actually load-bearing.
Original commentary written for this site · © Amit Singh — original commentary
अवधारणाएँ
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पाठ
व्यक्तिगत
- जब आप किसी कठिन निर्णय के पक्ष में तर्क जुटा रहे हों, तो देखें कि कहीं आप सचमुच अलग-अलग प्रकार के प्रमाणों को — एक अंतर्मन की भावना और लाभ-हानि के वास्तविक आकलन को — ऐसे तो नहीं मिला रहे मानो दोनों का वज़न बराबर हो; हो सकता है दोनों एक ही दिशा में संकेत करें, फिर भी दोनों समान रूप से भरोसेमंद न हों।
व्यावसायिक
- किसी सिफ़ारिश को उचित ठहराते समय, उसे प्रस्तुत करने से पहले अपने अंतर्ज्ञान पर आधारित संकेतों को अपने वास्तविक, आँकड़ों पर आधारित तर्क से अलग करें — हितधारक प्रायः पहचान लेते हैं कि कब किसी अंतर्मन की भावना को विश्लेषण से निकले निष्कर्ष का रूप दिया जा रहा है।
परिवार और समाज
- जब आप परिवार को किसी बात के लिए मनाने की कोशिश कर रहे हों, तो ध्यान दें कि कहीं आप किसी भावना ("इसमें कुछ ठीक नहीं लग रहा") को किसी वास्तविक, सोचे-समझे तर्क के साथ ऐसे तो नहीं मिला रहे मानो दोनों एक ही तरह के प्रमाण हों — कौन-सा क्या है, यह स्पष्ट कर देने से आपकी बात अधिक ईमानदार बनती है, भले ही वह तुरंत उतनी प्रभावशाली न लगे।
AI अनुवाद। मातृभाषी पाठक द्वारा समीक्षित।
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