संस्कृत
इदं तु ते गुह्यतमं प्रवक्ष्याम्यनसूयवे । ज्ञानं विज्ञानसहितं यज्ज्ञात्वा मोक्ष्यसेऽशुभात् ॥
idaṃ tu te guhyatamaṃ pravakṣyāmy anasūyave jñānaṃ vijñānasahitaṃ yaj jñātvā mokṣyase'śubhāt
अनुवाद
भगवान ने कहा: तुम दोष-दृष्टि से रहित हो, इसलिए अब मैं तुम्हें यह परम गोपनीय ज्ञान विज्ञान सहित बताऊँगा, जिसे जानकर तुम अशुभ से मुक्त हो जाओगे।
संस्कृत से AI अनुवाद, ए. बेसेंट (सार्वजनिक डोमेन) की सहायता से। मातृभाषी पाठक द्वारा समीक्षित।
व्याख्या
कृष्ण उपदेश में एक नया चरण आरम्भ करते हैं। वे “परम गोपनीय रहस्य” (गुह्यतमम्) बताने का वचन देते हैं, जो केवल सैद्धान्तिक ज्ञान नहीं, बल्कि प्रत्यक्ष अनुभूति (विज्ञान) से जुड़ा है — यह पिछले अध्यायों में रखी गई तत्त्वमीमांसा से एक कदम आगे है। अध्याय का अपना शीर्षक, “राजविद्या, राजगुह्य”, वस्तुतः इसी श्लोक की अपनी शब्दावली में उसकी झलक मिल जाती है, इससे पहले कि श्लोक 2 उसे स्पष्ट शब्दों में कहे। अर्जुन को “दोष-दृष्टि से रहित” (अनसूयवे, छिद्रान्वेषण से मुक्त) कहकर सम्बोधित करना आगे आने वाली शिक्षा के लिए ग्रहणशीलता को पूर्व-शर्त बना देता है। गुह्यतम — “सबसे छिपा हुआ” — क्रमशः बढ़ते प्रकटीकरण का एक सूत्र आरम्भ करता है, जो गीता 15.20 और गीता 18.64 तक जाता है। हर “सबसे गोपनीय” उपदेश पिछले उपदेश से अधिक भक्तिमय है।
AI अनुवाद। मातृभाषी पाठक द्वारा समीक्षित।
गहराई से अध्ययन करें
शब्द-दर-शब्द
- idaṃ tu te guhyatamaṃइदं तु ते गुह्यतमं
- किन्तु यह परम गोपनीय तुम्हें (idam + tu + te + guhya-tamam)
- pravakṣyāmy anasūyaveप्रवक्ष्यांय् अनसूयवे
- मैं कहूँगा, तुम दोष न देखने वाले से (pravakṣyāmi + anasūyave)
- jñānaṃ vijñānasahitaṃज्ञानं विज्ञानसहितं
- विज्ञान सहित ज्ञान (jñānam + vijñāna-sahitam)
- yaj jñātvā mokṣyase'śubhātयज् ज्ञात्वा मोक्ष्यसेऽशुभात्
- जिसे जानकर तुम अशुभ से मुक्त हो जाओगे (yat + jñātvā + mokṣyase + aśubhāt)
संस्कृत और अंग्रेज़ी शब्द-दर-शब्द अर्थों से AI अनुवाद। मातृभाषी पाठक द्वारा समीक्षित।
टीका
Site Commentary
Krishna doesn’t gate this teaching on Arjuna’s intelligence or spiritual attainment — he gates it on a disposition: anasūyave, free of fault-finding. The precondition for receiving the deepest teaching turns out to be temperamental, not intellectual — a listener who won’t pick the argument apart before hearing it through gets access that a sharper but more contrarian listener would not.
Original commentary written for this site · © Amit Singh — original commentary
अवधारणाएँ
इस श्लोक को अपनाएँ
पाठ
व्यक्तिगत
- किसी भरोसेमंद व्यक्ति की सलाह को खारिज करने से पहले ध्यान दें कि आप उसे परख रहे हैं या पहले से ही उसमें कमी ढूँढ़ रहे हैं — आप किस मनोभाव के साथ आते हैं, उसके अनुसार एक ही बात अलग ढंग से असर करती है, और पहला मनोभाव आपके अपने वश में है।
व्यावसायिक
- जब कोई मार्गदर्शक या वरिष्ठ सहकर्मी बिना माँगे आपको सुझाव दे, तो उसे सचमुच आत्मसात करने से पहले ही खंडन करने की सहज प्रवृत्ति को रोकें — आपको जो मार्गदर्शन मिलता है, वह केवल उसकी अपनी योग्यता पर ही नहीं, बल्कि कुछ हद तक इस पर भी निर्भर करता है कि आप उसे सुनने के लिए कितने खुले मन से आते हैं।
परिवार और समाज
- जब कोई करीबी व्यक्ति आपके साथ अपने मन की कोई नाज़ुक बात साझा करे, तो तुरंत प्रतिवाद ढूँढ़े बिना सुनें — बिना विरोध के सुना जाना ही अक्सर वह असली पूर्व-शर्त होती है जिसके बाद कोई व्यक्ति और खुलकर अपनी बात कहता है।
AI अनुवाद। मातृभाषी पाठक द्वारा समीक्षित।
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