7.30

संस्कृत

साधिभूताधिदैवं मां साधियज्ञं च ये विदुः । प्रयाणकालेऽपि च मां ते विदुर्युक्तचेतसः ॥ ३० ॥

sādhibhūtādhidaivaṃ māṃ sādhiyajñaṃ ca ye viduḥ prayāṇakāle'pi ca māṃ te vidur yuktacetasaḥ

अनुवाद

जो लोग मुझे अधिभूत और अधिदैव के सहित तथा अधियज्ञ के सहित जानते हैं, वे स्थिर चित्त वाले लोग प्रयाणकाल में भी मुझे जानते हैं।

संस्कृत से AI अनुवाद, ए. बेसेंट (सार्वजनिक डोमेन) की सहायता से। मातृभाषी पाठक द्वारा समीक्षित।

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व्याख्या

अध्याय उसी छह पदों वाली सूची पर समाप्त होता है जिससे श्लोक 29 आरम्भ हुआ था — ब्रह्म, अध्यात्म, कर्म, अधिभूत, अधिदैव, अधियज्ञ — और यह वचन देता है कि जो लोग कृष्ण को इन सभी रूपों में जानते हैं, वे उस ज्ञान को “प्रयाण के समय भी”, अर्थात् मृत्यु के समय भी, बनाए रखते हैं। यही विशिष्ट वचन अध्याय 8 को जन्म देता है: वहाँ अर्जुन का आरम्भिक प्रश्न ठीक इसी श्लोक का पद-दर-पद सीधा अनुवर्ती प्रश्न है, जिससे यहाँ का अध्याय-विराम समापन से अधिक एक ठहराव बन जाता है।

प्रयाणकालेऽपि — “प्रयाण के समय भी” — वह वाक्यांश है जो अध्याय 8 को खोलता है। छह प्रकार के इस ज्ञान को मृत्यु के समय बनाए रखना ही वह बात है जिसे गीता 8.5–गीता 8.13 अधियज्ञ की शिक्षा का सम्पूर्ण व्यावहारिक दाँव बना देंगे।

AI अनुवाद। मातृभाषी पाठक द्वारा समीक्षित।

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गहराई से अध्ययन करें

शब्द-दर-शब्द

sādhibhūtādhidaivaṃ māṃसाधिभूताधिदैवं मां
अधिभूत और अधिदैव सहित मुझको (sa-adhibhūta-adhidaivam + mām)
sādhiyajñaṃ ca ye viduḥसाधियज्ञं च ये विदुः
और अधियज्ञ सहित जो जानते हैं (sa-adhiyajñam + ca + ye + viduḥ)
prayāṇakāle'pi ca māṃप्रयाणकालेऽपि च मां
और प्रयाणकाल में भी मुझको (prayāṇa-kāle + api + ca + mām)
te vidur yuktacetasaḥते विदुः युक्तचेतसः
वे युक्त चित्त वाले जानते हैं (te + viduḥ + yukta-cetasaḥ)

संस्कृत और अंग्रेज़ी शब्द-दर-शब्द अर्थों से AI अनुवाद। मातृभाषी पाठक द्वारा समीक्षित।

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टीका

Site Commentary

Chapter 7 opened by asking Arjuna to take up yoga before any teaching would be given, and it closes by promising that knowledge held to at death depends on that same harmonized state, yukta-cetasaḥ. The chapter’s opening condition and its closing promise are the same discipline named twice, which makes the thirty verses in between less a self-contained lesson than the content that fills the space between a practice being asked for and its payoff finally being named.

Original commentary written for this site · © Amit Singh — original commentary

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पाठ

व्यक्तिगत

  • आप अभी जिस भी अभ्यास के प्रति प्रतिबद्ध होते हैं, वही अभ्यास सबसे कठिन, अंतिम क्षणों में भी फल देता रहेगा — जो अनुशासन आप शुरुआत में बनाते हैं और जिस संयम की आपको बाद में ज़रूरत होगी, वे दो अलग चीज़ें नहीं हैं, वे एक ही धागा हैं। शुरुआत में यह जानते हुए निवेश करें कि यही अंत भी है।

व्यावसायिक

  • किसी परियोजना की शुरुआत में आपकी टीम जो अनुशासन बनाती है — कोड की साफ़-सफ़ाई, स्थिति की ईमानदार रिपोर्टिंग — वही अनुशासन परियोजना के अंतिम चरण के संकट के दबाव में भी टिका रहेगा। शुरुआती कठोरता और अंतिम चरण की दृढ़ता को अलग-अलग निवेश न समझें; वे एक ही क्षमता हैं, जिसकी परीक्षा दो अलग-अलग समयों पर होती है।

परिवार और समाज

  • किसी रिश्ते के साधारण शुरुआती दिनों में आप जो स्थिर ध्यान देते हैं, वही क्षमता आपको उसके बाद के सबसे कठिन क्षणों से पार ले जाएगी — स्वास्थ्य को लेकर कोई डर, कोई क्षति। जो आप अभी बनाते हैं और जिसकी आपको तब ज़रूरत होगी, वे दो अलग चीज़ें नहीं हैं।

AI अनुवाद। मातृभाषी पाठक द्वारा समीक्षित।

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