संस्कृत
नाहं प्रकाशः सर्वस्य योगमायासमावृतः । मूढोऽयं नाभिजानाति लोको मामजमव्ययम् ॥ २५ ॥
nāhaṃ prakāśaḥ sarvasya yogamāyāsamāvṛtaḥ mūḍho'yaṃ nābhijānāti loko mām ajam avyayam
अनुवाद
अपनी योगमाया से ढका हुआ मैं सबके सामने प्रकट नहीं होता। यह मूढ़ संसार मुझ अजन्मा और अविनाशी को नहीं पहचानता।
संस्कृत से AI अनुवाद, ए. बेसेंट (सार्वजनिक डोमेन) की सहायता से। मातृभाषी पाठक द्वारा समीक्षित।
व्याख्या
कृष्ण अपने छिपे रहने की बात सीधे कहते हैं: वे सबके सामने प्रकट नहीं हैं, योगमाया से ढके हुए हैं, इसलिए “यह मोहित संसार” उन्हें अजन्मा और अविनाशी के रूप में नहीं पहचान पाता — यही आत्म-गोपन है जिसके कारण श्लोक 24 का भ्रम संभव ही होता है। यह जान-बूझकर अनसुलझा छोड़ा गया तनाव है, जिस पर गीता तब तक पूरी तरह नहीं लौटती जब तक अध्याय 9 में सबके सामने रहते हुए भी छिपे रहने पर उसका अपना चिंतन नहीं आता। योग-माया-समावृत — “योग-माया से ढका हुआ” — इस छिपाव को सक्रिय और स्वयं चुना हुआ बताता है, कोई सीमा नहीं। गीता 9.11 फिर इसी पर लौटता है: “मूढ़ लोग मनुष्य-रूप में रहने वाले मेरी अवहेलना करते हैं।”
AI अनुवाद। मातृभाषी पाठक द्वारा समीक्षित।
गहराई से अध्ययन करें
शब्द-दर-शब्द
- nāhaṃ prakāśaḥ sarvasyaनाहं प्रकाशः सर्वस्य
- मैं सबके लिए प्रकट नहीं हूँ (na + aham + prakāśaḥ + sarvasya)
- yogamāyāsamāvṛtaḥयोगमायासमावृतः
- योगमाया से ढका हुआ (yoga-māyā-samāvṛtaḥ)
- mūḍho'yaṃ nābhijānātiमूढोऽयं नाभिजानाति
- यह मूढ़ नहीं पहचानता (mūḍhaḥ + ayam + na + abhijānāti)
- loko mām ajam avyayamलोको मां अजं अव्ययं
- संसार मुझ अजन्मे, अविनाशी को (lokaḥ + mām + ajam + avyayam)
संस्कृत और अंग्रेज़ी शब्द-दर-शब्द अर्थों से AI अनुवाद। मातृभाषी पाठक द्वारा समीक्षित।
टीका
Site Commentary
Verse 2 opened the chapter promising knowledge “in its completeness, with nothing left over.” This verse, twenty-three verses later, has the same speaker admitting he isn’t manifest to everyone and stays veiled by his own creative power. The two claims aren’t contradictory once you notice what each is actually about — completeness of teaching for the prepared listener, versus concealment from the world at large — but the chapter never announces that reconciliation, it just lets both stand.
Original commentary written for this site · © Amit Singh — original commentary
अवधारणाएँ
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पाठ
व्यक्तिगत
- आप किसी के साथ अपने एक पहलू के बारे में सच्चे मन से खुले और पूरी तरह स्पष्ट रह सकते हैं, और साथ ही ईमानदारी से अपने दूसरे पहलुओं को निजी भी रख सकते हैं — इन दोनों बातों को एक साथ सच होने के लिए खुलकर आपस में मेल बैठाना ज़रूरी नहीं है। पूरे खुलेपन और उचित निजता को साथ-साथ रहने दें, और दोनों के बीच के अंतर की सफ़ाई देने के लिए खुद को मजबूर न करें।
व्यावसायिक
- आप अपनी टीम के साथ उन निर्णयों और उनके पीछे के तर्क के बारे में पूरी तरह पारदर्शी रह सकते हैं जो उनके काम पर असर डालते हैं, और साथ ही कुछ बातों को — कोई निजी संघर्ष, कोई ऐसा विचार जो अभी अंतिम नहीं हुआ — उचित रूप से निजी भी रख सकते हैं। जो बातें उनके लिए मायने रखती हैं, उनके बारे में पूरी पारदर्शिता का अर्थ यह नहीं कि आप अपने बारे में सब कुछ बता दें।
परिवार और समाज
- आप अपने किसी करीबी से वादा कर सकते हैं कि जो कुछ उससे जुड़ा है उसके बारे में आप पूरी तरह ईमानदार रहेंगे, और फिर भी अपने भीतरी जीवन के वे हिस्से अपने पास रख सकते हैं जो केवल आपके अपने हैं। ये दोनों बातें साथ-साथ रह सकती हैं, और यह रेखा कहाँ खिंचती है, इसकी सफ़ाई देना आप पर कोई ऋण नहीं है।
AI अनुवाद। मातृभाषी पाठक द्वारा समीक्षित।
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