7.13

संस्कृत

त्रिभिर्गुणमयैर्भावैरेभिः सर्वमिदं जगत् । मोहितं नाभिजानाति मामेभ्यः परमव्ययम् ॥ १३ ॥

tribhir guṇamayair bhāvair ebhiḥ sarvam idaṃ jagat mohitaṃ nābhijānāti mām ebhyaḥ param avyayam

अनुवाद

गुणों से बने इन तीन भावों से मोहित यह सारा जगत् मुझे नहीं पहचानता, जो इन सबसे परे और अविनाशी हूँ।

संस्कृत से AI अनुवाद, ए. बेसेंट (सार्वजनिक डोमेन) की सहायता से। मातृभाषी पाठक द्वारा समीक्षित।

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व्याख्या

यह वह मोह-तंत्र है जिसे श्लोक 12 संभव बनाता है: चूँकि तीनों गुण ही वह हैं जिनका हर कोई सीधे अनुभव करता है, और चूँकि वे अपने स्रोत को प्रकट करने के बजाय ढक देते हैं, इसलिए “यह जगत” सामूहिक रूप से उस अविनाशी सत्य को नहीं पहचान पाता जो उसकी अपनी बद्धता के पीछे स्थित है। श्लोक 14 इस आवरण करने वाली शक्ति का सीधे नाम लेता है।

गुण परदे का काम ठीक इसी कारण करते हैं कि वे वह सब कुछ हैं जो व्यक्ति अनुभव करता है: उनके बाहर कोई ऐसा दृष्टि-बिंदु नहीं है जहाँ से परम् अव्ययम्, अर्थात् उनसे परे के अविनाशी, को देखा जा सके। गीता 7.14 उस परदे को उसका नाम देता है।

AI अनुवाद। मातृभाषी पाठक द्वारा समीक्षित।

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गहराई से अध्ययन करें

शब्द-दर-शब्द

tribhir guṇamayair bhāvairत्रिभिः गुणमयैः भावैः
गुणों से बने तीन भावों द्वारा (tribhiḥ + guṇa-mayaiḥ + bhāvaiḥ)
ebhiḥ sarvam idaṃ jagatएभिः सर्वं इदं जगत्
इनसे, यह सारा जगत (ebhiḥ + sarvam + idam + jagat)
mohitaṃ nābhijānātiमोहितं नाभिजानाति
मोहित होकर नहीं जानता (mohitam + na + abhijānāti)
mām ebhyaḥ param avyayamमां एभ्यः परं अव्ययं
इनसे परे, अविनाशी मुझको (mām + ebhyaḥ + param + avyayam)

संस्कृत और अंग्रेज़ी शब्द-दर-शब्द अर्थों से AI अनुवाद। मातृभाषी पाठक द्वारा समीक्षित।

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टीका

Site Commentary

The trap described here is specific: the three gunas aren’t just objects the world fails to see past, they’re the very lens the world is seeing with. There’s no gap the deluded person could step into to get an unconditioned look, because the conditioning is doing the looking. That’s a harder problem than simple ignorance — it isn’t that the answer is hidden, it’s that the instrument doing the searching is itself part of what’s obscuring it.

Original commentary written for this site · © Amit Singh — original commentary

अवधारणाएँ

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पाठ

व्यक्तिगत

  • जब आप किसी स्थिति को केवल एक ही तरह से देखने में अटक जाएँ, तो सोचिए कि जिस दृष्टि से आप उसे परख रहे हैं — आपकी आदतन मनोदशा, आपकी सामान्य धारणाएँ — कहीं वही तो स्पष्ट दृष्टि को रोक नहीं रही। उसी दृष्टि से और ध्यान से देखने भर से काम नहीं चलेगा; आपको एक अलग दृष्टि चाहिए।

व्यावसायिक

  • जब कोई टीम बार-बार एक ही कमी को अनदेखा कर देती है, तो सोचिए कि अपने काम को परखने के लिए वह जिस प्रक्रिया या जिन मापदंडों का उपयोग कर रही है, कहीं वही तो उस अनदेखी का कारण नहीं हैं। उसी त्रुटिपूर्ण साधन से और अधिक विश्लेषण करने से यह ठीक नहीं होगा — साधन को ही बदलना होगा।

परिवार और समाज

  • यदि आप किसी व्यक्ति को बार-बार एक ही तरह से गलत समझते हैं, तो सोचिए कि उसे समझने का आपका सामान्य तरीका — वह धारणा जिसका सहारा आप हमेशा लेते हैं — कहीं ठीक वही तो उसे स्पष्ट रूप से देखने से आपको रोक नहीं रहा। उस दृष्टि से और ध्यान से देखने के बजाय, उसे सचेत रूप से एक ओर रखकर देखें।

AI अनुवाद। मातृभाषी पाठक द्वारा समीक्षित।

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