7.28

संस्कृत

येषां त्वन्तगतं पापं जनानां पुण्यकर्मणाम् । ते द्वन्द्वमोहनिर्मुक्ता भजन्ते मां दृढव्रताः ॥ २८ ॥

yeṣāṃ tv antagataṃ pāpaṃ janānāṃ puṇyakarmaṇām te dvandvamohanirmuktā bhajante māṃ dṛḍhavratāḥ

अनुवाद

किन्तु जिन पुण्यकर्मा लोगों का पाप समाप्त हो गया है, वे द्वन्द्वों के मोह से मुक्त होकर दृढ़ व्रत के साथ मेरी उपासना करते हैं।

संस्कृत से AI अनुवाद, ए. बेसेंट (सार्वजनिक डोमेन) की सहायता से। मातृभाषी पाठक द्वारा समीक्षित।

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व्याख्या

श्लोक 27 के सार्वभौमिक कथन का अपवाद यह है: जिनके संचित पापों का अंत हो चुका है, वे उसी द्वन्द्व-मोह से मुक्त हो जाते हैं, जिसे श्लोक 27 ने जन्म से ही भीतर बसा हुआ बताया था। यहाँ मुक्ति इच्छा और द्वेष को सीधे दबाकर प्राप्त नहीं की जाती, बल्कि शुद्ध कर्म (पुण्यकर्मणाम्) के सहज परिणाम के रूप में आती है। यह कोई नया अनुशासन प्रस्तुत करने के बजाय अध्याय 2 की कर्मयोग की शिक्षा से जुड़ता है। द्वन्द्व से मुक्ति पुण्य-कर्म, अर्थात् शुद्ध कर्म, का परिणाम है, न कि इच्छा और द्वेष को सीधे लक्ष्य बनाने वाली कोई अलग तकनीक। यह आगे के श्लोकों की दृढ़व्रत भक्ति का मार्ग खोलती है।

AI अनुवाद। मातृभाषी पाठक द्वारा समीक्षित।

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गहराई से अध्ययन करें

शब्द-दर-शब्द

yeṣāṃ tv antagataṃ pāpaṃयेषां त्व् अन्तगतं पापं
परन्तु जिनका पाप समाप्त हो गया है (yeṣām + tu + anta-gatam + pāpam)
janānāṃ puṇyakarmaṇāmजनानां पुण्यकर्मणां
पुण्य कर्म करने वाले लोग (janānām + puṇya-karmaṇām)
te dvandvamohanirmuktāते द्वन्द्वमोहनिर्मुक्ता
वे द्वन्द्वों के मोह से मुक्त होकर (te + dvandva-moha-nirmuktāḥ)
bhajante māṃ dṛḍhavratāḥभजन्ते मां दृढव्रताः
दृढ़ व्रत के साथ मुझे भजते हैं (bhajante + mām + dṛḍha-vratāḥ)

संस्कृत और अंग्रेज़ी शब्द-दर-शब्द अर्थों से AI अनुवाद। मातृभाषी पाठक द्वारा समीक्षित।

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टीका

Site Commentary

“Sin come to an end” is a passive, almost administrative phrase — not sin destroyed in a single decisive act, but sin that has simply run out, the way a term expires. That word choice matters: it frames freedom from delusion less as a battle won and more as a process that reaches its natural conclusion, which is a different kind of patience than the willpower verse 27’s dvandva-delusion might otherwise seem to demand.

Original commentary written for this site · © Amit Singh — original commentary

अवधारणाएँ

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पाठ

व्यक्तिगत

  • किसी पुराने ढर्रे से मुक्ति अक्सर एक निर्णायक जीत के रूप में नहीं आती — वह लगातार और बिना किसी चमक-दमक वाले प्रयास से धीरे-धीरे अपना समय पूरा कर लेती है, और फिर चुपचाप समाप्त हो जाती है। अपने आपको यह छूट दें कि आप किसी नाटकीय सफलता के क्षण की नहीं, बल्कि धीरे-धीरे समाप्त होने की अपेक्षा रखें।

व्यावसायिक

  • तकनीकी कर्ज़ या कोई बिगड़ी हुई प्रक्रिया शायद ही कभी एक वीरतापूर्ण सुधार से ख़त्म होती है — वह अधिकतर लगातार अपनाए गए, बिना चमक-दमक वाले अनुशासन से धीरे-धीरे घटती है। एक ही निर्णायक पुनर्लेखन पर पूरी योजना का दाँव लगाने के बजाय इसी तरह की धैर्यपूर्ण कमी की योजना बनाएँ।

परिवार और समाज

  • परिवार में लंबे समय से चला आ रहा तनाव अक्सर एक बड़ी, सब कुछ सुलझा देने वाली बातचीत से समाप्त नहीं होता — वह लगातार और धैर्यपूर्ण प्रयास से धीरे-धीरे घिसता जाता है, जब तक कि वह बस रह ही नहीं जाता। जब स्थिर प्रयास पहले से ही अपना काम कर रहा हो, तब किसी नाटकीय सफलता के क्षण की प्रतीक्षा में न अटके रहें।

AI अनुवाद। मातृभाषी पाठक द्वारा समीक्षित।

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