संस्कृत
यो यो यां यां तनुं भक्तः श्रद्धयाऽर्चितुमिच्छति । तस्य तस्याचलां श्रद्धां तामेव विदधाम्यहम् ॥ २१ ॥
yo yo yāṃ yāṃ tanuṃ bhaktaḥ śraddhayārcitum icchati tasya tasyācalāṃ śraddhāṃ tām eva vidadhāmy aham
अनुवाद
जो-जो भक्त जिस-जिस रूप की श्रद्धा से पूजा करना चाहता है, उस-उस भक्त की उसी श्रद्धा को मैं अचल कर देता हूँ।
संस्कृत से AI अनुवाद, ए. बेसेंट (सार्वजनिक डोमेन) की सहायता से। मातृभाषी पाठक द्वारा समीक्षित।
व्याख्या
उल्लेखनीय रूप से उदार: कृष्ण अन्य देवताओं की उपासना को केवल सहन ही नहीं करते, बल्कि उसे बनाए रखने वाली श्रद्धा स्वयं प्रदान करते हैं, भक्त चाहे कोई भी रूप चुने। यह जान-बूझकर श्लोक 15 की उस कठोर बात के साथ तनाव में रखा गया है, जो उन लोगों के बारे में है जो कभी उनके पास आते ही नहीं — अंतर भक्ति की सच्चाई का नहीं, बल्कि उसके लक्ष्य और उसके उद्देश्य का है, जिसे श्लोक 23 आगे चलकर निंदित करने के बजाय श्रेणियों में बाँटता है। जो उपासना कहीं और लक्षित है, उसमें भी कृष्ण का श्रद्धा का स्रोत होना इस अध्याय का सबसे उदार कदम है: भटके हुए भक्त की अचला श्रद्धा, “अटल श्रद्धा”, भी उन्हीं की देन है। अध्याय 17 स्वयं श्रद्धा को गुण के आधार पर विभिन्न प्रकारों में बाँटता है।
AI अनुवाद। मातृभाषी पाठक द्वारा समीक्षित।
गहराई से अध्ययन करें
शब्द-दर-शब्द
- yo yo yāṃ yāṃ tanuṃ bhaktaḥयो यो यां यां तनुं भक्तः
- जो-जो भक्त जिस-जिस रूप को (yaḥ + yaḥ + yām + yām + tanum + bhaktaḥ)
- śraddhayārcitum icchatiश्रद्धयार्चितुं इच्छति
- श्रद्धा से पूजना चाहता है (śraddhayā + arcitum + icchati)
- tasya tasyācalāṃ śraddhāṃतस्य तस्याचलां श्रद्धां
- उस-उस की अचल श्रद्धा को (tasya + tasya + acalām + śraddhām)
- tām eva vidadhāmy ahamतां एव विदधांय् अहं
- उसी को मैं दृढ़ करता हूँ (tām + eva + vidadhāmi + aham)
संस्कृत और अंग्रेज़ी शब्द-दर-शब्द अर्थों से AI अनुवाद। मातृभाषी पाठक द्वारा समीक्षित।
टीका
Site Commentary
One verse after describing desire as having stolen someone’s discernment, Krishna doesn’t wait for that discernment to be restored before responding — he simply supplies steady faith to whatever form the person, in that diminished state, still manages to reach for. Judgment and generosity sit back to back here without resolving into each other: the verdict on the choice stands, and the support for the person making it stands too.
Original commentary written for this site · © Amit Singh — original commentary
अवधारणाएँ
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पाठ
व्यक्तिगत
- आप अपने किसी चुनाव के बारे में यह साफ़ और खरा निर्णय रख सकते हैं कि वह सबसे अच्छा मार्ग नहीं है, और फिर भी उस पर चलते हुए स्वयं को सच्चा सहारा देते रह सकते हैं। दिशा के बारे में निर्णय और उस पर चलने वाले व्यक्ति के प्रति करुणा, इन दोनों का एक-दूसरे को काट देना ज़रूरी नहीं है।
व्यावसायिक
- आप ईमानदारी से कह सकते हैं कि टीम ने जो तरीका चुना है वह उपलब्ध तरीकों में सबसे मज़बूत नहीं है, और फिर भी उसे अच्छी तरह लागू करने में उनका पूरा साथ दे सकते हैं। जब तक वे 'सही' तरीका न चुनें, तब तक साथ न देना आम तौर पर जितना सिखाता है, उससे ज़्यादा नुकसान करता है। आलोचना और समर्थन, दोनों को एक साथ थामे रखें।
परिवार और समाज
- आप अपने किसी करीबी से साफ़-साफ़ कह सकते हैं कि आपकी राय में उनका चुनाव सबसे समझदारी भरा नहीं है, और फिर भी जब वे उसे जीएँ तो पूरी तरह उनके साथ खड़े रह सकते हैं। ईमानदार निर्णय और बिना शर्त समर्थन, दोनों को एक-दूसरे की प्रतीक्षा करने की ज़रूरत नहीं है।
AI अनुवाद। मातृभाषी पाठक द्वारा समीक्षित।
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