संस्कृत
स तया श्रद्धया युक्तस्तस्याराधनमीहते । लभते च ततः कामान्मयैव विहितान्हि तान् ॥ २२ ॥
sa tayā śraddhayā yuktas tasyārādhanam īhate labhate ca tataḥ kāmān mayaiva vihitān hi tān
अनुवाद
उस श्रद्धा से युक्त होकर वह उस देवता की आराधना करना चाहता है, और फिर उसी से अपनी कामनाएँ प्राप्त करता है, जो वास्तव में मेरे द्वारा ही विधान की गई होती हैं।
संस्कृत से AI अनुवाद, ए. बेसेंट (सार्वजनिक डोमेन) की सहायता से। मातृभाषी पाठक द्वारा समीक्षित।
व्याख्या
यह श्लोक श्लोक 21 के विवरण को एक क्रम से आगे बढ़ाता है: श्रद्धा से उपासना होती है, उपासना से फल मिलता है, और कृष्ण साफ़ कहते हैं कि “फलों का विधान” वे स्वयं ही करते हैं, तब भी जब नाम के लिए उपासना पाने वाला कोई दूसरा देवता हो। यह व्यवस्था एक ही है, भले ही भक्त इसे इस रूप में न समझता हो। मयैव विहितान् — “मेरे द्वारा ही विधान किए गए” — यह बात चक्र को पूरा कर देती है: किसी भी देवता की ओर की गई उपासना के फल कृष्ण के माध्यम से ही आते हैं। भक्त का नक्शा गलत है; पर क्षेत्र फिर भी उन्हीं का है। श्रद्धा इसलिए फल देती है कि वह किससे जोड़ती है, इसलिए नहीं कि वह किसका नाम लेती है।
AI अनुवाद। मातृभाषी पाठक द्वारा समीक्षित।
गहराई से अध्ययन करें
शब्द-दर-शब्द
- sa tayā śraddhayā yuktasस तया श्रद्धया युक्तस्
- वह उस श्रद्धा से युक्त होकर (saḥ + tayā + śraddhayā + yuktaḥ)
- tasyārādhanam īhateतस्याराधनं ईहते
- उस [देवता] की आराधना करने का प्रयत्न करता है (tasya + ārādhanam + īhate)
- labhate ca tataḥ kāmānलभते च ततः कामान्
- और उससे अपनी कामनाएँ पाता है (labhate + ca + tataḥ + kāmān)
- mayaiva vihitān hi tānमयैव विहितान् हि तान्
- जो वास्तव में मेरे द्वारा ही विधान की हुई हैं (mayā + eva + vihitān + hi + tān)
संस्कृत और अंग्रेज़ी शब्द-दर-शब्द अर्थों से AI अनुवाद। मातृभाषी पाठक द्वारा समीक्षित।
टीका
Site Commentary
Krishna could easily have let the other gods take the credit here and stayed silent about the actual mechanism — instead he interrupts to insist he’s the one “decreeing the benefits” even when a devotee has no idea that’s true. Claiming authorship of an outcome someone else believes they earned elsewhere isn’t a boast in this context, it’s closer to a disclosure: the system worked, even though the person operating within it misunderstood which system it was.
Original commentary written for this site · © Amit Singh — original commentary
अवधारणाएँ
इस श्लोक को अपनाएँ
पाठ
व्यक्तिगत
- जब आपके लिए कुछ अच्छा हो जाए, तो उसके कारण की जो ऊपरी व्याख्या आप ख़ुद को दे रहे हैं, उससे आगे देखें और उसके नीचे काम कर रही असली व्यवस्था को पहचानें — अनुशासन, सही समय, पहले से रखी गई नींव — भले ही अभी आप इसका श्रेय पूरी तरह किसी और चीज़ को दे रहे हों। असली कारण को समझना इस बात से ज़्यादा मायने रखता है कि फ़िलहाल श्रेय किस कहानी को मिल रहा है।
व्यावसायिक
- जब कोई परियोजना सफल हो, तो परिणाम के असली कारण तक पहुँचें, बजाय इसके कि टीम अभी जिसे निर्णायक मान रही है, उसी से संतुष्ट हो जाएँ — असली प्रेरक शक्ति, चाहे वह प्रक्रिया में कोई बदलाव हो या पहले लिया गया कोई निर्णय, अक्सर वह नहीं होती जिसे श्रेय मिल रहा है, और सफलता को दोहराने के लिए यह अंतर जानना मायने रखता है।
परिवार और समाज
- जब कोई पारिवारिक परंपरा या कोई भाव किसी को सुकून देता है, तो उन्हें उसका आनंद लेने देना ठीक है और यह ज़रूरी नहीं कि आप उसके कारण के बारे में उनकी धारणा को सुधारें — पर मन ही मन यह जानें कि जो चीज़ उनकी मदद कर रही है, उसका असली स्रोत क्या है। असली व्यवस्था को समझना इस बात से ज़्यादा महत्त्व रखता है कि श्रेय किसे मिल रहा है।
AI अनुवाद। मातृभाषी पाठक द्वारा समीक्षित।
स्वयं से पूछें
इस श्लोक को पढ़ने से आगे ले जाने के कुछ तरीके। टिक और नोट इसी ब्राउज़र में रहते हैं।