7.14

संस्कृत

दैवी ह्येषा गुणमयी मम माया दुरत्यया । मामेव ये प्रपद्यन्ते मायामेतां तरन्ति ते ॥ १४ ॥

daivī hy eṣā guṇamayī mama māyā duratyayā mām eva ye prapadyante māyām etāṃ taranti te

अनुवाद

मेरी यह गुणमयी दैवी माया पार करने में कठिन है। जो केवल मेरी ही शरण में आते हैं, वे इस माया को पार कर जाते हैं।

संस्कृत से AI अनुवाद, ए. बेसेंट (सार्वजनिक डोमेन) की सहायता से। मातृभाषी पाठक द्वारा समीक्षित।

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व्याख्या

यहाँ माया को उसका नाम मिलता है — श्लोक 13 का गुणों से उत्पन्न भ्रम “दिव्य” (दैवी) है और “जिसे भेदना कठिन है” (दुरत्यया); यह संसार की कोई त्रुटि नहीं, बल्कि उसकी अंतर्निहित विशेषता है। इससे निकलने का मार्ग संकरा भी है और तात्कालिक भी: अपने आप में न प्रयत्न, न समझ, बल्कि कृष्ण के पास आना (मामेव ये प्रपद्यन्ते) — यही वह क्रिया है जिसका प्रयोग श्लोक 19 दुर्लभ महात्मा की चरम अनुभूति के लिए करता है, और यही वह क्रिया है जिसका प्रयोग श्लोक 20, विडंबनापूर्ण ढंग से, उन लोगों के लिए करता है जो इसके बजाय छोटे देवताओं की शरण लेते हैं। दैवी… दुरत्यया — “दिव्य, जिसे पार करना कठिन है” — माया को सोच-समझकर रची गई विशेषता बना देता है, कोई खराबी नहीं। बताया गया एकमात्र निकास है प्रपद्यन्ते, शरण लेना — वही क्रिया, और वही कृत्य, जिसे गीता 7.20 गलत दिशा में मुड़ा हुआ दिखाता है।

AI अनुवाद। मातृभाषी पाठक द्वारा समीक्षित।

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गहराई से अध्ययन करें

शब्द-दर-शब्द

daivī hy eṣā guṇamayīदैवी ह्य् एषा गुणमयी
क्योंकि यह दैवी, गुणमयी (daivī + hi + eṣā + guṇa-mayī)
mama māyā duratyayāमम माया दुरत्यया
मेरी माया, जिसे पार करना कठिन है (mama + māyā + duratyayā)
mām eva ye prapadyanteमां एव ये प्रपद्यन्ते
जो केवल मेरी ही शरण लेते हैं (mām + eva + ye + prapadyante)
māyām etāṃ taranti teमायां एतां तरन्ति ते
वे इस माया को पार कर जाते हैं (māyām + etām + taranti + te)

संस्कृत और अंग्रेज़ी शब्द-दर-शब्द अर्थों से AI अनुवाद। मातृभाषी पाठक द्वारा समीक्षित।

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टीका

Site Commentary

Calling maya “daivī” — divine — is a strange word choice for an obstacle Krishna is simultaneously telling people to get past. It isn’t described as a flaw, an accident, or an enemy force; it’s built in, by design, the way a lock is built into a door rather than jammed by rust. That reframes struggling against it: difficulty here isn’t evidence something has gone wrong, it’s evidence the structure is working as intended.

Original commentary written for this site · © Amit Singh — original commentary

Site Commentary — Second Reading

Notice what the verse withholds: no technique, no gradual practice, no method for crossing maya — only a single verb, prapadyante, “they come to me.” Elsewhere the text is exacting about method — posture, breath, the discipline of repeated practice — but here, at the hardest crossing it names, it offers no engineering plan, only a direction. Worth sitting with if your instinct in the face of a stubborn problem is always to build a better process: this verse suggests some obstacles don’t yield to a better method, only to where you’re already pointed.

Original commentary written for this site · © Amit Singh — original commentary

अवधारणाएँ

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पाठ

व्यक्तिगत

  • जब पूरी कोशिश के बावजूद कोई चीज़ लगातार कठिन लगे, तो सोचिए कि यह कठिनाई शायद उस स्थिति की बनावट में ही हो, न कि इस बात का संकेत कि आप कुछ गलत कर रहे हैं — कुछ बाधाएँ स्थिति की संरचना में ही निहित होती हैं, वे व्यक्तिगत विफलता का प्रमाण नहीं होतीं। ऐसी अंतर्निहित बाधा से जूझना फिर भी सार्थक है; बस वह आपकी गलती का प्रमाण नहीं है।

व्यावसायिक

  • जब सच्चे प्रयास के बावजूद कोई प्रक्रिया सुधार का विरोध करती रहे, तो सोचिए कि यह रुकावट शायद व्यवस्था की संरचना में ही निहित हो, न कि काम को अमल में लाने की विफलता। 'अंतर्निहित' और 'टूटी हुई' के बीच भेद पहचानने से यह तय होता है कि आप प्रक्रिया को ठीक करेंगे या उसके विरुद्ध एक कठिन, लगातार प्रयास को स्वीकार करेंगे।

परिवार और समाज

  • जब किसी रिश्ते में बार-बार उभरने वाला तनाव दोनों ओर से सच्चे प्रयास के बावजूद दूर न हो, तो सोचिए कि यह शायद दो अलग-अलग लोगों के निकट होने की संरचनात्मक विशेषता हो, न कि इस बात का प्रमाण कि कोई विफल हो रहा है। कुछ टकराव स्वाभाविक रूप से निहित होते हैं और उन्हें एक बार के समाधान की नहीं, बल्कि निरंतर देखभाल की ज़रूरत होती है।

AI अनुवाद। मातृभाषी पाठक द्वारा समीक्षित।

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