7.29

संस्कृत

जरामरणमोक्षाय मामाश्रित्य यतन्ति ये । ते ब्रह्म तद्विदुः कृत्स्नमध्यात्मं कर्म चाखिलम् ॥ २९ ॥

jarāmaraṇamokṣāya mām āśritya yatanti ye te brahma tad viduḥ kṛtsnam adhyātmaṃ karma cākhilam

अनुवाद

जो मेरा आश्रय लेकर बुढ़ापे और मृत्यु से मुक्ति के लिए प्रयत्न करते हैं, वे उस ब्रह्म को, सम्पूर्ण अध्यात्म को और समस्त कर्म को जान लेते हैं।

संस्कृत से AI अनुवाद, ए. बेसेंट (सार्वजनिक डोमेन) की सहायता से। मातृभाषी पाठक द्वारा समीक्षित।

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व्याख्या

जो लोग जन्म और मृत्यु से मुक्ति के लिए प्रयत्न करते हैं, वे “ब्रह्म को पूर्ण रूप से, सम्पूर्ण आत्म-ज्ञान को और समस्त कर्म को जानते हैं” — ये तीन पद हैं, जिनकी परिभाषा देने के लिए श्लोक रुकता नहीं। श्लोक 30 तीन और पद जोड़ता है — अधिभूत, अधिदैव और अधियज्ञ — और इस तरह छह पदों की एक सूची पूरी होती है, जिसे अध्याय 8 के बिलकुल आरम्भ में अर्जुन स्पष्ट रूप से कृष्ण से एक-एक पद करके खोलने को कहते हैं — यह श्लोक एक पूर्वझलक का काम करता है, जिसका प्रतिफल पूरे एक अध्याय के लिए टाल दिया गया है। छह निर्देशांकों में से तीन यहीं आते हैं — ब्रह्म, अध्यात्म, कर्म — और जान-बूझकर अपरिभाषित छोड़े गए हैं। गीता 8.1–गीता 8.4 में अर्जुन शब्दावली माँगते हैं, और कृष्ण उसे प्रस्तुत करते हैं।

AI अनुवाद। मातृभाषी पाठक द्वारा समीक्षित।

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गहराई से अध्ययन करें

शब्द-दर-शब्द

jarāmaraṇamokṣāyaजरामरणमोक्षाय
बुढ़ापे और मृत्यु से छुटकारे के लिए (jarā-maraṇa-mokṣāya)
mām āśritya yatanti yeमां आश्रित्य यतन्ति ये
जो मेरा आश्रय लेकर प्रयत्न करते हैं (mām + āśritya + yatanti + ye)
te brahma tad viduḥ kṛtsnamते ब्रह्म तद् विदुः कृत्स्नं
वे उस ब्रह्म को पूर्ण रूप से जानते हैं (te + brahma + tat + viduḥ + kṛtsnam)
adhyātmaṃ karma cākhilamअध्यात्मं कर्म चाखिलं
सम्पूर्ण अध्यात्म को और समस्त कर्म को (adhyātmam + karma + ca + akhilam)

संस्कृत और अंग्रेज़ी शब्द-दर-शब्द अर्थों से AI अनुवाद। मातृभाषी पाठक द्वारा समीक्षित।

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टीका

Site Commentary

This verse hands Arjuna three technical terms and moves on without defining any of them, and next chapter opens with Arjuna asking, essentially, “what did you just say?” It’s a rare moment where the Gita’s own structure enacts its content: verse 2 promised knowledge without remainder, but the delivery of that knowledge turns out to be staged, term by term, rather than handed over complete in one pass.

Original commentary written for this site · © Amit Singh — original commentary

अवधारणाएँ

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पाठ

व्यक्तिगत

  • किसी बात को अभी रूपरेखा में समझ लेना और उसकी पूरी गहराई को बाद में, चरणों में, आने देना ठीक है; यह अपेक्षा रखने की ज़रूरत नहीं कि किसी विचार से पहली बार मिलते ही वह पूरी तरह समझ में आ जाए। सच्ची समझ अक्सर चरणों में आती है, एक साथ नहीं मिलती, तब भी जब उसे पूरा का पूरा देने का वादा किया गया हो।

व्यावसायिक

  • कोई जटिल बदलाव लागू करते समय यह ठीक है कि पहले पूरी तस्वीर रूपरेखा में रखी जाए और तकनीकी विवरण बाद के किसी सत्र में खोले जाएँ, बजाय इसके कि एक ही बैठक में पूरी समझ दे देने की कोशिश की जाए। चरणों में बनी समझ अक्सर एक घनी, संपूर्ण ब्रीफ़िंग से बेहतर असर करती है।

परिवार और समाज

  • किसी बच्चे को, या परिवार के ऐसे सदस्य को जो किसी विषय में नया है, कोई जटिल बात समझाते समय यह ठीक है कि अभी रूपरेखा दे दी जाए और बाद में चरणों में गहराई में जाया जाए — एक ही बैठक में पूरी समझ सौंप देना ज़रूरी नहीं है, और आमतौर पर संभव भी नहीं होता।

AI अनुवाद। मातृभाषी पाठक द्वारा समीक्षित।

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