7.9

संस्कृत

पुण्यो गन्धः पृथिव्यां च तेजश्चास्मि विभावसौ । जीवनं सर्वभूतेषु तपश्चास्मि तपस्विषु ॥ ९ ॥

puṇyo gandhaḥ pṛthivyāṃ ca tejaś cāsmi vibhāvasau jīvanaṃ sarvabhūteṣu tapaś cāsmi tapasviṣu

अनुवाद

पृथ्वी में पवित्र गन्ध मैं हूँ और अग्नि में तेज मैं हूँ; सब प्राणियों में जीवन मैं हूँ और तपस्वियों में तप मैं हूँ।

संस्कृत से AI अनुवाद, ए. बेसेंट (सार्वजनिक डोमेन) की सहायता से। मातृभाषी पाठक द्वारा समीक्षित।

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व्याख्या

श्लोक 8 से शुरू हुई सूची आगे बढ़ती है: पृथ्वी में गंध, अग्नि में तेज, सभी प्राणियों में जीवन-शक्ति, तपस्वियों में तप। हर बात एक ही ढाँचे पर चलती है — एक मूलभूत, पहचान बनाने वाला गुण, जिसे उसके भौतिक आधार से अलग करके देखा गया है — और यह क्रम श्लोक 12 के उस निर्णायक कदम की ओर बढ़ता है, जहाँ इस पूरे ढाँचे को एक नाम और एक सीमा मिलती है। जीवनं सर्वभूतेषु — “जो कुछ जीवित है, उसमें जीवन” — वही जीवभूत उच्चतर प्रकृति है जिसकी बात गीता 7.5 में हुई थी, पर अब उसे ब्रह्माण्ड-विज्ञान के रूप में कहने के बजाय अनुभव के भीतर स्थित किया गया है।

AI अनुवाद। मातृभाषी पाठक द्वारा समीक्षित।

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गहराई से अध्ययन करें

शब्द-दर-शब्द

puṇyo gandhaḥ pṛthivyāṃ caपुण्यो गन्धः पृथिव्यां च
और पृथ्वी में पवित्र गन्ध (puṇyaḥ + gandhaḥ + pṛthivyām + ca)
tejaś cāsmi vibhāvasauतेजश् चास्मि विभावसौ
और अग्नि में तेज मैं हूँ (tejaḥ + ca + asmi + vibhāvasau)
jīvanaṃ sarvabhūteṣuजीवनं सर्वभूतेषु
सभी प्राणियों में जीवन (jīvanam + sarva-bhūteṣu)
tapaś cāsmi tapasviṣuतपश् चास्मि तपस्विषु
और तपस्वियों में तप मैं हूँ (tapaḥ + ca + asmi + tapasviṣu)

संस्कृत और अंग्रेज़ी शब्द-दर-शब्द अर्थों से AI अनुवाद। मातृभाषी पाठक द्वारा समीक्षित।

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टीका

Site Commentary

The earlier items in this list are qualities things simply have — fragrance is just there in the earth, brilliance just there in fire. Austerity is different: it’s not a passive quality but a chosen effort, something a person has to sustain over time. Slipping tapas into the same list as fragrance and brilliance quietly claims that disciplined striving belongs to the same order of reality as a sunrise — not manufactured by the ascetic so much as expressed through him.

Original commentary written for this site · © Amit Singh — original commentary

अवधारणाएँ

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पाठ

व्यक्तिगत

  • अनुशासित प्रयास को केवल इसलिए कम न आँकें कि किसी स्वाभाविक प्रतिभा की तुलना में उसमें मेहनत लगती महसूस होती है — इस श्लोक की सूची में निरंतर अभ्यास उसी श्रेणी में आता है जिसमें सूर्योदय का तेज; वह आपके माध्यम से अभिव्यक्त होता है, न कि केवल इच्छाशक्ति के बल पर गढ़ा जाता है।

व्यावसायिक

  • निरंतर, बिना चमक-दमक वाले अनुशासन को — रोज़ की उन आदतों को जो किसी व्यवस्था को भरोसेमंद बनाए रखती हैं — स्वाभाविक प्रतिभा या किसी शानदार अंतर्दृष्टि की कौंध के बराबर एक सच्ची शक्ति मानें, उसका कोई कमतर विकल्प नहीं। दोनों उसी सूची में आते हैं जिसमें वे चीज़ें हैं जो वास्तव में काम करती हैं।

परिवार और समाज

  • किसी रिश्ते में आप जो स्थिर, बिना चमक-दमक वाला प्रयास लगाते हैं — एक साधारण दिन के बाद दूसरे साधारण दिन, लगातार साथ निभाना — वह किसी भी भव्य रोमांटिक भाव-प्रदर्शन जितने ही सम्मान का हक़दार है। निरंतर अनुशासन और स्वाभाविक आत्मीयता आपस में होड़ करने वाले गुण नहीं हैं; वे एक ही तरह की चीज़ हैं।

AI अनुवाद। मातृभाषी पाठक द्वारा समीक्षित।

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