संस्कृत
भूमिरापोऽनलो वायुः खं मनो बुद्धिरेव च । अहङ्कार इतीयं मे भिन्ना प्रकृतिरष्टधा ॥ ४ ॥
bhūmir āpo'nalo vāyuḥ khaṃ mano buddhir eva ca ahaṅkāra itīyaṃ me bhinnā prakṛtir aṣṭadhā
अनुवाद
पृथ्वी, जल, अग्नि, वायु, आकाश, मन, बुद्धि और अहंकार — यह मेरी प्रकृति है, जो आठ प्रकार से विभक्त है।
संस्कृत से AI अनुवाद, ए. बेसेंट (सार्वजनिक डोमेन) की सहायता से। मातृभाषी पाठक द्वारा समीक्षित।
व्याख्या
निम्न प्रकृति (अपरा प्रकृति) को आठ श्रेणियों में गिनाया गया है: पाँच स्थूल महाभूत तथा मन, बुद्धि और अहंकार — मूलतः यह भौतिक जगत और सामान्य व्यक्तिगत मनोविज्ञान, दोनों की कच्ची सामग्री है। यह अध्याय 2-6 के नैतिक और व्यक्तिगत केंद्र से एक हटकर कदम है; यहाँ कृष्ण सृष्टि-विज्ञान की बात कर रहे हैं, और वह आधार रख रहे हैं जिसे श्लोक 5 यह बताकर पूरा करता है कि इस आठ गुनी सूची में क्या छूट गया है। यह सूची सबसे स्थूल (भूमि) से सबसे सूक्ष्म (अहंकार) तक जाती है, और जान-बूझकर मन और बुद्धि को लेखे के भौतिक पक्ष में रखती है — प्रकृति, आत्मा नहीं। अध्याय पृष्ठ पर दिया गया चित्र इन आठों को उस एक के सामने रखता है जिसे श्लोक 5 जोड़ता है।
AI अनुवाद। मातृभाषी पाठक द्वारा समीक्षित।
गहराई से अध्ययन करें
शब्द-दर-शब्द
- bhūmir āpo'nalo vāyuḥभूमिः आपोऽनलो वायुः
- पृथ्वी, जल, अग्नि, वायु (bhūmiḥ + āpaḥ + analaḥ + vāyuḥ)
- khaṃ mano buddhir eva caखं मनो बुद्धिः एव च
- आकाश, मन और बुद्धि भी (kham + manaḥ + buddhiḥ + eva + ca)
- ahaṅkāra itīyaṃ meअहङ्कार इतीयं मे
- और अहंकार — इस प्रकार यह मेरी (ahaṅkāraḥ + iti + iyam + me)
- bhinnā prakṛtir aṣṭadhāभिन्ना प्रकृतिः अष्टधा
- आठ प्रकार से विभक्त प्रकृति (bhinnā + prakṛtiḥ + aṣṭadhā)
संस्कृत और अंग्रेज़ी शब्द-दर-शब्द अर्थों से AI अनुवाद। मातृभाषी पाठक द्वारा समीक्षित।
टीका
Site Commentary
The surprising item on this list isn’t earth or water, it’s mind and intellect sitting in the same “inferior” category as physical elements. Ordinary usage treats thought and reason as the higher faculties in a person, the very opposite of raw matter — this verse quietly overturns that ranking before the next verse even names what actually counts as higher. Nothing on this list, including the mind that’s reading it, gets to claim the top of the hierarchy by default.
Original commentary written for this site · © Amit Singh — original commentary
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पाठ
व्यक्तिगत
- यह न मान लें कि आपके अपने विचार और तर्क अपने-आप आपकी सर्वोच्च क्षमता हैं, केवल इसलिए कि वे 'आप' जैसे लगते हैं — यह श्लोक मन और बुद्धि को स्थूल पदार्थ के साथ एक ही समूह में रखता है। यह याद दिलाता है कि सबसे महत्वपूर्ण प्रश्नों पर सोचने वाला मन एक उपकरण है, अंतिम प्रमाण नहीं।
व्यावसायिक
- किसी टीम के अपने विश्लेषण या 'अंतर्मन की आवाज़' पर भरोसे को जाँच-परख का स्थान न लेने दें — बुद्धि और विवेक ऐसे साधन हैं जिनका आप उपयोग करते हैं, अचूक निर्णय नहीं। उन्हें अपने-आप प्रामाणिक मान लेना ठीक वही उलटफेर है जिससे यह श्लोक सावधान करता है।
परिवार और समाज
- जब किसी निकट व्यक्ति के साथ असहमति में आपको पूरा विश्वास हो कि आप सही हैं, तो याद रखें कि आपका अपना तर्क एक क्षमता है जिसका आप उपयोग कर रहे हैं, सत्य की कोई स्वतः गारंटी नहीं — अपनी निश्चितता को जितना स्वाभाविक लगता है, उससे थोड़ा ढीला पकड़ें।
AI अनुवाद। मातृभाषी पाठक द्वारा समीक्षित।
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