7.12

संस्कृत

ये चैव सात्त्विका भावा राजसास्तामसाश्च ये । मत्त एवेति तान्विद्धि न त्वहं तेषु ते मयि ॥ १२ ॥

ye caiva sāttvikā bhāvā rājasās tāmasāś ca ye matta eveti tān viddhi na tv ahaṃ teṣu te mayi

अनुवाद

जो भी सात्त्विक भाव हैं और जो राजस तथा तामस भाव हैं, उन सबको तुम मुझसे ही उत्पन्न जानो। किन्तु मैं उनमें नहीं हूँ, वे मुझमें हैं।

संस्कृत से AI अनुवाद, ए. बेसेंट (सार्वजनिक डोमेन) की सहायता से। मातृभाषी पाठक द्वारा समीक्षित।

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व्याख्या

श्लोक 8-11 में स्वयं को वस्तुओं के भीतर का सार-गुण बताने के बाद, कृष्ण अब एक संभावित भ्रम को दूर करते हैं: तीनों गुण — सत्त्व, रजस्, तमस्, अर्थात् सात्त्विक, राजसिक और तामसिक भाव — उन्हीं से उत्पन्न होते हैं, पर वे स्वयं उन गुणों के भीतर समाए हुए नहीं हैं। यह संबंध उस बात को उलट देता है जो श्लोक 8-11 से लग सकती है: मैं उनमें नहीं, बल्कि वे मुझमें — गुण कृष्ण से निकलते हैं, उनके बराबर नहीं हैं। न त्वहं तेषु ते मयि — “मैं उनमें नहीं; वे मुझमें हैं” — श्लोक 8 के ढाँचे का ठीक उलटा रूप है, और यह जान-बूझकर है: गुण कृष्ण से उत्पन्न होते हैं, पर उन्हें बाँधते नहीं, ठीक वैसे ही जैसे गीता 9.4–गीता 9.5 सभी प्राणियों के बारे में कहेंगे।

AI अनुवाद। मातृभाषी पाठक द्वारा समीक्षित।

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गहराई से अध्ययन करें

शब्द-दर-शब्द

ye caiva sāttvikā bhāvāये चैव सात्त्विका भावा
जो भी सात्त्विक भाव हैं (ye + ca + eva + sāttvikāḥ + bhāvāḥ)
rājasās tāmasāś ca yeराजसास् तामसाश् च ये
और जो राजस तथा तामस भाव हैं (rājasāḥ + tāmasāḥ + ca + ye)
matta eveti tān viddhiमत्त एवेति तान् विद्धि
उन्हें मुझसे ही उत्पन्न जानो (mattaḥ + eva + iti + tān + viddhi)
na tv ahaṃ teṣu te mayiन त्व् अहं तेषु ते मयि
परन्तु मैं उनमें नहीं हूँ, वे मुझमें हैं (na + tu + aham + teṣu + te + mayi)

संस्कृत और अंग्रेज़ी शब्द-दर-शब्द अर्थों से AI अनुवाद। मातृभाषी पाठक द्वारा समीक्षित।

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टीका

Site Commentary

Verses 8 through 11 kept saying Krishna is in things — taste in water, splendor in fire. This verse flips the preposition for the gunas specifically: not I in them, but they in Me. The grammar itself carries the correction; after four verses of one relationship, the fifth quietly substitutes its reverse, which is exactly the mistake Krishna seems to anticipate someone making from the pattern he’d just established.

Original commentary written for this site · © Amit Singh — original commentary

अवधारणाएँ

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पाठ

व्यक्तिगत

  • आपके भीतर से गुज़रने वाली मनोदशाओं और अवस्थाओं को — आपकी ऊर्जा को, आपकी प्रेरणा को — वह न समझ बैठें जो आप उनके नीचे वास्तव में हैं। वे आपमें उठती हैं; आप उनके भीतर समाए हुए नहीं हैं, तब भी नहीं जब उनमें से कोई इतनी तीव्र हो कि वही सब कुछ लगने लगे।

व्यावसायिक

  • किसी टीम की वर्तमान अवस्था को — तेज़ गति का कोई दौर हो या कोई ढीलापन — उसकी मूल क्षमता न समझ बैठें। वह अवस्था टीम की क्षमता के भीतर घटित हो रही है, उलटा नहीं; क्षमता अधिक स्थिर तथ्य है, और वह अवस्था बीत जाएगी।

परिवार और समाज

  • जब आपका कोई प्रियजन किसी कठिन मनोदशा या दौर से गुज़र रहा हो, तो याद रखें कि वह मनोदशा उसके भीतर घटित हो रही है, वह उसका पूरा अस्तित्व नहीं है। इस अंतर को थामे रहें, तब भी जब इस समय केवल वह मनोदशा ही दिखाई दे रही हो।

AI अनुवाद। मातृभाषी पाठक द्वारा समीक्षित।

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