7.6

संस्कृत

एतद्योनीनि भूतानि सर्वाणीत्युपधारय । अहं कृत्स्नस्य जगतः प्रभवः प्रलयस्तथा ॥ ६ ॥

etadyonīni bhūtāni sarvāṇīty upadhāraya ahaṃ kṛtsnasya jagataḥ prabhavaḥ pralayas tathā

अनुवाद

निश्चित रूप से जान लो कि सभी प्राणियों की योनि यही है। मैं सम्पूर्ण जगत का उद्भव हूँ और उसी प्रकार उसका प्रलय भी।

संस्कृत से AI अनुवाद, ए. बेसेंट (सार्वजनिक डोमेन) की सहायता से। मातृभाषी पाठक द्वारा समीक्षित।

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व्याख्या

कृष्ण उत्पत्ति और विनाश को एक ही कथन में समेट देते हैं: वे ही वह योनि हैं जिससे सभी प्राणी उत्पन्न होते हैं, और वही वह स्थान हैं जिसमें वे फिर से लीन हो जाते हैं। इससे यह शंका दूर हो जाती है कि श्लोक 4-5 की दो प्रकृतियों का अर्थ कहीं दो अलग-अलग स्रोत तो नहीं — जड़ प्रकृति और जीव-तत्त्व, दोनों एक ही सत्ता से उत्पन्न होते हैं और उसी में लौट जाते हैं, और यह बात अनकही छोड़ने के बजाय सीधे कही गई है। प्रभव और प्रलय — प्रकट होना और फिर समा जाना — ईश्वर को सृष्टि-चक्र के दोनों छोरों का एकमात्र आधार बताते हैं। श्लोक 4–5 की दो प्रकृतियाँ एक ही स्रोत के दो पक्ष हैं, दो स्रोत नहीं।

AI अनुवाद। मातृभाषी पाठक द्वारा समीक्षित।

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गहराई से अध्ययन करें

शब्द-दर-शब्द

etadyonīni bhūtāniएतद्योनीनि भूतानि
सभी प्राणियों की योनि ये दोनों ही हैं (etat-yonīni + bhūtāni)
sarvāṇīty upadhārayaसर्वाणीत्य् उपधारय
सभी — ऐसा निश्चित रूप से जानो (sarvāṇi + iti + upadhāraya)
ahaṃ kṛtsnasya jagataḥअहं कृत्स्नस्य जगतः
मैं सम्पूर्ण जगत का (aham + kṛtsnasya + jagataḥ)
prabhavaḥ pralayas tathāप्रभवः प्रलयस् तथा
उद्भव तथा प्रलय हूँ (prabhavaḥ + pralayaḥ + tathā)

संस्कृत और अंग्रेज़ी शब्द-दर-शब्द अर्थों से AI अनुवाद। मातृभाषी पाठक द्वारा समीक्षित।

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टीका

Site Commentary

“Womb” is the first concrete image the cosmological section offers, arriving right after two verses of fairly dry classification. Origin and dissolution are usually treated as separate questions requiring separate answers — a creation story and an apocalypse — but here one word covers both without strain, treating them as a single continuous process rather than two events with different causes.

Original commentary written for this site · © Amit Singh — original commentary

अवधारणाएँ

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पाठ

व्यक्तिगत

  • आपके जीवन में कोई चीज़ कहाँ से आई और वह कहाँ जा रही है, ये अक्सर दो अलग-अलग प्रश्न नहीं, बल्कि एक ही प्रश्न होते हैं — जिन आदतों या संबंधों ने आपको गढ़ा है, वही शक्तियाँ अक्सर आगे चलकर आपको विलीन या रूपांतरित भी करेंगी। आरंभ और अंत को एक-दूसरे से असंबद्ध मानने के बजाय उस एक सूत्र को खोजिए।

व्यावसायिक

  • जिन शक्तियों ने किसी व्यवस्था की आरंभिक सफलता गढ़ी और जो शक्तियाँ आगे चलकर उसे अप्रासंगिक बना देंगी, वे अक्सर एक ही होती हैं, बस अपनी यात्रा में आगे बढ़ चुकी होती हैं — विकास और पतन को ऐसी अलग-अलग समस्याएँ न मानें जिनके लिए अलग-अलग व्याख्याएँ चाहिए। उन्हें एक ही निरंतर कारण तक खोजिए।

परिवार और समाज

  • किसी लंबे संबंध में, जिस बात ने आरंभ में दो लोगों को एक-दूसरे की ओर खींचा था और जो बात अंततः उनके बीच तनाव पैदा करती है, वह अक्सर एक ही गुण होता है, जो समय के साथ अलग ढंग से प्रकट होता है — जो तीव्रता शुरू में जुनून लगती थी, वही बाद में अस्थिरता लग सकती है। इसे दो असंबद्ध कहानियाँ नहीं, बल्कि एक ही सूत्र के रूप में पहचानिए।

AI अनुवाद। मातृभाषी पाठक द्वारा समीक्षित।

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