7.24

संस्कृत

अव्यक्तं व्यक्तिमापन्नं मन्यन्ते मामबुद्धयः । परं भावमजानन्तो ममाव्ययमनुत्तमम् ॥ २४ ॥

avyaktaṃ vyaktim āpannaṃ manyante mām abuddhayaḥ paraṃ bhāvam ajānanto mamāvyayam anuttamam

अनुवाद

बुद्धिहीन लोग मुझ अव्यक्त को व्यक्त रूप में आया हुआ मानते हैं, क्योंकि वे मेरे अविनाशी और सर्वोत्तम परम भाव को नहीं जानते।

संस्कृत से AI अनुवाद, ए. बेसेंट (सार्वजनिक डोमेन) की सहायता से। मातृभाषी पाठक द्वारा समीक्षित।

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व्याख्या

श्लोक 20-23 में बताई गई कामना से प्रेरित उपासना से यह एक अलग तरह की चूक है: यह भक्ति की नहीं, बुद्धि की भूल है। इसमें कृष्ण के अव्यक्त स्वरूप को ऐसी चीज़ मान लिया जाता है जिसने बस “व्यक्त रूप धारण किया है”। यह उसी तरह के दिव्य अवतार को गलत समझने का एक ऐसा तरीका है जो सहज ही सही लग सकता है, जबकि आगे चलकर यही परम्परा ऐसे ही अवतार को केंद्र में रखेगी। श्लोक 25 बताता है कि यह विशेष भ्रम किस प्रक्रिया से पैदा होता है। भूल यह है कि अव्यक्त को, यानी जो प्रकट नहीं है, ऐसा मान लिया जाए मानो वह कुछ समय के लिए बस दृश्य रूप में आ गया हो। ऐसा करने वाला उस परम भाव को नहीं पहचान पाता, उस उच्चतर स्वरूप को, जिसने व्यक्त में कभी प्रवेश किया ही नहीं। अध्याय 12 इसी अव्यक्त को एक मार्ग के रूप में परखता है।

AI अनुवाद। मातृभाषी पाठक द्वारा समीक्षित।

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शब्द-दर-शब्द

avyaktaṃ vyaktim āpannaṃअव्यक्तं व्यक्तिं आपन्नं
अव्यक्त को व्यक्त रूप में आया हुआ (avyaktam + vyaktim + āpannam)
manyante mām abuddhayaḥमन्यन्ते मां अबुद्धयः
बुद्धिहीन लोग मुझे मानते हैं (manyante + mām + abuddhayaḥ)
paraṃ bhāvam ajānantoपरं भावं अजानन्तो
मेरे परम भाव को न जानते हुए (param + bhāvam + ajānantaḥ)
mamāvyayam anuttamamममाव्ययं अनुत्तमं
मेरे अविनाशी, सर्वोत्तम [भाव को] (mama + avyayam + anuttamam)

संस्कृत और अंग्रेज़ी शब्द-दर-शब्द अर्थों से AI अनुवाद। मातृभाषी पाठक द्वारा समीक्षित।

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टीका

Site Commentary

There’s something unusual about a text raising, in its own voice, the exact objection a skeptical reader might raise about that text’s own premise — Krishna, who is at this very moment manifest and speaking, warning against mistaking the unmanifest for something with manifestation. It reads less like a contradiction and more like the Gita getting ahead of its own hardest question before anyone else asks it.

Original commentary written for this site · © Amit Singh — original commentary

अवधारणाएँ

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पाठ

व्यक्तिगत

  • इससे पहले कि कोई और आपकी अपनी योजना में या अपने बारे में आपकी कहानी में स्पष्ट कमी की ओर इशारा करे, उसे पहले स्वयं कहकर देखें। जैसा यह श्लोक करता है, वैसे ही अपने सबसे कठिन प्रश्न से पहले ही निपट लेना बातचीत को सफ़ाई देने से हटाकर ईमानदारी की ओर ले जाता है।

व्यावसायिक

  • इससे पहले कि कोई हितधारक आपके प्रस्ताव पर स्पष्ट आपत्ति उठाए, उसे अपनी प्रस्तुति में स्वयं उठाएँ। किसी और से पहले अपने ही पक्ष की सबसे कमज़ोर बात कह देना, यह उम्मीद करने से कहीं अधिक विश्वसनीयता बनाता है कि उस पर किसी का ध्यान नहीं जाएगा।

परिवार और समाज

  • इससे पहले कि आपका कोई करीबी आपके द्वारा लिए गए किसी निर्णय की स्पष्ट समस्या बताए, उसे पहले स्वयं, बातचीत में खुलकर कहकर देखें। अपने सबसे कठिन प्रश्न से पहले ही निपट लेना ऐसा भरोसा जगाता है जैसा पकड़े जाने की प्रतीक्षा करना कभी नहीं जगाता।

AI अनुवाद। मातृभाषी पाठक द्वारा समीक्षित।

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